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सूडान: अल फ़शर में 'भयावह स्थिति' से चिन्ता, तत्काल युद्धविराम की अपील

सूडान के तवीला शहर में अन्य इलाक़ों से विस्थापित हुए नागरिकों ने शरण ली है.
© UNICEF/Mohammed Jamal सूडान के तवीला शहर में अन्य इलाक़ों से विस्थापित हुए नागरिकों ने शरण ली है.

सूडान: अल फ़शर में 'भयावह स्थिति' से चिन्ता, तत्काल युद्धविराम की अपील

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवीय अधिकारी टॉम फ़्लैचर ने, सूडान के उत्तरी प्रान्त दारफ़ूर की राजधानी अल फ़शर में भारी संख्या में आम लोगों की मौतअस्पतालों पर हमले और अर्द्धसैनिक बलों (RSF) के सम्भावित क़ब्ज़े की ख़बरों के बीच, तत्काल युद्धविराम की अपील की है.

संयुक्त राष्ट्र के आपात राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने कहा है कि भीषण लड़ाई की चपेट में आए शहर में, लोगों के हताहत होने व जबरन विस्थापन की ख़बरें आ रही हैं, जिनसे वे “बेहद चिन्तित” हैं.

टॉम फ़्लैचर ने रविवार को जारी वक्तव्य में कहा, “लड़ाके शहर में आगे बढ़ रहे हैं, भागने के सभी रास्ते बन्द हैं, और लाखों लोग गोलीबारी व भुखमरी के बीच बिना भोजन, इलाज या सुरक्षा के फँसे हुए हैं.”

उन्होंने “अल फ़शर, दारफ़ूर और पूरे सूडान में तत्काल युद्धविराम की अपील की.” साथ ही नागरिकों के लिए सुरक्षित मार्ग और मानवीय कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया.

उन्होंने कहा, “सभी ज़रूरतमन्द लोगों तक पहुँचने के लिए सुरक्षित, तेज़ और निर्बाध मानवीय मार्ग उपलब्ध कराया जाना चाहिए. हमारे पास जीवनरक्षक सहायता सामग्री तैयार है, लेकिन हमले, हमें सहायता सामग्री की आपूर्ति करने से रोक रहे हैं. स्थानीय मानवीय कार्यकर्ता जोखिम के बीच भी लोगों की जान बचाने का काम जारी रखे हुए हैं.”

घेराबन्दी में शहर

दारफ़ूर का अल फ़शर, ऐसा अन्तिम बड़ा शहर है जो सरकार के नियंत्रण में बचा है, मगर एक वर्ष से अधिक समय से घेराबन्दी में है.

ख़बरों के अनुसार, अर्द्धसैनिक बल (RSF) ने, अपने पूर्व सहयोगी सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) के ख़िलाफ़ क्रूर युद्ध के दौरान, सेना की छठी डिविज़न के मुख्यालय पर क़ब्ज़ा करने के बाद, शहर पर नियंत्रण का दावा किया है.

हालाँकि सूडानी सेना ने अब तक इस पर टिप्पणी नहीं की है. लेकिन सरकारी बलों के हाथों से अल फ़शर का नियंत्रण निकल जाना, एक बड़ा झटका होगा और अप्रैल 2023 से जारी गृहयुद्ध में सम्भावित निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस युद्ध ने दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकटों में से एक को जन्म दिया है. इससे 1.17 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से 42 लाख शरणार्थियों ने भागकर पड़ोसी देशों में शरण ली है.

सूडान में जो लोग विस्थापन के बाद अपने घरों को वापिस लौट रहे हैं, उन्हें ध्वस्त घर और चरमराई हुई सेवाएँ मिल रही हैं. बहुत से लोग युद्ध के कारण सीमित स्थानों में सिमट गए हैं.
© IOM

बड़ी संख्या में लोग हताहत

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने हाल के सप्ताहों में, क्षेत्र में व्यापक स्तर पर आम लोगों के हताहत होने और चिकित्सा सुविधाओं पर बार-बार हमलों की जानकारी दी है.

महीने की शुरुआत में एक मस्जिद और शहर की आख़िरी चिकित्सा सुविधा, सऊदी अस्पताल पर हमले हुए, जिनमें कम से कम 20 लोग मारे गए. इससे पहले सितम्बर में लगभग 100 लोगों की मौत हुई थी.

दोषियों की जवाबदेही ज़रूरी

यूएन राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने आम लोगों, अस्पतालों और मानवीय अभियानों को लगातार निशाना बनाए जाने की निन्दा करते हुए, सभी पक्षों से अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का पालन करने की अपील की.

उन्होंने कहा, “अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून और मानवाधिकार क़ानून के उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.”

उन्होंने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2736 (2024) की याद दिलाई, जो अल फ़शर की घेराबन्दी ख़त्म करने, आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सूडान में निर्बाध मानवीय पहुँच की माँग करता है.