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ट्यूनीशिया से चली नौका दुर्घटनाग्रस्त होने से, बच्चों समेत 40 प्रवासियों की मृत्यु

भूमध्य सागर में एक लकड़ी की नाव पर एसओएस मेडिटेरेनी के बचावकर्मी और प्रवासी लाइफ जैकेट पहने हुए हैं।
© SOS Méditerranée/Flavio Gasperini भूमध्य सागर क्षेत्र में, प्रवास के लिए निकले बहुत से लोग, अक्सर दुर्घटनाओं के शिकार हो जाते हैं.

ट्यूनीशिया से चली नौका दुर्घटनाग्रस्त होने से, बच्चों समेत 40 प्रवासियों की मृत्यु

प्रवासी और शरणार्थी

संयुक्त राष्ट्र प्रवासन एजेंसी- IOM ने कहा है कि ट्यूनीशिया के तट पर एक नौका दुर्घटना में कम से कम 40 अफ़्रीकी प्रवासियों की मौत हो गई है जिसने योरोप जाने वाले रास्तों पर, अनियमित समुद्री यात्राओं के घातक जोखिमों को एक बार फिर उजागर कर दिया है.

यह त्रासदी ऐसे समय में हुई है जब उत्तरी अफ़्रीका में शरणार्थियों और शरण चाहने वाले लोगों की बिगड़ती स्थिति के कारण, ज़्यादा से ज़्यादा परिवार ख़तरनाक यात्राओं पर निकल रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, ट्यूनीशिया के सालाक्टा गाँव से रवाना हुई नाव, रवाना होने के कुछ ही देर बाद पलट गई, जिससे नौ महिलाओं, 19 पुरुषों और पाँच साल से कम उम्र के 12 बच्चों की मौत हो गई.

पास में मौजूद एक मछली पकड़ने वाले जहाज़ से मिली सूचना के बाद, 30 लोगों को जीवित बचा लिया गया. जीवित बचे लोगों में कैमरून, कोट डी आइवर और गिनी के पुरुष, महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं.

IOM ने कहा है, "यह त्रासदी, इस साल उत्तरी अफ़्रीकी तट पर दर्ज की गई सबसे घातक समुद्री घटनाओं में से एक है."

"यह दुर्घटना, मध्य भूमध्यसागरीय मार्ग पर और अधिक जान-माल की हानि को रोकने के लिए समन्वित कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है."

मौतों व लापता होने का सिलसिला

IOM की लापता प्रवासियों की परियोजना के अनुसार, इस वर्ष मुख्य मार्ग पर लगभग 1,000 लोगों की मौतें और उनके लापता होने की घटनाएँ दर्ज की जा चुकी हैं.

2014 से, उत्तरी अफ़्रीका से योरोप जाने की कोशिश में 25 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए हैं, जिससे यह दुनिया का सबसे घातक प्रवास मार्ग बन गया है.

इस हाल की दुर्घटना के साथ, व्यापक भूमध्यसागरीय क्षेत्र में लापता लोगों की कुल संख्या 32 हज़ार 800 से अधिक हो गई है.

बच्चे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. IOM ने कहा कि केवल साल 2025 में, ट्यूनीशिया के तट पर कम से कम 30 लोगों की जान गई है, जबकि 2024 में कुल 22 लोगों की जान गई थी.

युद्धों और संकटों से मजबूर

पड़ोसी देश लीबिया में कड़े नियंत्रण और बढ़ती असुरक्षा के बीच, इटली पहुँचने के इच्छुक लोगों के लिए ट्यूनीशिया एक ऐसा प्रस्थान बिन्दु बन गया है जहाँ से प्रवास यात्रा शुरू करने वालों की संख्या बढ़ रही है.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय (UNHCR) के अनुसार, ट्यूनीशिया में 10 हज़ार 600 से ज़्यादा पंजीकृत शरणार्थी और शरण चाहने वाले लोग रहते हैं - जिनमें से 86 प्रतिशत लोग, युद्ध या व्यापक हिंसा से प्रभावित देशों से आए हैं.

बहुत से लोग यातना या लिंग-आधारित हिंसा से बचकर निकले हैं या अपने परिवारों से बिछड़े हुए बच्चे हैं. आवश्यक सेवाओं तक पहुँच लगातार सीमित होती जा रही है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ रहे हैं और कुछ लोग समुद्री यात्रा का प्रयास कर रहे हैं.

सुरक्षित, नियमित मार्गों की ज़रूरत

IOM ने "सुरक्षा का अत्यधिक ख़याल रखने वाले खोज और बचाव अभियानों" के लिए अपने समर्थन को दोहराया है और "सुरक्षित व नियमित प्रवास मार्गों" का विस्तार किए जाने का आहवान भी किया है.

एजेंसी ने कहा है कि प्रमुख प्रवास मार्गों वाले देशों को समन्वय को मजबूत करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मानवीय सिद्धान्त उनकी कार्रवाई का मार्गदर्शन करें.