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सूडान: अल फ़शर में ‘अकल्पनीय क्रूरता’ पर क्षोभ, हिंसा रोकने के लिए क़दम उठाने का आग्रह

सूडान के अल फ़शर से जान बचाकर भागने वाले लोगों ने नॉर्थ दारफ़ूर के तवीला में शरण ली है.
© UNOCHA सूडान के अल फ़शर से जान बचाकर भागने वाले लोगों ने नॉर्थ दारफ़ूर के तवीला में शरण ली है.

सूडान: अल फ़शर में ‘अकल्पनीय क्रूरता’ पर क्षोभ, हिंसा रोकने के लिए क़दम उठाने का आग्रह

मानवाधिकार

सूडान के अल फ़शर शहर में फँसे आम लोगों पर भयावह अत्याचार किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं और जो लोग वहाँ से किसी तरह से जान बचाकर भाग पाए, उन्हें भी शहर से बाहर निकलने के मार्गों पर अकल्पनीय क्रूरता का सामना करना पड़ा है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क (OHCHR) ने, हिंसा प्रभावित इलाक़ों में मानवाधिकार उल्लंघन मामलों को रोकने के लिए जल्द से जल्द निर्णायक क़दम उठाने का आग्रह किया है, और इसके अभाव में वहाँ और अधिक संहार होने की आशंका व्यक्त की है.

सूडान में परस्पर विरोधी सैन्य बलों, सूडान की सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल  (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में भड़के हिंसक युद्ध की वजह से, देश की एक बड़ी आबादी एक गहरे मानवीय संकट से जूझ रही है.

अल फ़शर इस लड़ाई का एक प्रमुख केन्द्र है जिस पर नियंत्रण हासिल करने के लिए RSF लड़ाकों ने पिछले क़रीब डेढ़ साल से इसकी घेराबन्दी की हुई थी, और अब शहर पर नियंत्रण होने के बाद वहाँ से ऐसी ख़बरें और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें युद्ध अपराधों को अंजाम दिए जाने के आरोप लगे हैं.

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने शुक्रवार को चिन्ता जताई कि सूडान में भय से त्रस्त आम नागरिक अल फ़शर शहर में फँसे हुए हैं और उन्हें बाहर जाने से रोका जा रहा है.

उन्होंने कहा, “मुझे डर है कि शहर के भीतर अब भी बिना सुनवाई के लोगों को जान से मार दिए जाने, बलात्कार, जातीयता से प्रेरित हिंसा जैसे घृणित अत्याचारों को अंजाम दिया जा रहा है.”

“और जो लोग वहाँ से किसी तरह जान बचाकर भाग पाए हैं, उनके लिए हिंसा रुकी नहीं है, बल्कि शहर से बाहर निकलने के मार्गों पर अकल्पीनय क्रूरता के दृश्य हैं.”

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कोर्दोफ़ान क्षेत्र में भी घटनाक्रम के प्रति गम्भीर चेतावनी जारी की है, जहाँ अल फ़शर पर RSF का क़ब्ज़ा होने के बाद आम नागरिकों के हताहत होने, विध्वंस व सामूहिक विस्थापन के मामलों में उछाल आया है.

‘निर्णायक क़दम उठाने होंगे’

वोल्कर टर्क ने कहा कि हिंसा में कमी आने के कोई संकेत नहीं है, बल्कि ज़मीनी हालात के अनुसार लड़ाई में तेज़ी लाने की तैयारी की जा रही है और ये नज़र आ रहा है कि आम लोगों को लम्बे समय के लिए पीड़ा भुगतनी पड़ेगी.

मानवाधिकार मामलों के प्रमुख ने कहा कि अल फ़शर में भयावह हिंसा के बाद, जिन देशों का युद्धरत पक्षों पर प्रभाव है, उन्हें जल्द से जल्द निर्णायक क़दम उठाने होंगे अन्यथा वहाँ और अधिक संहार व अत्याचारों को अंजाम दिए जाने की आशंका है. 

उन्होंने सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए हथियार प्रतिबन्धों का उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मानवाधिकार उल्लंघन के गम्भीर मामलों को अंजाम दे रहे पक्षों को सैन्य समर्थन रोका जाना होगा.

OHCHR उच्चायुक्त ने दारफ़ूर और कोर्दोफ़ान में हिंसा पर तत्काल विराम लगाए जाने की पुकार लगाते हुए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल क़दम उठाने का आग्रह किया.

