अफ़ग़ानिस्तान: अफ़ीम पोस्त की खेती में गिरावट, मगर सिंथेटिक ड्रग्स की नई चुनौती
संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम पोस्त की खेती में पिछले वर्ष की तुलना में इस साल 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. वर्ष 2022 में, सत्तारूढ़ तालेबान प्रशासन द्वारा लगाए गए राष्ट्रव्यापी प्रतिबन्ध के बाद से अफ़ीम पोस्त की खेती में बड़ी कमी का रुझान जारी है, हालांकि सिंथेटिक मादक मदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल और तस्करी मार्ग में आए बदलावों की वजह से नई चुनौतियाँ भी उभरी हैं.
मादक पदार्थों एवं अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC) ने गुरूवार को अपनी एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसके अनुसार 2025 में, अफ़ग़ानिस्तान में 10,200 हेक्टेयर कृषि भूमि पर अफ़ीम पोस्त की खेती हुई.
2024 में यह आँकड़ा 12,800 हेक्टेयर था, जबकि प्रतिबन्ध थोपे जाने से पहले 232,000 हेक्टेयर भूमि पर खेती की जा रही थी.
2025 में अफ़ीम के उत्पादन में और भी तेज़ गिरावट आई है और पिछले वर्ष की तुलना में 32 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. यह उत्पादन घटकर अब 296 टन पर पहुँच गया है. अफ़ीम की बिक्री से किसानों को होने वाली आय भी इस अवधि में गिरकर लगभग आधी रह गई है.
यूएन कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट में ज़ोर देकर कहा है कि अफ़ीम पोस्त की खेती के उन्मूलन प्रयासों के साथ-साथ, उस पर निर्भर किसानों की आजीविका के लिए भी उपाय किए जाने होंगे. साथ ही, अफ़ीम की मांग में कमी लाने की कोशिशें करनी होंगी.
अनेक किसानों ने अन्न व अन्य फ़सलों का रुख़ किया है, लेकिन गम्भीर सूखे और बारिश कम होने की वजह से 40 प्रतिशत से अधिक कृषि योग्य भूमि बंजर हो गई है.
इसके अलावा, ईरान और पाकिस्तान से लगभग 40 लाख अफ़ग़ान नागरिक अपने देश लौटने के लिए मजबूर हुए हैं, जिससे रोज़गारों और संसाधनों पर दबाव बढ़ा है. इससे यह चिन्ता भी उपजी है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसान, अफ़ीम पोस्त की अवैध खेती का सहारा ले सकते हैं.
सिंथेटिक ड्रग का बढ़ता बाज़ार
इस बीच, कृत्रिम (सिंथेटिक) मादक पदार्थों, विशेष रूप से मेथमफ़ेटामीन के उत्पादन में वृद्धि हुई है. अफ़ग़ानिस्तान और उसके आस-पास के क्षेत्र में ऐसे पदार्थों को ज़ब्त किए जाने के मामलों में भी उछाल आया है.
यूएन कार्यालय ने चेतावनी दी है कि संगठित आपराधिक समूह सिंथेटिक ड्रग्स के इस्तेमाल व तस्करी को बढ़ावा दे सकते हैं, चूँकि उसका उत्पादन करना सरल है, पता लगाना कठिन है और उन पर जलवायु झटकों का असर नहीं होता है.
अफ़ग़ानिस्तान में महासचिव की विशेष उप प्रतिनिधि जॉर्जेट गैगनॉन ने बताया कि यह समस्या अफ़ग़ानिस्तान की सीमाओं से परे तक जाती है.
“आपूर्ति, मांग और तस्करी की प्रक्रिया में अफ़ग़ान और अन्तरराष्ट्रीय तत्व दोनों शामिल हैं. इस चुनौती से निपटने के लिए अहम हितधारकों के बीच पारस्परिक सहयोग की आवश्यकता होगी.”
रिपोर्ट के अनुसार, ड्रग्स की समस्या से निपटने की रणनीति को केवल अफ़ीम तक ही सीमित नहीं रखना होगा, सिंथेटिक मादक पदार्थों को भी निगरानी व्यवस्था के दायरे में लाना होगा और उनकी रोकथाम की जानी होगी.