अफ़ग़ानिस्तान: ठप इंटरनैट, दूरसंचार सेवाओं ने बढ़ाई आम नागरिकों की बेबसी
अफ़ग़ानिस्तान में कुछ ही सप्ताह पहले, दूरसंचार व इंटरनैट सेवाएँ बिना किसी पूर्व सूचना के ठप कर दी गई थीं, जिससे व्यापक स्तर पर आम जनजीवन प्रभावित हुआ था. अस्पतालों में आवश्यक सेवाओं के उपलब्ध नहीं होने से ऐसी मौतें हुई जिन्हें रोका जा सकता था. अपनी शिक्षा पर सख़्त पाबन्दियों की वजह से, शिक्षा के लिए इंटरनैट पर निर्भर लड़कियाँ मायूस हो गईं. बहुत सी महिलाएँ अपने घर लौटने के लिए अपने पुरुष संरक्षक के साथ सम्पर्क कर पाने में असमर्थ थीं. वहीं, ज़रूरतमन्द आबादी तक सहायता पहुँचाने के लिए प्रयास भी बुरी तरह प्रभावित हुए.
यूएन मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) और अफ़ग़ानिस्तान में यूएन सहायता मिशन (UNAMA) ने मंगलवार को अपना एक अध्ययन साझा किया है, जिसमें दूरसंचार सेवाओं के ठप होने से हुए व्यापक असर की पड़ताल की गई है.
यह विश्लेषण 100 से अधिक लोगों के साथ बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है.
अफ़ग़ानिस्तान में सत्तारूढ़ तालेबान प्रशासन ने, 29 सितम्बर को बिना किसी पूर्व सूचना के, राजधानी काबुल समेत देश के अन्य हिस्सों में इंटरनैट व मोबाइल सेवा काट दी थीं. इन सेवाओं को फिर लगभग 48 घंटे बाद बहाल कर दिया गया, जिसका यूएन ने स्वागत किया था.
अफ़ग़ानिस्तान में आम लोग, स्वास्थ्य सेवाओं, बैंकिंग सैक्टर , दैनिक जीवन के कामकाज, व्यवसाय, और अति-आवश्यक सेवाओं के लिए इन सेवाओं पर निर्भर हैं.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय और यूएन मिशन ने अपने अध्ययन के निष्कर्षों को साझा करते हुए बताया कि इस व्यवधान से बड़े स्तर पर स्थानीय नागरिकों के अधिकार प्रभावित हुए.
स्वास्थ्य देखभाल व आपात सेवाओं में देरी हुई या फिर उन तक पहुँच पाना सम्भव नहीं था, मानवीय सहायता अभियानों में व्यवधान दर्ज किया गया, महिलाओं व लड़कियों पर थोपी गई भेदभावपूर्व पाबन्दियाँ और अधिक गहरी हो गईं.
आम नागरिकों के दैनिक और पारिवारिक जीवन पर असर हुआ और लोग एक दूसरे से सम्पर्क कर पाने में असमर्थ थे, वहीं व्यवसाय और बैंकिंग क्षेत्र में कामकाज में भी कठिनाई दर्ज की गई.
असहाय स्वास्थ्यकर्मी
अफ़ग़ान स्वास्थ्यकर्मियों ने दूरसंचार सेवाओं के ठप होने की वजह से ऐसी मौतें होने की जानकारी दी जिन्हें आसानी से रोका जा सकता था.
गम्भीर रक्तस्राव का शिकार एक गर्भवती महिला अपने उपचार के लिए, लघमान प्रान्त में स्थित एक अस्पताल में पहुँची, और उन्हें जल्द ही प्रान्तीय अस्पताल भेजा जाना ज़रूरी था. मगर, अस्पताल की ऐम्बुलेंस ख़राब हो गई और मदद के लिए किसी अन्य को बुला पाना सम्भव नहीं था.
इन परिस्थितियों में बच्चे की तो मौत हो गई और माँ अनेक जटिलताओं के बाद किसी तरह जीवित बच गई.
एक नर्स ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि एक स्वास्थ्यकर्मी के तौर पर, मुझे जीवन बचाने का प्रशिक्षण मिला है, लेकिन संचार सेवाओं के बिना, मैं असहाय महसूस कर रही थी.
असहनीय अनुभव
अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं व लड़कियों को पहले से ही घोर सख़्ती, पाबन्दियों से जूझना पड़ रहा है, जिससे उनका जीवन चुनौतीपूर्ण हुआ है. उन्होंने इंटरव्यू के दौरान बताया कि दूरसंचार सेवाओं में आए इस व्यवधान से उनकी जीवन और कठिन हो गया.
उदाहरण के लिए, अफ़ग़ानिस्तान में 78 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर ख़रीदारी करने, कामकाज के लिए या फिर स्वास्थ्य केन्द्र जाने, वाहन में यात्रा करते समय महिलाओं के साथ उनके पुरुष संरक्षक का होना आवश्यक है. मगर, कुछ महिलाएँ अपने संगी (महरम) से सम्पर्क कर पाने में असमर्थ थीं.
एक महिला की जब अपने पिता से बात नहीं हो पाई तो उन्होंने मजबूरी में घर अकेले जाने का निर्णय़ लिया. उन्होंने बताया कि वह “अपने घर के रास्ते में बहुत डरी हुई थी, लेकिन भाग्यवश, मैं लगभग एक घंटे में सुरक्षित घर पहुँच गई.”
तालेबान ने छठी कक्षा के बाद महिलाओं व लड़कियों की शिक्षा पर पाबन्दी लगा दी है और इस वजह से अनेक अफ़ग़ान महिलाएँ व लड़कियाँ अपनी शिक्षा के लिए इंटरनैट, ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भर हैं.
एक छात्रा ने बताया कि वे हमारे लिए बहुत कठिन दिन-रात साबित हुए. “हम बहुत डरे हुए थे कि मानव इतिहास के पाषाण युग में धकेले जा सकते हैं. यह मेरे जीवन का एक असहनीय समय था.”
सहायता अभियान पर जोखिम
मानवीय सहायताकर्मियों ने बताया कि इन सेवाओं के ठप हो जाने से उनका काम गम्भीर रूप से प्रभावित हुआ और स्थानीय आबादी तक राहत पहुँचाने में देरी हुई.
31 अगस्त को आए शक्तिशाली भूकम्प से नांगरहार, लघमान और कुनार प्रान्त प्रभावित हुए थे, जहाँ पीड़ित समुदायों तक सहायता पहुँचाने के लिए कोशिशें की जा रही हैं.
वहीं, पाकिस्तान से मजबूरी में देश वापसी करने वाले अफ़ग़ान नागरिकों को भी मदद की आवश्यकता है, मगर इंटरनैट के ठप होने से ये प्रयास प्रभावित हुए.
यूएन मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, संचार सेवाओं पर पाबन्दियाँ थोपने या इन्हें ठप कर देने से अभिव्यक्ति की आज़ादी, सूचना की सुलभता के अधिकारों का उल्लंघन होता है और यह अफ़ग़ानिस्तान के लिए तयशुदा मानवाधिकार दायित्वों के विपरीत है.
इसके मद्देनज़र, उन्होंने सत्तारूढ़ प्रशासन से मानवाधिकार दायित्वों के निर्वहन की अपील की है.