सामाजिक विकास संकल्पों को कार्रवाई में बदलने के आहवान के साथ, दोहा सम्मेलन का समापन
सामाजिक विकास को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धताओं को ज़मीनी स्तर पर लागू किए जाने के आहवान के साथ क़तर की राजधानी दोहा में आयोजित द्वितीय विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन का समापन हो गया है. गुरूवार को सम्मेलन के अन्तिम दिन देशों से आग्रह किया गया कि निर्धनता उन्मूलन, उपयुक्त एवं शिष्ट रोज़गार और सामाजिक समावेशन पर ठोस प्रगति हासिल की जानी होगी.
यूएन महासभा की अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन इस मायने में अलग रहा कि यहाँ कमियों को पहचानने से आगे बढ़कर, सिद्धहस्त समाधानों को अपनाने पर ध्यान केन्द्रित किया गया.
“कोपेनहेगन [सम्मेलन] ने हमें 30 वर्ष पहले सिखाया था कि सामाजिक विकास और समावेशन, मज़बूत समाजों के लिए बहुत आवश्यक हैं.”
“हमने किसी को भी पीछे न छूटने देने का वादा किया है. सामाजिक विकास कोई अच्छा महसूस कराने वाली या परोपकारिता का कृत्य नहीं है. यह हर एक देश के स्व-हित में है.”
उन्होंने आगाह किया कि निर्धनता और भूख, किसी क़िल्लत की वजह से नहीं हैं, बल्कि हिंसक टकराव, असमानता और राजनैतिक विफलताओं के कारण हैं. “हमारे सामने सबसे बड़ी समस्याओं में धनराशि नहीं है. बल्कि यह है कि इसका निवेश किस तरह किया जाता है.”
दोहा में शिखर सम्मेलन के दौरान 40 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों व सरकार प्रमुखों, 230 से अधिक मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों समेत 14 हज़ार से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.
औपचारिक बैठकों और गोलमेज़ चर्चाओं के दौरान, 250 से अधिक ‘समाधान सत्र’ आयोजित किए गए जहाँ सामाजिक सुरक्षा उपायों का विस्तार करने के लिए व्यवहारिक तौर-तरीक़ों को साझा किया गया. इसके अलावा, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा व ऐसे कार्यों को समर्थन देने पर विमर्श हुआ, जिससे गरिमा सुनिश्चित की जा सके.
नतीजों की अपेक्षा
उप महासचिव आमिना मोहम्मद ने कहा कि इस सम्मेलन में जिन निष्कर्षों पर सहमति बनी हैं, वे नागरिक समाज, ट्रेड यूनियन, सामुदायिक नेताओं, व्यवसायों और युवा प्रतिनिधियों की अपेक्षाओं को परिलक्षित करते हैं.
“लोग हमसे जवाब दिए जाने की अपेक्षा रखते हैं, केवल घोषणापत्र नहीं. दोहा राजनैतिक घोषणा, अलमारी में रखे जाने वाला कोई एक दस्तावेज़ नहीं है.”
“यह सतत विकास के केन्द्र में आमजन को रखे जाने के लिए लिया गया एक संकल्प है.” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इन प्रतिबद्धताओं को निर्धनता उन्मूलन में, वास्तविक रोज़गार सृजित करने और किसी को भी पीछे न छूटने देने के प्रयासों में तेज़ी लाने पर केन्द्रित करना होगा.
व्यवहारिक उपायों पर बल
संयुक्त राष्ट्र के क्षेत्रीय आर्थिक आयोगों ने कहा कि अब इन संकल्पों को व्यवहारिक क़दमों में बदलने के लिए देशों को सहायता प्रदान की जाएगी.
योरोप के लिए आर्थिक आयोग ने वृद्ध आबादी के लिए नीतियों, पहुँच के भीतर आवास, ऊर्जा स्रोतों में न्यायसंगत बदलाव, और निर्धनता पर बेहतर डेटा के लिए समर्थन व्यक्त किया. इससे सरकारों के लिए सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों तक राहत पहुँचाने के उपाय तैयार किए जा सकेंगे.
अफ़्रीका के लिए आर्थिक आयोग ने महाद्वीप को युवा सम्भावनाओं से परिपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षा, कौशल, रोज़गार अवसरों व उद्यमिता में निवेश की आवश्यकता है. इसके लिए, अफ़्रीकी संघ और क्षेत्रीय संस्थाओं के साथ साझेदारी अहम होगी.