वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

यूएन शान्तिरक्षा में योगदानकर्ता देशों की बैठक, क्षमता निर्माण व नवाचारी समाधानों पर बल

UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में यूएनटीसीसी चीफ्स कॉन्क्लेव 2025 के उद्घाटन पर सैन्य प्रमुखों के साथ ताली बजाते हुए।
UN Peacekeeping शान्तिरक्षा मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव ज्याँ पिएर लाक्रोआ ने नई दिल्ली में शान्तिरक्षा में योगदानकर्ता देशों की बैठक में हिस्सा लिया.

यूएन शान्तिरक्षा में योगदानकर्ता देशों की बैठक, क्षमता निर्माण व नवाचारी समाधानों पर बल

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा अभियानों को विशाल राजनैतिक, कामकाज सम्बन्धी व वित्तीय चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है, जिससे निपटने के लिए सामूहिक, साझेदारी-आधारित उपायों की आवश्यकता है. शान्तिरक्षा मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव ज्याँ पिएर लाक्रोआ ने भारत की राजधानी नई दिल्ली में शान्तिरक्षा में योगदानकर्ता देशों की एक उच्चस्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है.

14 अक्टूबर को आरम्भ हुई इस तीन-दिवसीय बैठक में 30 से अधिक देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारी और यूएन के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें शान्तिरक्षा अभियान के समक्ष मौजूद चुनौतियों, नए ख़तरों, क्षमता निर्माण, संसाधनों की लामबन्दी और भावी रणनीति पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा.

यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए अहम है जहाँ जटिल राजनैतिक माहौल है, मानवीय सहायता सम्बन्धी चुनौतियाँ हैं या फिर ऐसे हालात हैं जहाँ परम्परागत सैन्य ताक़त या रणनीति का मुक़ाबला ग़ैर-पारम्परिक, असमान तरीक़ों से किया जाए.

अवर महासचिव ज्याँ पिएर लाक्रोआ ने अपने सम्बोधन में कहा कि पिछले क़रीब आठ दशकों से यूएन शान्तिरक्षा ने स्थिरता, युद्धविराम और आम नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित की है. यूएन मिशनों की विश्वसनीयता को मज़बूती देने में, योगदानकर्ता देशों की भूमिका अहम है.

Tweet URL

उन्होंने कहा कि भारत यूएन शान्तिरक्षा अभियानों का एक मुखर समर्थक रहा है और सबसे बड़े योगदानकर्ता देशों में हैं. फ़िलहाल भारत के पाँच हज़ार शान्तिरक्षक विभिन्न मिशनों में यूएन के झंडे तले तैनात हैं.

तीन बड़ी चुनौतियाँ

अवर महासचिव लाक्रोआ ने आगाह किया कि यूएन शान्तिरक्षा अभियानों को राजनैतिक, अभियान सम्बन्धी और वित्तीय चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है.

अन्तरराष्ट्रीय समुदाय विभाजित है और संकटों से निपटने के लिए सामूहिक स्तर पर प्रयास कमज़ोर पड़ रहे हैं.

वहीं, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आतंकवाद, डिजिटल टैक्नॉलॉजी के नकारात्मक प्रभावों समेत, आपसी टकराव को हवा देने वाले जोखिम उभर रहे हैं, जिससे शान्तिरक्षा अभियानों के लिए चुनौतियाँ बढ़ी हैं. साथ ही, वित्तीय संसाधनों की क़िल्लत है. 

उन्होंने कहा कि 2025-26 में शान्तिरक्षा बजट में 15 फ़ीसदी कटौती को लागू करना होगा, जिसका अर्थ है, 25 फ़ीसदी शान्तिरक्षकों व उपकरणों की वापसी.

इसके मद्देनज़र, उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि उन्हें सामूहिक रूप से प्रयास करने होंगे ताकि हर देश द्वारा समय पर, पूर्ण रूप से भुगतान किया जाए. 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सभी सदस्य देशों द्वारा यूएन शान्तिरक्षा के लिए समय पर, पूर्ण भुगतान बहुत अहम है, और शान्तिरक्षा अभियानों के बारे में ग़लत जानकारी फैलाने की मुहिम से भी निपटा जाना होगा.

इसके मद्देनज़र, उन्होंने पारस्परिक एकजुटता को बढ़ावा देने, प्रशिक्षण मानकों व सामग्री को विकसित करने, सामुदायिक सम्पर्क को प्रगाढ़ बनाने और भ्रामक सूचनाओं व नफ़रत भरी बोली व सन्देशों से निपटने पर बल दिया.

यह ज़रूरी है कि दोहराव से बचा जाए, सहयोग को प्रोत्साहन मिले और मौजूदा संसाधनों को असरदार ढंग से उपयोग में लाया जाए.

एक नैतिक प्रतिबद्धता

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में शान्तिरक्षकों के बलिदान की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक सैन्य कर्तव्य नहीं है, बल्कि मानवता के प्रति नैतिक प्रतिबद्धता है.

उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में सुधार, अधिदेश (mandate) तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान सैन्य योगदान देने वाले देशों की अधिक भागेदारी और प्रौद्योगिक द्वारा संचालित व आम नागरिकों पर केन्द्रित शान्तिरक्षा मिशन बल दिया.

साथ ही, प्रशिक्षण, नवाचार और शान्ति स्थापना में महिलाओं की भूमिका को अहम बताया और मार्गदर्शक सिद्धान्त के रूप में परामर्श, सहयोग, समन्वय व क्षमता निर्माण को अपनाने पर बल दिया.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत पी हरीश ने ध्यान दिलाया कि भारत ने यूएन शान्तिरक्षा को अपना मज़बूत समर्थन दिया है और पिछले अनेक दशकों में 50 से अधिक मिशन में क़रीब तीन लाख शान्तिरक्षकों ने अपना योगदान दिया है. 

उन्होंने कहा कि शान्तिरक्षा प्रयासों को अपने मूल उद्देश्य की ओर लौटना होगा: यथार्थवादी अधिदेशों (mandate) को अपनाना होगा, शान्तिरक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी, पर्याप्त संसाधन मुहैया कराए जाने होंगे, लैंगिक दृष्टिकोण व समावेशन का ध्यान रखना होगा. इसके अलावा टैक्नॉलॉजी नवाचार और मज़बूत क्षेत्रीय सहयोग भी अहम है. 

राजदूत पी हरीश ने शान्तिरक्षकों के विरुद्ध अपराधों को अंजाम दिए जाने के मामलों में जवाबदेही तय किए जाने पर बल दिया और महिला शान्तिरक्षकों के योगदान को सराहा. इस क्रम में, उन्होंने लाइबेरिया में भारत के पुलिस दस्ते की तैनाती का उल्लेख किया, जहाँ सभी भारतीय शान्तिरक्षक महिलाएँ हैं.