सूडान: 10 लाख से अधिक नागरिकों की ख़ारतूम में वापसी, तत्काल समर्थन देने का आग्रह
दो वर्ष से हिंसक टकराव की आंच में झुलस रहे सूडान में 10 लाख से अधिक लोगों ने पिछले 10 महीनों में राजधानी ख़ारतूम में वापसी की है. अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने अपनी एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी साझा करते हुए कहा है कि आम लोगों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए उन्हें समर्थन मुहैया कराया जाना होगा.
यूएन एजेंसी के आँकड़े दर्शाते हैं कि नवम्बर 2024 से सितम्बर 2025 के दौरान लाखों सूडानी नागरिक देश के विभिन्न हिस्सों से अपने घर लौटे हैं.
सूडान की सत्ता पर वर्चस्व के लिए अप्रैल 2023 में परस्पर विरोधी सैन्य बलों, सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच हिंसक टकराव भड़क उठा था, जिससे लाखों लोग पड़ोसी देशों में और देश की सीमाओं के भीतर विस्थापित होने के लिए मजबूर हैं.
सूडान के अनेक हिस्सों में खाद्य असुरक्षा व कुपोषण की स्थिति गम्भीर है और बड़े पैमाने पर लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है.
यूएन एजेंसी में परिचालन के लिए उप निदेशक उगोची डेनियल्स ने सूडान यात्रा से लौटने के बाद बताया कि इतने विशाल स्तर पर लोगों की ख़ारतूम में वापसी, सहनसक्षमता का संकेत होने के साथ-साथ एक चेतावनी भी है.
“मैं उन लोगों से मिला जो एक ऐसे शहर में वापसी कर रहे हैं, जहाँ अब भी हिंसक टकराव के घाव हैं. जहाँ घर क्षतिग्रस्त हैं और बुनियादी सेवाएँ मुश्किल से काम कर रही हैं. पुनर्निर्माण के लिए उनका संकल्प असाधारण है, लेकिन वहाँ जीवन अविश्वसनीय ढंग से नाज़ुक है.”
कठिन हालात
सूडान में हैज़ा, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का प्रकोप है और इसलिए स्वच्छ जल, स्वास्थ्य देखभाल समेत अन्य अति-आवश्यक सेवाओं में निवेश करना बहुत ज़रूरी है, ताकि लोग फिर से अपना जीवन शुरू कर सकें.
राजधानी ख़ारतूम से 37 लाख लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए थे, यानि कुल विस्थापित आबादी का केवल 26 प्रतिशत ही अभी लौट पाया है. 27 लाख लोगों को अभी अपने घरों में वापिस लौटना है, जोकि मानवीय सहायता व सुरक्षा पर निर्भर करता है.
यूएन प्रवासन एजेंसी का कहना है कि पूरे देश में 26 लाख से अधिक लोग इस अवधि में अपने मूल स्थानों पर लौटे हैं. इनमें 20 लाख से अधिक लोग सूडान की सीमाओं के भीतर विस्थापित हुए थे, जबकि सवा पाँच लाख से अधिक लोग मिस्र, दक्षिण सूडान, लीबिया समेत अन्य पड़ोसी देशों से वापिस आए हैं.
सूडानी नागरिकों के अपने घर लौटने के बाद आशा का संचार हुआ है, विशेष रूप से उन इलाक़ों में जहाँ सुरक्षा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है. हालांकि मानवीय सहायता की स्थिति अब भी ख़राब है.
बड़ी संख्या में अपने क्षतिग्रस्त घरों या सामूहिक केन्द्रों में शरण ले रहे हैं, जहाँ उनके पास सीमित स्तर पर स्वच्छ जल, स्वास्थ्य सेवाओं, संरक्षण की सुलभता है.
क़रीब 50 फ़ीसदी से अधिक लोग ग्रामीण इलाक़ों में लौटे हैं, और इनमें से लगभग आधी संख्या बच्चों की है.
समर्थन बढ़ाना होगा
अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से सूडान को फिर से पटरी पर लाने के लिए तुरन्त समर्थन बढ़ाने की अपील की है. IOM ने कहा है कि ज़रूरतमन्दों को जीवनरक्षक सहायता प्रदान करने और डेटा जुटाने के लिए साझेदार संगठनों के साथ मिलकर काम किया जाएगा ताकि सोच-समझ कर रणनीति तैयार की जा सके.
सूडान के अन्य हिस्सों में मानवीय स्थिति ख़राब है, विशेष रूप से नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अल फ़शर में, जहाँ अर्द्धसैनिक बल RSF ने एक साल से अधिक समय से घेराबन्दी की हुई है. अब तक 10 लाख से अधिक लोग अल फ़शर छोड़कर भाग चुके हैं और अनेक लोगों ने तवीला में शरण ली है, जोकि अब एक विशाल, भीड़भाड़ वाला विस्थापित आश्रय केन्द्र बन चुका है.
ताबड़तोड़ बमबारी, यौन हिंसा और जातीय नफ़रत से प्रेरित हिंसा से बचकर भागने में असमर्थ लोग बड़ी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. कुपोषण उछाल पर है और बच्चे विशेष रूप से ग्रस्त हैं. कुछ लोग पशुओं का चारा खाकर अपने दिन व्यीतत कर रहे हैं.
यूएन एजेंसी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील दोहराई है, जिसमें उन्होंने बन्दूकों को शान्त, पीड़ा का अन्त करने का आग्रह किया था. साथ ही, सूडान की जनता के लिए स्थाई समाधानों को ढूंढने पर बल दिया था, ताकि वे शान्ति के बहाल होने पर फिर से अपने जीवन को खड़ा कर सकें.