आसियान-यूएन शिखर बैठक: आपसी सहयोग, शान्ति व प्रगति का मज़बूत इंजिन
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शान्ति स्थापना, सतत विकास, जलवायु कार्रवाई और साइबर सुरक्षा के मोर्चों पर दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) के साथ सहयोग पर बल दिया है. उन्होंने सोमवार को मलेशिया की राजधानी क्वालालम्पुर में आसियान और संयुक्त राष्ट्र की 15वीं शिखर बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि पारस्परिक सहयोग, शान्ति व प्रगति का सबसे मज़बूत इंजिन है और इसे साबित करते रहना होगा.
इंडोनेशिया, मलेशिया, फ़िलिपींस, सिंगापुर और थाईलैंड ने 1967 में आसियान समूह की स्थापना की थी, जिसके बाद के वर्षों में ब्रुनेई, वियत नाम, लाओ पीडीआर, म्याँमार और कम्बोडिया भी सदस्य बने.
25 अक्टूबर 2025 को, तिमोर-लेस्ते इसमें शामिल होने वाला सबसे नया सदस्य है, और अब कुल 11 देश इस समूह का हिस्सा हैं.
यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि क़रीब छह दशकों से आसियान संगठन ने सहयोग के एक प्रकाश पुंज की भूमिका निभाई है. तिमोर-लेस्ते को भी इस समूह का हिस्सा बनाए जाने से यह भावना और मज़बूत हुई है.
“आज, आसियान, संयुक्त राष्ट्र का एक रणनैतिक साझेदार है.” उन्होंने कहा कि यह सहयोग आसियान-यूएन कार्रवाई योजना 2026-2030 के तहत, साझा सिद्धान्तों और व्यवहारिक सहयोग पर आधारित है.
यूएन प्रमुख ने चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आसियान संगठन के साथ साझेदारी का उल्लेख किया.
पहला, शान्ति व रोकथाम
महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा में आसियान के सदस्य देशों के ठोस योगदान पर आभार प्रकट करते हुए कहा कि वे विश्व भर में निडरता के साथ अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं.
उन्होंने कम्बोडिया और थाईलैंड में युद्धविराम को सम्भव बनाने के लिए मलेशिया की भूमिका की सराहना की, जिससे विवाद के शान्तिपूर्ण निपटारे का मार्ग खुला है.
वहीं, दक्षिण चीन सागर में घटनाओं की रोकथाम की जानी होगी, जोखिमों को घटाना होगा और यातायात की आवाजाही अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप सुनिश्चित की जानी होगी.
महासचिव ने चिन्ता जताई कि म्याँमार में शान्ति क़ायम नहीं हुई है, हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है, लाखों विस्थापित हैं और मानवीय आवश्यकता विशाल स्तर पर हैं. रोहिंग्या समुदाय भी उत्पीड़न और आश्रय के लिए अन्य इलाक़ों व देशों का रुख़ करने के लिए मजबूर है.
इसके मद्देनज़र, उन्होंने रक्तपात की कठोर निन्दा करते हुए सभी पक्षों से लड़ाई रोकने, आम नागरिकों की रक्षा करने, मानवीय सहायता के लिए बेरोकटोक मार्ग मुहैया कराए जाने और एक समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया पर बल दिया.
यूएन प्रमुख के अनुसार, वैश्विक शान्ति के लिए एक बहुध्रुवीय, आपस में गुंथे हुए विश्व की आवश्यकता है, जहाँ मनमाने ढंग से एकतरफ़ा निर्णय लेने के बजाय सहयोग व साम्यावस्था को बढ़ावा मिले.
उन्होंने कहा कि इस अनिवार्य बहुध्रुवीयता में आसियान संगठन एक मूलभूत स्तम्भ है.
दूसरा, सतत विकास व वित्तीय न्याय
महासचिव ने क्षोभ व्यक्त किया कि असमानता की खाई चौड़ी हो रही है, कर्ज़ की वजह से देशों का दम घुट रहा है और विश्व में वित्तीय सुरक्षा चक्र विफल साबित हो रहा है.
इसके मद्देनज़र, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय तंत्र में सुधार लागू करने के लिए यही समय है, चूँकि इन वैश्विक संस्थाओं को मौज़ूदा दौर की वास्तविकताओं को परिलक्षित करना होगा.
इनमें विकासशील देशों की भागेदारी को बढ़ाना होगा. यूएन प्रमुख के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था में वर्तमान हिस्सेदारी की दृष्टि से इन संस्थाओं में आसियान देशों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है.
तीसरा, जलवायु कार्रवाई
एंतोनियो गुटेरेश ने सचेत किया कि इस सदी के अन्त तक वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने और जलवायु न्याय सुनिश्चित करने के संकल्प को संयुक्त राष्ट्र के आगामी वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप30) में दर्शाना होगा.
यह सम्मेलन ब्राज़ील के बेलेम शहर में नवम्बर महीने में आयोजित हो रहा है, जहाँ अनुकूलन, उत्सर्जन कटौती और जलवायु न्याय के मोर्चे पर महत्वाकाँक्षी कार्रवाई का आहवान किया गया है.
उन्होंने आगाह कि आसियान देश बाढ़, सूखे, बढ़ते समुद्री जलस्तर और धुँए भरे कोहरे जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता के लिए जोखिम है.
महासचिव ने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित ऐसे योगदान पर बल दिया, जिसमें ग्रीनहाउस उत्सर्जन में कहीं अधिक कटौती की जाए और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाया जाए.
चौथा, डिजिटल कायापलट और साइबर सुरक्षा
यूएन प्रमुख ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) से विकास और समावेशन प्रक्रिया में तेज़ी लाई जा सकती है.
उन्होंने ध्यान दिलाया कि पिछले महीने, संयुक्त राष्ट्र ने दो अहम पहल को पेश किया था: एआई पर स्वतंत्र, अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल, और एआई संचालन पर व्यवस्था पर वार्षिक सम्वाद.
इनके ज़रिये, विज्ञान, नीति और इस्तेमाल के तौर-तरीक़ों को आपस में जोड़ने के प्रयास किए गए हैं, और हर देश को आवाज़ देने की भी कोशिश है.
यूएन प्रमुख ने पार-अटलांटिक संगठित अपराधों से भी निपटने की आवश्यकता पर बल दिया, विशेष रूप से साइबर तस्करी और धोखाधड़ी केन्द्रों से, जिसके लिए मादक पदार्थों एवं अपराध नियंत्रण के लिए यूएन कार्यालय (UNODC) निरन्तर प्रयासरत है.