सूडान के अल फ़शर में बड़े पैमाने पर अत्याचारों का उच्च ख़तरा
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने कहा है कि अल फ़शर में त्वरित समर्थन बल (RSF) के लड़ाकों द्वारा कथित रूप से गम्भीर अत्याचार किए जा रहे हैं, जिनमें आनन-फ़ानन में फाँसी दिए जाने के मामले भी शामिल हैं.
यूएन मानवाधिकार एजेंसी को, सूडानी सैन्य सरकार के आख़िरी गढ़ अल फ़शर से जान बचाने की कोशिश में निकल रहे लोगों को आनन-फ़ानन में फाँसी दिए जाने की ख़बरें मिली हैं.
इन हत्याओं के पीछे जातीय घृणा के संकेत मिले हैं. साथ ही हथियार डाल देने वाले पूर्व लड़ाकों की हत्याएँ किए जाने की भी ख़बर मिली है, जबकि ये मानवीय क़ानून के तहत निषिद्ध है.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने चेतावनी दी है, "अल फ़शर में बड़े पैमाने पर, जातीय रूप से प्रेरित मानवाधिकार उल्लंघनों और अत्याचारों का ख़तरा दिन-ब-दिन बढ़ रहा है."
उन्होंने कहा, "अल फ़शर में नागरिकों की सुरक्षा और अपेक्षाकृत सुरक्षित रूप में पहुँचने की कोशिश कर रहे लोगों को सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और ठोस कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है."
भूख से त्रस्त लोग
ये चिन्ताजनक ख़बरें ऐसे समय में आई हैं जब सूडान में 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से, मानवीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है.
लगभग सवा करोड़ लोग विस्थापित या देश विहीन हैं और लगभग ढाई करोड़ लोगों को जीवित रहने के लिए भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है. सूडान का संकट दुनिया के सबसे गम्भीर संकटों में से एक माना जाता है.
OHCHR ने बताया है कि सुरक्षित निकलने की कोशिश करने वाले सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल है. पिछले सप्ताह भारी गोलाबारी के कारण, स्थानीय मानवीय स्वयंसेवकों सहित कई नागरिकों की मौत होने की भी ख़बरें हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दक्षिण पूर्व एशिया में पत्रकारों से कहा है कि सूडान में यह घटनाक्रम, युद्ध में "भयानक वृद्धि" का संकेत देता है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय, युद्ध में हस्तक्षेप कर रहे और युद्धरत पक्षों को "हथियार मुहैया" करा रहे देशों को आड़े हाथों लें, और उनसे युद्धविराम पर सहमत होने का आग्रह करें.
यूएन प्रमुख ने कहा कि समस्या केवल सेना और आरएसएफ़ के बीच युद्ध ही नहीं है, बल्कि बढ़ता "बाहरी हस्तक्षेप" भी है जो युद्धविराम व राजनैतिक समाधान की सम्भावनाओं को कमज़ोर कर रहा है.
सूडान के लिए यूएन मानवीय समन्वयक डेनीस ब्राउन ने सोमवार को प्रेस वार्ता में कहा, "अल फ़शर से जान बचाने के लिए निकल रहे नागरिकों को अक्सर सड़क के किनारे फ़िरौती के लिए पकड़ लिया जाता है, सड़क का एक हिस्सा लड़ाकों के नियंत्रण में है."
डेनीस ब्राउन ने कहा कि अप्रैल 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 130 सहायता कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं, और अल फ़शर में स्वयंसेवकों के मारे जाने की भी खबरें आई हैं.
उन्होंने कहा, "ये लोग सबसे कठिन क्षेत्रों में मानवीय सहायता कार्रवाई की रीढ़ हैं और अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत भी इन्हें संरक्षण प्राप्त है."
मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने दोहराया कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत, आरएसएफ़ कमांडरों का दायित्व है कि वे नागरिकों की रक्षा करें और मानवीय सहायता का सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करें.