We Care Film Festival: सिनेमा के ज़रिए समावेशन का सन्देश
गोवा में हाल में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय पर्पल फ़ेस्ट 2025 के दौरान “We Care” फ़िल्म महोत्सव में ऐसी प्रेरक कहानियाँ प्रस्तुत की गईं, जो विकलांगता को सीमाओं से नहीं, बल्कि सम्भावनाओं से जोड़ती हैं.
We Care फ़िल्म महोत्सव, ब्रदरहुड द्वारा यूनेस्को (UNESCO) और यूएन सूचना केन्द्र (UNIC) के सहयोग से आयोजित किया जाता है.
इस वर्ष महोत्सव में विभिन्न देशों से 123 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं, जिनमें से 35 फ़िल्में प्रतियोगिता के लिए चुनी गईं और विभिन्न श्रेणियों में 11 पुरस्कार दिए गए.
15 मिनट तक की फ़िल्मों में रूसी संघ की “Courage” (साहस) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जो लकवा से जूझते एक सैनिक की नई शुरुआत की कहानी है.
दूसरा पुरस्कार ऑस्ट्रेलिया की “Eye of the Game” को मिला, जिसमें एक बधिर फ़ुटबॉल खिलाड़ी की संघर्ष और सफलता की प्रेरक यात्रा दिखाई गई.
30 मिनट की श्रेणी में रूसी संघ की ही “Hello, That’s Me” विजेता रही - यह एक माँ और उसकी श्रवण-बाधित बेटी की दिल छू लेने वाली कहानी है.
60 मिनट तक की श्रेणी में अर्जेन्टीना की फ़िल्म “Alamesa” ने जीत हासिल की — यह न्यूरोडाइवर्स युवाओं की कहानी है जो आग या चाकू का प्रयोग किए बिना, भोजन पकाने की एक बेहतरीन परियोजना को पूरा करते हैं.
भारत की “Stride” ने दूसरा स्थान पाया, जो एक ट्रांसजेंडर और गतिशीलता-बाधित व्यक्ति की आत्म-पहचान की यात्रा को दर्शाती है.
120 मिनट तक की फ़िल्मों में रूसी संघ की “In sight” को पहला और रूसी संघ की ही “Feel” फ़िल्म को दूसरा पुरस्कार मिला.
“In sight” एक बधिर-अंध व्यक्ति की आत्म-प्रकाश की यात्रा है, जबकि “lFee” एक सवार और अंधे बछेड़े के बीच संवेदना व साहस की कहानी है.
“We Care Film Festival” हर कहानी के ज़रिए यही सन्देश देता है कि सच्ची शक्ति समावेशन में है, और सिनेमा इस बदलाव की सबसे प्रभावी भाषा बन सकता है. (वीडियो...)