सीमाओं से परे: Purple Festival 2025 में विकलांगता-नेतृत्व वाले नवाचारों की चमक
गोवा में अन्तराराष्ट्रीय Purple Festival 2025 में ऐसे नवाचार सामने आए, जो विकलांगता को लेकर बने पुराने पूर्वाग्रह बदलने में सक्षम हैं. भारत में संयुक्त राष्ट्र की साझेदारी के साथ, ‘पिच फ़ेस्ट: सीमाओं से परे नेतृत्व’ नामक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. यह केवल प्रतियोगिता नहीं थी, बल्कि जीवन के अनुभवों से निकली रचनात्मकता का उत्सव था, जहाँ विकलांग प्रतिभागियों ने समस्याएँ नहीं, बल्कि ऐसे व्यावहारिक समाधान पेश किए जो सबको साथ लेकर चलने और नेतृत्व की परिभाषा बदल देते हैं.
देशभर से मिली 36 प्रविष्टियों में से 8 बेहतरीन प्रतिभागियों को चुना गया, जिन्होंने अपने विचार और पहल विविध जूरी के सामने प्रस्तुत किए. हर नवाचार की एक समान कहानी थी - उनका उदय, दया से नहीं बल्कि ज़रूरत और अनुभव से हुआ था. इन्हें उन लोगों ने गढ़ा था, जिन्होंने ख़ुद चुनौतियों का सामना किया और उन्हें अवसर में बदला.
श्रद्धा अग्रवाल की साइनसेतु (SignSetu), सीखने का नया रास्ता है. इसे बधिर समुदाय के लिए “डुओलिंगो” कहा जा सकता है. यह ऐप भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) की मदद से छोटे, रोचक और खेल-आधारित पाठों के जरिए अंग्रेज़ी सिखाता है. हर शब्द के साथ तस्वीरें, एनीमेशन और वीडियो जुड़ा होता है, इसलिए सीखना आसान और मज़ेदार बन जाता है.
श्रद्धा कहती हैं, “साइनसेतु बधिर शिक्षार्थियों को पढ़ने, लिखने और ख़ुद को व्यक्त करने की आज़ादी देता है. हमारा लक्ष्य है कि सीखना दृश्य, सहज और सभी के लिए बराबर हो.”
रघु दत्त डेगला की कैतकी इनोवेशन (Kaiteki Innovations) ने गुको बिडेट (Guko Bidet) प्रदर्शित किया. यह एक किफ़ायती, सार्वभौमिक डिज़ाइन वाला उपकरण है जिसे किसी भी शौचालय पर लगाया जा सकता है.
यह उपकरण विकलांग और बुज़ुर्ग उपयोगकर्ताओं को बिना मदद के साफ़-सफ़ाई करने में सक्षम बनाता है.
कार्यक्रम का व्यापक सन्देश यह था कि सुलभता महंगे निर्माण पर निर्भर नहीं होनी चाहिए — उसे सस्ती, गरिमापूर्ण और मानवीय होना चाहिए.
सौरभ यादव की पिकस्ट्री एआई (Picstry AI) एक ऐसा नवाचार है जो संवेदना और तकनीक को साथ लाता है. यह नया उद्यम फ़ोटो को नेत्रहीन लोगों के लिए “ऑडियो यादों” में बदल देता है.
तस्वीरें नाम, रिश्ते, घटनाएँ और माहौल के साथ सुनाई देती हैं, जिससे वे सिर्फ़ छवियाँ नहीं, बल्कि यादों की कहानियाँ बन जाती हैं जिन्हें हर कोई महसूस कर सकते हैं.
अन्य नवप्रवर्तक भी असरदार समाधान लेकर आए. सत्यप्रकाश मालवीय का अद्वितीय मसाले केवल स्वाद नहीं, सम्मान की कहानी है. यह सामाजिक उद्यम, काशी की महिलाओं और दृष्टिबाधित साथियों को रोज़गार देता है, ताकि हर पैकेट में ख़ुशबू के साथ गरिमा भी शामिल हो.
ग्रेलमेकर इनोवेशन (Grailmaker Innovations) ने स्पेसफेल्ट (Spacefelt) पेश किया, जो साधारण क्यूआर कोड के ज़रिए सार्वजनिक स्थानों को ऑडियो, भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) वीडियो या टैक्स्ट में जानकारी देकर सुलभ बनाता है.
मायउड़ान (myUDAAN) का वीगो (VGo) व्हीलचेयर में लगने वाला एक उपकरण है जो, किसी भी मैनुअल व्हीलचेयर को इलैक्ट्रिक मोबिलिटी डिवाइस में बदल देता है.
वहीं एक्सेसपाथ (AccessPath) रेस्तराँ, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों की वास्तविक सुलभता का आकलन करके लोगों तक भरोसेमन्द जानकारी पहुँचाता है.
वहीं निर्माता आनंद विजय की फ्लॉप फ़िल्म्स (Flop Films) एक ऐसी एजेंसी है जो वीडियो कैम्पेन, विज्ञापन फ़िल्में और मनोरंजन सामग्री तैयार करती है. यह सम्भवतः दुनिया की एकमात्र क्रिएटिव एजेंसी है जिसका नेतृत्व एक नेत्रहीन निर्माता करते हैं.
सटीक, उपयोगी और असरदार नवाचारों के लिए - रघु दत्त डेगला (कैतकी इनोवेशन) को पहला स्थान, सौरभ यादव (पिकस्ट्री एआई) को दूसरा स्थान और श्रद्धा अग्रवाल (साइनसेतु) को तीसरा स्थान हासिल हुआ.
जूरी सदस्यों में से एक, कम्बोडिया के इम्पैक्ट हब फ्नोम पेन्ह (Impact Hub Phnom Penh) में विविधता, समानता और समावेशन प्रमुख पिचमोनी थाय ने बताया कि हर प्रस्तुति अदभुत थी.
उन्होंने कहा, “विकलांग व्यक्ति परम्परागत तरीक़े से अलग सोचते हैं क्योंकि उनके अनुभव उन्हें ऐसा करने की ताक़त देते हैं. सुलभता कोई विलासिता नहीं बल्कि एक सामान्य आवश्यकता होनी चाहिए. आज मैंने जो देखा, वही सच्चा नवाचार है.”
इस प्रतियोगिता आयोजन करने वाले संगठनों में शामिल - Rising Flames की संस्थापक और कार्यकारी निदेशक निधि गोयल के लिए यह आयोजन निजी भी था और प्रतीकात्मक भी.
उनके मुताबिक़, ‘सीमाओं से परे नेतृत्व (Lead Beyond Limits) नाम इसलिए चुना गया क्योंकि समाज अक्सर विकलांग व्यक्तियों को मदद के मोहताज के रूप में देखता है, नेतृत्वकर्ताओं के तौर पर नहीं. इस मंच पर उद्यमियों ने दिखा दिया कि वे बदलाव के केवल सहभागी नहीं, बल्कि उसके प्रेरक हैं.