सूडान में दो वर्षों के युद्ध ने, पहले से ही भुखमरी और कुपोषण से त्रस्त आबादी की कठिनाइयाँ और बढ़ा दी हैं.
© UNFPA सूडान में दो वर्षों के युद्ध ने, पहले से ही भुखमरी और कुपोषण से त्रस्त आबादी की कठिनाइयाँ और बढ़ा दी हैं.

जनसंहार आरोपों पर चिन्ता

इस बीच, जनसंहार की रोकथाम के लिए यूएन के विशेष सलाहकार चलोका बेयानी ने अल फ़शर में बड़े पैमाने पर युद्ध अपराधों को अंजाम दिए जाने के आरोपों पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है. 

उन्होंने इस विषय में अफ़्रीकी संघ के शीर्ष अधिकारियों के साथ मिलकर एक समन्वित प्रतिक्रिया पर विचार करने की बात कही है.

विशेष सलाहकार ने यूएन न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में बताया कि अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून का घोर उल्लंघन हुआ है, आम नागरिकों पर सीधे हमले किए गए हैं, और अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का पालन नहीं किया गया, जोकि टकराव के दौरान आचरण के नियम तय करता है.

चलोका बेयानी ने सूडान में यूएन की रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर डेनिज़ ब्राउन से बात की है और वह जल्द ही महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, सुरक्षा परिषद और व्यापक यूएन प्रणाली के लिए परामर्श जारी करेंगे.

“हमारे कार्यालय द्वारा जब एक बार चेतावनी घंटी बजा दी जाती है, तो वो मानवाधिकारों या अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के सामान्य उल्लंघन मामलों से कहीं परे तक जाती है. यह एक संकेत देती है कि दहलीज को जल्द ही पार किया जा सकता है और इसलिए समय रहते ही क़दम उठाए जाने होंगे.”

जनसंहार रोकथाम कार्यालय ने बताया कि सूडान में अत्याचार अपराधों को अंजाम दिए जाने के जोखिम मौजूद हैं, लेकिन एक अन्तरराष्ट्रीय अदालत या फिर किसी अन्य क़ानूनी निकाय द्वारा ही जनसंहार की पुष्टि की जा सकती है.

इससे पहले, यूएन-समर्थित अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने सोमवार को जारी अपने एक वक्तव्य में अल फ़शर में सामूहिक हत्याओं, बलात्कारों, और अन्य अपराधों को अंजाम दिए जाने की ख़बरों पर गहरी चिन्ता जताई थी. 

आईसीसी के अनुसार, अप्रैल 2023 में युद्ध भड़कने के बाद से ऐसे अपराधों के आरोपों पर उसकी जाँच जारी है.

सूडान के नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त में स्थित तवीला में विस्थापित परिवार.
ERR-Taweela सूडान के नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त में स्थित तवीला में विस्थापित परिवार.

पीड़ा में आम नागरिक

संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता एजेंसियों ने उत्तर दारफ़ूर प्रान्त में मानवीय स्थिति के और बिगड़ने की चेतावनी दी है, जहाँ अल फ़शर से विस्थापित हज़ारों लोग बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुज़ार रहे हैं.

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार, 26 अक्टूबर के बाद से अब तक 82 हज़ार लोगों को, अपनी जान बचाने के लिए अल फ़शर व नज़दीकी इलाक़ों से भागना पड़ा है. अनेक लोगों ने तवीला नामक शहर का रुख़ किया है, जहाँ पहले से ही लड़ाई के कारण विस्थापित हुए लाखों लोगों ने शरण ली हुई है.

यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य मामलों के लिए यूएन एजेंसी (UNFPA) ने आगाह किया है कि महिलाओं व लड़कियों को बलात्कार, अपहरण समेत अन्य प्रकार की हिंसा से जूझना पड़ रहा है.

यूएन उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने गुरूवार को बताया कि तवीला और उसके आस-पास के इलाक़ों में विस्थापित लोगों के के लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन, स्वच्छ जल, आश्रय और चिकित्सा देखभाल उपलब्ध नहीं है.

मानवीय सहायता संगठन अपने स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर नए राहत शिविर स्थापित कर रहे हैं. 

तवीला में साढ़े 6 लाख लोगों ने पहले से ही शरण ली हुई थी. विकलांगजन, अपने माता-पिता से बिछुड़ गए बच्चों, घायलों समेत हज़ारों लोगों के लिए प्लास्टिक शीट, कम्बल की आवश्यकता है. फ़िलहाल लोग खुले स्थानों में ही रहने के लिए मजबूर हैं.