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मीथेन रिसाव की अधिकतर चेतावनियाँ, जलवायु ख़तरे के बावजूद नज़रअंदाज़ की गईं

एक औद्योगिक चिमनी से साफ नीले आकाश के बीच सफेद धुएं का एक बड़ा गुबार निकल रहा है।
© Unsplash/Anne Nygård हानिकारक मीथेन गैसों का, जलवायु परिवर्तन में बड़ा हिस्सा है.

मीथेन रिसाव की अधिकतर चेतावनियाँ, जलवायु ख़तरे के बावजूद नज़रअंदाज़ की गईं

जलवायु और पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र उपग्रह निगरानी की बदौलत, मीथेन गैस के प्रमुख रिसावों का पता लगाने में काफ़ी सुधार हुआ है, मगर फिर भी कम्पनियाँ और सरकारें, केवल लगभग 12 प्रतिशत चेतावनियों पर ही कार्रवाई कर रही हैं.

मीथेन एक ऐसी गैस जो वैश्विक तापमान वृद्धि के लगभग एक तिहाई हिस्से के लिए ज़िम्मेदार है. 

यह एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है जो 20 साल की अवधि ,में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में, 80 गुना ज़्यादा गर्मी उत्पन्न करने में सक्षम होती है.

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संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की रिपोर्ट कहती है कि कार्बन उत्सर्जन में कटौती से जलवायु को तेज़ी से और ठोस लाभ मिलेंगे. 

मानव-जनित उत्सर्जन में लगभग आधे की कटौती करना, निकट भविष्य में जलवायु परिवर्तन को धीमा करने के सबसे किफ़ायती तरीक़ों में से एक है.

2022 में यूएनईपी ने तेल और गैस क्षेत्रों से अनजाने में होने वाले मीथेन रिसाव का पता लगाने के लिए, एक उपग्रह निगरानी प्रणाली शुरू की थी.

MARS (Methane Alert and Response system) के नाम से जानी जाने वाली यह प्रणाली, कार्बन उत्सर्जन के बारे में मुफ़्त और सटीक जानकारी प्रदान करती है ताकि कम्पनियाँ और राष्ट्रीय प्राधिकरण इन उत्सर्जनों पर कार्रवाई कर सकें.

मीथेन गैस का उत्सर्जन गन्धहीन और अदृश्य होता है.

बढ़ती चेतावनियाँ

UNEP के अन्तरराष्ट्रीय मीथेन वेधशाला प्रकाशन के बुधवार को जारी नवीनतम संस्करण के अनुसार, पिछले वर्ष (2024) कार्रवाई के लिए प्रेरित करने वाली चेतावनियों की संख्या, एक प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गई.

एजेंसी का कहना है कि 2030 तक, मीथेन गैस के एक तिहाई उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए और अधिक कार्रवाई की आवश्यकता है.

यूएनईपी की प्रमुख इन्गेर ऐंडरसन कहती हैं, "मीथेन उत्सर्जन को कम करने से वैश्विक तापमान वृद्धि के चलन को तेज़ी से मोड़ा जा सकता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने के दीर्घकालिक प्रयासों के लिए अधिक समय मिल सकता है."

"लेकिन मीथेन उत्सर्जन की निगरानी व रिपोर्टिंग में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को, उत्सर्जन में कटौती में बदलना होगा."

MARS प्रणाली का अब कोयला खदानों और अपशिष्ट (Waste) स्थलों से मीथेन उत्सर्जन की निगरानी करने के लिए विस्तार किया जा रहा है. 

इन क्षेत्रों में अब तक मापन व निगरानी दुर्लभ रहे हैं - और UNEP, इस्पात उद्योग से उत्सर्जन का पता लगाने में तेज़ी ला रहा है, जो अब भी मुख्यतः कोयले पर निर्भर है.

UNEP ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि इस्पात निर्माण में उपयोग किए जाने वाले कोयले से मीथेन गैस के उत्सर्जन को रोकने के लिए, कम लागत वाले समाधान उपलब्ध हैं, लेकिन इस्पात उद्योग को कार्बन मुक्त करने के प्रयासों में, इन समाधानों को काफ़ी हद तक अनदेखा किया जाता है.