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सामाजिक विकास के लिए, आमजन को नीतिगत उपायों के केन्द्र में रखने पर बल

दोहा में सामाजिक विकास के लिए दूसरे विश्व शिखर सम्मेलन में निर्धनता उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा में भारत के अनुभवों पर चर्चा.
UNESCAP
दोहा में सामाजिक विकास के लिए दूसरे विश्व शिखर सम्मेलन में निर्धनता उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा में भारत के अनुभवों पर चर्चा.

सामाजिक विकास के लिए, आमजन को नीतिगत उपायों के केन्द्र में रखने पर बल

विभु मिश्र, दोहा
एसडीजी

क़तर की राजधानी दोहा में 'द्वितीय विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन' के दौरान बुधवार को निर्धनता उन्मूलन के विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में सशक्तिकरण का लाभ पंक्ति में खड़े अन्तिम व्यक्ति तक पहुँचाने में भारत के अनुभवों को साझा किया गया.

क़तर के नेशनल कन्वेंशन सेंटर में हो रहे इस सम्मेलन में विश्व भर से सरकारों के प्रतिनिधि, यूएन एजेंसियाँ, साझेदार संगठन हिस्सा ले रहे हैं, जिसका उद्देश्य निर्धनता को जड़ से उखाड़ने और सामाजिक समावेशन को प्रोत्साहन देने के लिए समाधानों को रेखांकित करना है.

भारत के नीति आयोग, श्रम व रोज़गार मंत्रालय और दोहा स्थित दूतावास की सह-मेज़बानी में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

एशिया व प्रशान्त क्षेत्र के लिए यूएन आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ESCAP) की कार्यकारी उपसचिव लिन यैंग इस चर्चा के दौरान उपस्थित रहीं.

उन्होंने यूएन न्यूज़ के साथ बातचीत में कहा कि ढाँचागत अवरोधों की वजह से अवसरों तक पहुँच अक्सर सीमित हो जाती है, विशेष रूप से निर्बल तबकों के लिए. इसके मद्देनज़र, यह ज़रूरी है कि उन्हें ऐसी चुनौतियों से उबरने के लिए सामर्थ्य प्रदान की जाए.

कार्यकारी उपसचिव के अनुसार, अन्तिम मील की दूरी तक सशक्तिकरण पहुँचाने के लिए यह अहम है कि व्यक्तियों व घर-परिवारों की विशिष्ट परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाए. जैसेकि उनकी आयु, लिंग, विकलांगता स्थिति, स्थान, जातीय या भाषाई अल्पसंख्यक दर्जा.

“स्थानीय स्तर पर नीतिगत कार्रवाई तब तक कारगर रहेगी, जब तक उसे आकार देते समय ऐसे बिन्दुओं पर पहले से विचार किया गया हो.”

भारत में श्रम व रोज़गार मामलों के मंत्री मनसुख मांडविया ने सामाजिक प्रगति के लिए प्रयासों में किसी को भी पीछे न छूटने देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की.

उन्होंने कहा कि डिजिटल टैक्नॉलॉजी को संवारने और रूपान्तरकारी बदलावों को अपनाने के साथ, हम कल्याण व सशक्तिकरण के बीच सम्बन्ध को गहरा करने के लिए संकल्पित हैं. आरम्भिक बचपन से वृद्धावस्था में सामाजिक संरक्षा व्यवस्था का निर्माण करने में, जहाँ हर व्यक्ति सुरक्षित हो और कोई भी पीछे न छूट पाए.

एशिया व प्रशान्त क्षेत्र के लिए यूएन आर्थिक व सामाजिक सहयोग की स्थापना 1947 में की गई थी, जिसमें 62 सदस्य व सहयोगी देश शामिल हैं. 

भारत की राजधानी नई दिल्ली में इस आयोग का एक क्षेत्रीय कार्यालय है, जहाँ से दक्षिण एशियाई क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक व तकनीकी सहयोग में समन्वय किया जाता है.