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अपना असर खो रही हैं आम एंटीबायोटिक दवाएँ, WHO की चेतावनी

अर्जेन्टीना की एक प्रयोगशाला में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के लिए परीक्षण किया जा रहा है.
© WHO/Sarah Pabst
अर्जेन्टीना की एक प्रयोगशाला में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के लिए परीक्षण किया जा रहा है.

अपना असर खो रही हैं आम एंटीबायोटिक दवाएँ, WHO की चेतावनी

स्वास्थ्य

विश्व भर में, 2023 में बैक्टीरिया की वजह से होने वाले हर छह में से एक संक्रमण पर एंटीबायोटिक दवाएँ बेअसर साबित हुईं और ऐसी बीमारियों का ठीक से इलाज कर पाना कठिन होता जा रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सोमवार को अपनी एक नई रिपोर्ट में ख़तरनाक बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक के विरुद्ध विकसित हो रही प्रतिरोधक क्षमता का चिन्ताजनक रुझान साझा किया है.

यह विश्लेषण बैक्टीरिया के कारण होने वाले उन संक्रमणों पर आधारित है, जिनकी प्रयोगशालाओं में पुष्टि की गई थी.

जब बैक्टीरिया, वायरस व परजीवी जैसे सूक्ष्मजीवों पर रोगाणुरोधी दवाओं का असर होना बन्द हो जाए, तब रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Anti Microbial Resistance) की स्थिति उत्पन्न होती है. 

दवा प्रतिरोध के कारण, एंटीबायोटिक्स व अन्य रोगाणुरोधी दवाएँ बेअसर हो जाती हैं, जिससे संक्रमण का इलाज करना कठिन या असम्भव हो जाता है और रोग के फैलने, गम्भीर बीमारी होने, विकलांगता तथा मृत्यु का ख़तरा बढ़ जाता है.

Global antibiotic resistance surveillance report 2025’ नामक इस अध्ययन में 8 आम बैक्टीरिया के कारण मूत्र, जठरांत्र (gastrointestinal) पाचन तंत्र, रक्तप्रवाह समेत अन्य अंगों में होने वाले संक्रमणों, और उनके उपचार के लिए उपयोग में लाई जाने वाली 22 एंटीबायोटिक दवाओं का आकलन किया गया.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, 2018 से 2023 के दौरान, जिन बैक्टीरिया और उसके एंटीबायोटिक उपचार उपायों की निगरानी की गई, उनमें 40 प्रतिशत से अधिक मामलों में प्रतिरोध में वृद्धि देखी गई. औसतन, यह प्रतिरोध हर वर्ष 5-15 प्रतिशत तक बिगड़ता जा रहा है.

यानि, अनेक हानिकारक बैक्टीरिया अब एंटीबायोटिक के विरुद्ध अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर रहे हैं और यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है.

WHO के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने चेतावनी दी है कि एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध, आधुनिक चिकित्सा में प्रगति को पीछे छोड़ रहा है, जिससे विश्व भर में परिवारों के स्वास्थ्य को ख़तरा है.

इसके मद्देनज़र, उन्होंने AMR निगरानी व्यवस्था को मज़बूती देने, एंटीबायोटिक दवाओं का ज़िम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने और हर व्यक्ति तक सही दवा पहुँचाने का आग्रह किया है.

भारत के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित एक क्लीनिक में एक डॉक्टर मरीज़ों की जाँच कर रहा है.
© UNICEF/Harikrishna Katragadda
भारत के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित एक क्लीनिक में एक डॉक्टर मरीज़ों की जाँच कर रहा है.

कुछ क्षेत्रों में चिन्ताजनक हालात

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की टीम ने 100 देशों से प्राप्त होने वाले डेटा के आधार पर यह विश्लेषण तैयार किया है. संगठन का अनुमान है कि दक्षिण-पूर्वी एशिया और पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्रों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध के सबसे अधिक मामले नज़र आ रहे हैं, जहाँ हर तीन में से एक संक्रमण में प्रतिरोध दर्ज किया गया.

अफ़्रीकी क्षेत्र में हर पाँच में से एक संक्रमण में प्रतिरोधक क्षमता देखी गई. यह प्रतिरोध उन क्षेत्रों में आम है, जहाँ स्वास्थ्य प्रणालियों में बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमणों का निदान या उनका उपचार करने की पर्याप्त क्षमता नहीं है.

विश्लेषण दर्शाता है कि E. coli और K. pneumoniae सबसे चिन्ताजनक दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया हैं, जोकि रक्तप्रवाह में होने वाले संक्रमणों में पाए जाते हैं. इनकी वजह से सेप्सिस हो सकता है, शरीर के अंग काम करना बन्द कर सकते हैं और मौत भी हो सकती है.

40 प्रतिशत E. coli और 55 फ़ीसदी K. pneumoniae अब इन संक्रमणों के उपचार के लिए दी जाने वाली दवा के प्रति बेअसर हैं. अफ़्रीकी क्षेत्रों में यह प्रतिरोध 70 प्रतिशत मामलों तक बढ़ गया है.

कुछ अन्य जीवनरक्षक एंटीबायोटिक दवाएँ, जैसेकि carbapenems, fluoroquinolones भी अब बैक्टीरिया संक्रमणों के विरुद्ध बेअसर नज़र आ रही हैं.

यह इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है चूँकि अक्सर इन एंटीबायोटिक उपचार के लिए दवाओं तक पहुँच कठिन व ख़र्चीली है और अक्सर ये इलाज निम्न- व मध्यम-आय वाले देशों में उपलब्ध नहीं होता है.

पुख़्ता उपायों पर बल

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के मामले उन देशों में ज़्यादा दिखाई दे रहे हैं, जहाँ स्वास्थ्य व्यवस्था कमज़ोर है, निगरानी की सीमित क्षमता है, और पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है.

कुछ हद तक निगरानी व्यवस्था में बेहतरी दर्ज की गई है, लेकिन अब भी अनेक ख़ामियाँ हैं. WHO की निगरानी प्रणाली में देशों की भागेदारी 2016 में केवल 25 थी, जोकि अब बढ़कर 104 पर पहुँच गई है, लेकिन बड़ी संख्या में देशों ने 2023 के लिए आँकड़े उपलब्ध नहीं कराए.

इसके मद्देनज़र, महानिदेशक टैड्रॉस ने सचेत किया कि हमारा भविष्य, मौजूदा निगरानी व्यवस्थाओं को मज़बूती देने, निदान व संक्रमणों के उपचार पर निर्भर करता है. इसके साथ ही, अगली पीढ़ी की एंटीबायोटिक दवाओं को विकसित किया जाना अहम है.