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सूडान: अल फ़शर में हत्याओं, यौन हिंसा, विस्थापन व हमलों की ख़बरों पर चिन्ता

सूडान के नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त में स्थित तवीला में विस्थापित परिवार.
ERR-Taweela सूडान के नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त में स्थित तवीला में विस्थापित परिवार.

सूडान: अल फ़शर में हत्याओं, यौन हिंसा, विस्थापन व हमलों की ख़बरों पर चिन्ता

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र ने सूडान में हिंसक टकराव की आंच में झुलस रहे आम नागरिकों की स्थिति, सामूहिक विस्थापन और मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघन मामलों पर गहरी चिन्ता जताई है.

सूडान में परस्पर विरोधी सैन्य बलों, सूडान की सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल  (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में भड़के हिंसक टकराव से दो करोड़ से अधिक लोग, एक गहरे संकट से जूझ रही है.

लगभग सवा करोड़ लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हैं. सूडान का संकट दुनिया के सबसे गम्भीर संकटों में से एक माना जाता है.

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अल फ़शर इस लड़ाई का एक प्रमुख केन्द्र है जिस पर नियंत्रण हासिल करने के लिए RSF लड़ाकों ने पिछले क़रीब डेढ़ साल से इसकी घेराबन्दी की हुई थी और अब शहर पर नियंत्रण होने के बाद सामूहिक अत्याचारों की भयावह जानकारी मिल रही है.

यूएन उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों को बताया कि पिछले सप्ताह, अल फ़शर पर अर्द्धसैनिक बल (RSF) का क़ब्ज़ा होने के बाद से लोगों की हत्या किए जाने, यौन हिंसा, उत्पीड़न, फ़िरौती व हमलों की ख़बरें मिल रही हैं.

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार, 26 अक्टूबर के बाद से अब तक 82 हज़ार लोग अपनी जान बचाने के लिए अल फ़शर व नज़दीकी इलाक़ों से भाग गए हैं. अनेक ने तवीला नामक शहर का रुख़ किया है, जहाँ पहले से ही लड़ाई के कारण विस्थापित हुए लाखों लोगों ने शरण ली हुई है.

यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य मामलों के लिए यूएन एजेंसी (UNFPA) ने आगाह किया है कि महिलाओं व लड़कियों को बलात्कार, अपहरण समेत अन्य प्रकार की हिंसा से जूझना पड़ रहा है.

स्थानीय स्रोत से मिली जानकारी के अनुसार, अल फ़शर से भागते समय सैकड़ों लोग गोलीबारी की चपेट में आ गए थे, और तवीला पहुँचे 1,300 लोगों में बन्दूक की गोलियों से हुए घाव हैं.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने पीड़ितों तक मदद पहुँचाने के लिए अपने अभियान को तेज़ किया है और उनके लिए आश्रय, दवाओं, भोजन, स्वच्छ जल समेत अन्य सेवाओं की व्यवस्था की जा रही है.

यूएन प्रवक्ता ने हिंसक टकराव को तुरन्त रोकने और अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत तयशुदा दायित्वों को निभाने की अपील फिर दोहराई है. आम नागरिकों और मानवीय सहायताकर्मियों की सुरक्षा की गारंटी पर बल दिया गया है.

इस बीच, यूएन शरणार्थी संगठन (UNHCR) ने कहा है कि चाड में अब 14 लाख सूडानी शरणार्थी हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या दारफ़ूर से है.

यूएन एजेंसी ने चेतावनी दी है कि हिंसा की वजह से और अधिक संख्या में सीमा पार करके चाड में शरण ले सकते हैं, जिससे स्थानीय समुदायों पर और अधिक दबाव बढ़ेगा.