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धन की क़िल्लत से यूएन शान्तिरक्षा अभियानों के लिए उपजी नई चुनौतियाँ

मध्य अफ्रीकी गणराज्य के एक गांव में UN के नीले हेलमेट और छलावरण वर्दी पहने चार नेपाली महिला शांतिरक्षक एक स्थानीय महिला और उसके बच्चे के साथ बातचीत कर रही हैं।
© MINUSCA मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में यूएन शान्तिरक्षक एक महिला व बच्चे से बात कर रहे हैं.

धन की क़िल्लत से यूएन शान्तिरक्षा अभियानों के लिए उपजी नई चुनौतियाँ

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा अभियानों के लिए पर्याप्त धनराशि की कमी की वजह से दुनिया भर में इन मिशन पर असर हो रहा है. इसके मद्देनज़र, यूएन ने ग़श्त अभियान में कटौती, फ़ील्ड कार्यालयों को बन्द करने और हज़ारों शान्तिरक्षकों को उनके देश वापिस भेजे जाने के लिए मजबूर होने के प्रति आगाह किया है.

संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा बक़ाया धनराशि का भुगतान नहीं होने की वजह से शान्तिरक्षा सेवा के लिए हालात चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं.

शान्तिरक्षा मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव ज्याँ पिएर लाक्रोआ ने इस संकट को पहले से कहीं अधिक कठिन क़रार दिया है, जोकि सदस्य देशों द्वारा तयशुदा वित्तीय योगदान को नहीं दिए जाने पर उपजा है.

इसी सप्ताह, उन्होंने नई दिल्ली में यूएन शान्तिरक्षा में योगदानकर्ता देशों की एक बैठक में रक्षा अधिकारियों व राजनयिकों को सम्बोधित करते हुए आगाह किया था कि हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं है.

“हमारे शान्तिरक्षक, आपके शान्तिरक्षक, लोगों की रक्षा करते हैं. वे लाखों आम नागरिकों के लिए जीवन व मृत्यु के बीच अन्तर तय करते हैं.”

विशाल कटौती

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सभी शान्तिरक्षा मिशन में उनके वार्षिक बजट में 15 फ़ीसदी तक की कटौती करने के लिए कहा है, जिससे सीमित समय में वर्दीधारी और असैनिक शान्तिरक्षकों में 25 फ़ीसदी तक की कटौती हो सकती है.

इससे शान्तिरक्षा से जुड़े कामकाज का हर क्षेत्र प्रभावित होगा. यूएन शान्तिरक्षा गश्त, संरक्षण दायित्व, अभियान संचालन, हवाई निगरानी और नागरिकों के लिए समर्थन समेत अन्य कार्य.

माली के मेनाका में UN का झंडा लगे एक बख्तरबंद वाहन के पास नीले हेलमेट पहने एक शांति रक्षक खड़ा है।
© MINUSMA/Harandane Dicko

शान्ति अभियान के लिए यूएन कार्यालय ने चेतावनी दी है कि ज़मीनी स्तर पर शान्तिरक्षकों की संख्या में कमी आने से निगरानी रख पाना कठिन हो जाएगा, आम नागरिकों के लिए सुरक्षित इलाक़ों की संख्या घटेगी और दक्षिण सूडान, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, लेबनान समेत अन्य देशों में मानवीय सहायता के लिए समर्थन में कमी आएगी.

इसके मद्देनज़र, अवर महासचिव लाक्रोआ ने सदस्य देशों से आग्रह किया कि उन्हें सामूहिक रूप से प्रयास करने होंगे ताकि हर देश द्वारा समय पर, पूर्ण रूप से भुगतान किया जाए.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सभी सदस्य देशों द्वारा यूएन शान्तिरक्षा के लिए समय पर, पूर्ण भुगतान बहुत अहम है, और शान्तिरक्षा अभियानों के बारे में ग़लत जानकारी फैलाने की मुहिम से भी निपटा जाना होगा.

अहम दायित्व पर बजट की चुनौती

यूएन महासभा ने इस वर्ष जुलाई में 2025-26 के लिए 5.38 अरब डॉलर के शान्तिरक्षा बजट को स्वीकृति दी थी, जोकि पिछले वर्ष के 5.6 अरब डॉलर से कम है.

मगर, बजट को लागू करने के लिए यह ज़रूरी है कि वास्तविक मायनों में वित्तीय योगदान को हासिल किया जाए.

विश्व भर में कुल सैन्य व्यय (2,400 अरब डॉलर) का 0.5 प्रतिशत से भी कम शान्तिरक्षा मिशन के लिए ख़र्च किया जाता है, इसके बावजूद अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा के नज़रिए से यह यूएन के अहम साधनों में है.

वर्ष 1948 के बाद से अब तक, 20 लाख से अधिक शान्तिरक्षकों ने विश्व भर में बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में युद्धविराम को लागू करने, और राजनैतिक संवाद व शान्ति प्रक्रिया को सुनिश्चित करने में अहम योगदान दिया है.

स्थाई शान्ति हासिल करने के लिए इन प्रयासों में 4,400 से अधिक शान्तिरक्षकों ने अपने प्राणों का बलिदान किया है.

ऑपरेशन अपरकट की तैयारी में, डीआर कांगो के इटुरी प्रांत के बुनिया में एक कच्ची सड़क पर MONUSCO के ग्वाटेमाला और बांग्लादेशी शांति सैनिक एक हेलीकॉप्टर की ओर चल रहे हैं।
MONUSCO