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31 ट्रिलियन डॉलर का क़र्ज़ है विकासशील देशों की प्रगति में बाधा

इक्वाडोर की महिला किसानों कोटाकाची, इक्वाडोर में सामुदायिक मेले 'पचामामा नोस अलिमेंटा' में अपने जैविक उत्पादों को बेचती और व्यापार करती हैं।
© FAO/Johanna Alarcón निर्धन व विकासशील देशों के लिए वैश्विक व्यापार, बहुत महंगा पड़ रहा है.

31 ट्रिलियन डॉलर का क़र्ज़ है विकासशील देशों की प्रगति में बाधा

आर्थिक विकास

संयुक्त राष्ट्र की एक शीर्ष व्यापार अधिकारी रिबेका ग्रिनस्पैन ने कहा है कि अगर दुनिया को एक विनाशकारी आयात शुल्क (Tariff) युद्ध से बचना है, तो मौजूदा नियम-आधारित अन्तरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली पर नियंत्रण बनाए रखना एक ज़रूरी चुनौती है.

रिबेका ग्रिनस्पैन ने सोमवार को जिनीवा में यूएन व्यापार और विकास (UNCTAD) के 195 सदस्य देशों को सम्बोधित करते हुए कहा है कि 72 प्रतिशत वैश्विक व्यापार "अब भी विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत होता है."

उन्होंने यह बात विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सन्दर्भ में कही, जिसके समझौते व्यापारिक देशों के बीच बातचीत किए जाने के बाद हस्ताक्षर करके वजूद में आते हैं.

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रिबेका ग्रिनस्पैन ने कहा, "यह संयोग से नहीं हुआ, यह आपकी बदौलत हुआ, क्योंकि आपने तब भी बातचीत जारी रखी जब ऐसा करना निरर्थक लग रहा था, नियम-आधारित प्रणाली की हिमायत की, जबकि आप उसमें सुधार करने वाले थे, और टूटे हुए पुलों को भी बहाल किया."

बेतहाशा टैरिफ़

ग़ौरतलब है कि UNCTAD प्रमुख की इस टिप्पणी को ऐसे माहौल में आई है जब अमेरिका के व्यापारिक साझीदारों पर टैरिफ़ (आयात शुल्क) लगाने की घोषणाओं के बीच, महीनों से वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता क़ायम है.

ग्रीनस्पैन हाल के समय में कहती रही हैं कि बढ़ते टैरिफ़, भारी क़र्ज़ में डूबे देशों द्वारा रिकॉर्ड ऋण की अदायगी और बढ़ता अविश्वास, ये सभी विकास को रोक रहे हैं.

उन्होंने कहा, "क़र्ज़ और विकास का संकट अब भी उन देशों के सामने दरपेश है जिनके पास असम्भव विकल्प हैं. उन्हें फ़ैसला करना होगा: या तो अपने क़र्ज़ के भुगतान में पीछे छूटे या अपने विकास में."

UNCTAD प्रमुख ने हाल ही में यूएन महासभा को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा लगाए गए टैरिफ़, इस साल औसतन 2.8 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत से अधिक हो गए हैं.

उन्होंने कहा कि अत्यधिक टैरिफ़ "निवेश के अवसरों को कम करता है, विकास को धीमा करता है और व्यापार को विकास के मार्ग के रूप में और भी कठिन बना देता है."

धनी देशों को चौतरफ़ा लाभ

UNCTAD की शीर्ष अर्थशास्त्री ने चेतावनी दी है कि वैश्विक निवेश प्रवाह लगातार दूसरे वर्ष कम हो रहा है, जिससे "भविष्य की वृद्धि प्रभावित हो रही है".

साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि आज की निवेश प्रणाली, विकासशील देशों के बजाय समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता देती है.

इस स्थिति को तुलनात्मक तरीक़े से देखें तो इन अर्थव्यवस्थाओं में, एकमुश्त लागत के कारण, ज़ाम्बिया में एक अमेरिकी डॉलर, "ज़्यूरिख की तुलना में तीन गुना महंगा" हो जाता है.

रिपेका ग्रिनस्पैन ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि माल ढुलाई की लागत अब "बहुत विस्फोटक रूप में अस्थिर" है, क्योंकि भूमि से घिरे देशों और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के लिए परिवहन बिल बहुत महंगा साबित हो रहा है जोकि, "वैश्विक औसत से तीन गुना तक" का बोझ डाल रहा है.

साओ टोमे और प्रिंसिपे में एक किसान कोको की फली को काटकर उससे बीज निकाल रहा है।
© FAO/Eduardo Soteras

और जहाँ एआई ने वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में "खरबों" की वृद्धि की संभावना पेश की है, वहीं UNCTAD महासचिव ने आगे कहा कि एआई से लाभ हासिल करने की रणनीतियाँ, तीन में से एक से भी कम विकासशील देशों के पास हैं.

यूएन आँकड़ों के अनुसार, 2 अरब 60 करोड़ लोग अब भी ऑफ़लाइन हैं, जिनमें से ज़्यादातर विकासशील देशों की महिलाएँ हैं.

सार्वजनिक ऋण संकट

यूएन महासभा की अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने, रिबेका ग्रीनस्पैन की चिन्ताओं को दोहराते हुए आगाह किया कि विकासशील देशों का ऋण, वर्ष 2024 में, 31 अरब डॉलर तक पहुँच गया.

इसका मतलब यह है कि कई देशों की सरकारें, "अधिक स्कूल बनाकर या स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं का विस्तार करके, अपने लोगों के भविष्य में निवेश करने के बजाय, ऋण चुकाने पर अपना क़ीमती धन ख़र्च कर रही हैं."

ऐनालेना बेयरबॉक आगे कहा कि अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास भी "क्षीण" हो रहा है.

उन्होंने कहा कि भले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था का मूल्य 100 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष से अधिक है, फिर भी हर दो में से एक व्यक्ति की आय में, "एक पीढ़ीगत समय से या तो बहुत कम वृद्धि हुई है या कोई वृद्धि ही नहीं हुई है."