वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

DRC में महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन हिंसा में वृद्धि पर चिन्ता

डीआरसी में महिलाओं व लड़कियों को अनेक स्थानों पर यौन हिंसा का निशाना बनाया जाता है.
© UNICEF
डीआरसी में महिलाओं व लड़कियों को अनेक स्थानों पर यौन हिंसा का निशाना बनाया जाता है.

DRC में महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन हिंसा में वृद्धि पर चिन्ता

महिलाएँ

संयुक्त राष्ट्र की एक वरिष्ठ अधिकारी ने काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) का दौरा करके लौटने के बाद चेतावनी दी कि देश में महिलाएँ और लड़कियाँ एक बहुत गम्भीर संकट में फँसी हुई हैं और उन्हें भारी असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है.

संयुक्त राष्ट्र प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी (UNFPA) में मानवीय मामलों की निदेशक शोको अराकाकी ने मंगलवार को जिनीवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि डीआरसी में आवश्यक सेवाएँ बुरी तरह बाधित हुई हैं, जबकि बलात्कार और युद्ध-सम्बन्धी यौन हिंसा की घटनाओं में पिछले साल की तुलना में एक तिहाई की वृद्धि हुई है.

उन्होंने कहा, "डीआरसी की महिलाएँ और लड़कियाँ भारी कष्ट सहती हैं, लेकिन अपनी उम्मीद कभी नहीं छोड़तीं."

उन्होंने कहा कि हाल के समय में युद्ध में तेज़ी आने से पहले भी, देश में गर्भावस्था और प्रसव सम्बन्धी जटिलताओं के कारण हर घंटे, तीन महिलाओं की मौत हो जाती थी.

शोको अराकाकी ने राजधानी किंशासा और पूर्व में गोमा की अपनी यात्रा के दौरान, महिलाओं और लड़कियों के सामने आने वाली कठोर वास्तविकताओं को प्रत्यक्ष रूप से देखा.

उन्होंने अत्यन्त कठिन परिस्थितियों में बच्चों को जन्म देने वाली दाइयों से मुलाक़ात की और उन माताओं की बातें सुनीं जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया था.

एक उपेक्षित मानवीय संकट

उन्होंने कहा, "महिलाओं और लड़कियों के साथ शिविरों, यात्राओं और अपने ही समुदायों में बलात्कार, शोषण और दुर्व्यवहार भी हो रहा है."

डीआरसी को, अक्सर दुनिया के सबसे उपेक्षित मानवीय संकटों में से एक के रूप में वर्णित किया जाता है, जहाँ लिंग-आधारित हिंसा का ख़तरनाक स्तर देखा जा रहा है.

यह संकट लम्बे समय से चली आ रही भूख स्थिति और विस्थापित तथा मेज़बान समुदायों के लिए आजीविका के अवसरों की कमी से, और भी गम्भीर हो गया है.

पूरे डीआरसी में, आपातकालीन सहायता की माँग तेज़ी से बढ़ रही है, अनुमान है कि वर्ष 2025 में 2.7 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी.

पूर्वी प्रान्तों में चल रहे युद्ध के समाधान के बिना, मानवीय और विस्थापन की स्थिति और भी बिगड़ने की आशंका है.

अब भी हैं सपने जीवित

शोको अराकाकी ने एक 14 वर्षीय लड़की से मुलाक़ात का ज़िक्र किया, जो कई बार बलात्कार की शिकार हुई और UNFPA द्वारा समर्थित एक अस्पताल में सर्जरी के बाद ठीक हो रही थी.

वो लड़की अब भी स्कूली शिक्षा शुरू करने के अपने सपने को संजोए हुए थी.

UNFPA वर्तमान में डीआरसी में महिलाओं और लड़कियों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है, जिसका लक्ष्य 14 लाख लोगों तक मदद पहुँचाना है.

इस यूएन एजेंसी ने लिंग-आधारित हिंसा का सामना कर चुके लोगों के लिए चिकित्सा उपचार और मनोसामाजिक सहायता सहित, गम्भीर रूप से ज़रूरतमन्द लोगों को जीवन रक्षक प्रजनन देखभाल प्रदान करने के लिए तत्काल धन बढ़ाने का आहवान किया है.

एजेंसी ने युद्ध में शामिल सभी पक्षों से, आम लोगों और स्वास्थ्य सुविधाओं सहित तमाम नागरिक बुनियादी ढाँचे की रक्षा करने और जहाँ भी ज़रूरत हो, मानवीय सहायता की सुरक्षित और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के अपने क़ानूनी दायित्वों का पालन करने का भी आग्रह किया है.