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ग़ाज़ा: 'नाज़ुक युद्धविराम' है जारी, विस्थापित लोग भी लौट रहे हैं अपने घरों को

ग़ाज़ा सिटी के एक इलाक़े में कुछ लोग गाड़ी में अपना सामान लाद रहे हैं.
© WFP/Maxime Le Lijour
ग़ाज़ा सिटी के एक इलाक़े में कुछ लोग गाड़ी में अपना सामान लाद रहे हैं.

ग़ाज़ा: 'नाज़ुक युद्धविराम' है जारी, विस्थापित लोग भी लौट रहे हैं अपने घरों को

शान्ति और सुरक्षा

ग़ाज़ा पट्टी में युद्धविराम लागू हुए लगभग एक महीना हो गया है और फ़लस्तीनी परिवार धीरे-धीरे अपने पुराने घरों व समुदायों में लौट रहे हैं. फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) के प्रमुख फ़िलिपे लज़ारिनी ने एक अख़बार के लिए अपने लेख में कहा कि नाज़ुक परिस्थितियों में युद्धविराम लागू होने के बावजूद, एक हताश आबादी को कुछ राहत मिली है.

ग़ाज़ा में यूएन मानवीय सहायताकर्मी आम फ़लस्तीनियों तक जीवनरक्षक सेवाएँ पहुँचा रहे हैं और UNRWA के 100 से अधिक आश्रय केन्द्रों पर, 75 हज़ार से अधिक लोगों ने शरण ली है.

दो वर्ष तक जारी रहे घातक हिंसक युद्ध के बाद, ग़ाज़ा में हज़ारों बच्चों के लिए ख़सरा समेत अन्य बीमारियों से रोकथाम के लिए टीकाकरण मुहिम भी चलाई जा रही है.

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एक अनुमान के अनुसार, यहाँ तीन वर्ष से कम आयु के हर पाँच में से एक बच्चे को, या तो वैक्सीन की कोई ख़ुराक नहीं मिली है या फिर उनका कोई टीका छूट गया है. 

इस वजह से बच्चों के ऐसी बीमारियों की चपेट में आने का जोखिम है, जिनकी आसानी से रोकथाम की जा सकती है.

टीकाकरण के दायरे से बाहर छूट गए बच्चों के लिए चलाई जाने वाली इस मुहिम के तहत ख़सरा (एमएमआर), डिप्थीरिया, टेटनस, हेपेटाइटिस बी, पोलिया, रोटावायरस, न्यूमोनिया, समेत अन्य बीमारियों से रक्षा के लिए टीके लगाए जाएंगे.

उधर, मानवीय सहायता में समन्वय के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) के साझीदार संगठन, फ़लस्तीनी परिवारों को अपने खेतों में फिर से फ़सल उगाने, सुरक्षित माहौल में पढ़ने-लिखने, संरक्षण सेवाएँ मुहैया कराने और अन्य सेवाओं को पहुँचाने में जुटे हैं.

यूएन एजेंसी के महाआयुक्त फ़िलिपे लज़ारिनी ने ब्रिटेन के ‘द गार्डियन’ अख़बार में अपने एक लेख में कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की 20 सूत्री शान्ति योजना के पहले चरण, नाज़ुक परिस्थितियों में लागू युद्धविराम से, एक हताश आबादी को कुछ हद तक राहत मिली है.

हालाँकि उन्होंने सचेत किया कि खाद्य सामान, आश्रय व्यवस्था, स्वच्छ जल की सुलभता अब भी एक बड़ी चुनौती है और सर्दी का मौसम नज़दीक आ रहा है.

“UNRWA समेत यूएन के पास संसाधन व विशेषज्ञता है, जिनसे बड़े स्तर पर अहम मानवतावादी आवश्यकताओं को कारगर ढंग से पूरा किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए बेरोकटोक, स्वतंत्रतापूर्वक काम करने की आवश्यकता होगी.”

फ़िलिपे लज़ारिनी के अनुसार, एक वास्तविक शान्तिपूर्ण भविष्य के लिए इसराइल-फ़लस्तीन टकराव के एक ठोस राजनैतिक समाधान में सही मायनों में निवेश किए जाने की आवश्यकता है.

पश्चिमी तट की ‘जीवनरेखा’

पूर्वी येरूशेलम समेत क़ाबिज़ पश्चिमी तट में भी, यूएन एजेंसी आम लोगों के लिए समर्थन का एक बड़ा स्रोत है, जहाँ इस वर्ष की शुरुआत में इसराइल द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियान से विस्थापन व विध्वंस हुआ है.

मानवीय सहायता प्रयासों के लिए स्थान सिकुड़ता जा रहा है और इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा हिंसा को अंजाम दिए जाने की घटनाएँ बढ़ रही हैं.

क़ाबिज़ पश्चिमी तट में UNRWA मामलों के निदेशक रिचर्ड फ़्रीडरिष ने कहा कि यहाँ पर 4,600 कर्मचारी सेवारत हैं, जोकि फ़लस्तीनी प्राधिकरण के बाद दूसरा सबसे बड़ा सेवा प्रदाता है. 

उनके द्वारा इस क्षेत्र में 9.30 लाख पंजीकृति शरणार्थियों को समर्थन दिया जाता है.

स्वास्थ्य देखभाल व शिक्षा

UNRWA द्वारा संचालित स्कूलों में 48 हज़ार से अधिक बच्चे सप्ताह में पाँच दिन पढ़ते हैं, जबकि 43 स्वास्थ्य केन्द्रों पर इस वर्ष सात लाख से अधिक चिकित्सा परामर्श किए गए हैं.

रिचर्ड फ़्रीडरिष ने सोशल मीडिया पर अपने एक वीडियो में बताया कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर रहे 2.70 लाख फ़लस्तीनी शरणार्थियों को सामाजिक संरक्षा मुहैया कराई जाती है, जिसमें नक़दी सहायता भी है.

“और हम यह एक सन्दर्भ में करते हैं, एक मानवीय स्थिति में, जोकि फ़िलहाल 1967 के बाद से पश्चिमी तट में सबसे अधिक गम्भीर है.”

उन्होंने बताया कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट में अभूतपूर्व स्तर पर हुई हिंसा में 30 हज़ार से अधिक लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं. 

“UNRWA उन सभी के लिए एक जीवनरेखा है.”