'वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली आवाज़ों को स्थान व मंच मुहैया कराती है हिन्दी'
हिन्दी भाषा दुनिया भर में विविधता से भरे दृष्टिकोणों को आपस में जोड़ती है और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली आवाज़ों को स्थान व मंच मुहैया कराती है. हिन्दी भाषा की वैश्विक प्रयोगशीलता के बारे में कुछ इसी तरह के विचार, गुरूवार को, यूएन मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में व्यक्त किए गए. हिन्दी के भाषाई और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करने के लिए, यूएन मुख्यालय में गुरूवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया.
इस कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग यहाँ देखी जा सकती है.
भारत में वैसे तो अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं मगर देश की स्वतंत्रता के बाद से, हिन्दी और अंग्रेज़ी ने प्रमुख स्थान हासिल किया है. इसी उपलब्धि को पहचान देने के लिए भारत में हर साल 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है.
हिन्दी दिवस के सन्दर्भ में, गुरूवार का कार्यक्रम, संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन के सहयोग से आयोजित किया गया.
संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक संचार विभाग की तरफ़ से एक निदेशक नैनेट ब्राउन ने संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी की मौजूदगी का एक ख़ाका प्रस्तुत करने के लिए अपनी बात नमस्ते के साथ शुरू की.
उन्होंने बताया कि बहुपक्षवाद, अनेक भाषाओं की सक्रिय भागेदारी यानि बहुभाषाओं वाले संचार व संवाद के आधार पर फलता-फूलता है और साझा लक्ष्यों को ऐसी नीतियों में तब्दील करता है जिन पर कार्रवाई करना आसान होता है. बहुभाषाई संचार के सहारे, लम्बे समय तक चलने वाली साझेदारियाँ भी बनती हैं.
संयुक्त राष्ट्र की नीतियों व कामकाज को, दुनिया तक पहुँचाने के अभियान की सक्रिय सदस्य नैनेट ब्राउन ने कहा कि इस पैमाने की नज़र से देखें तो हिन्दी, दुनिया भर में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में तीसरे नम्बर पर है.
उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा दुनिया भर में विविधता से भरे दृष्टिकोणों को आपस में जोड़ती है और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली आवाज़ों को स्थान व मंच मुहैया कराती है.
सोशल मीडिया मंचों पर संयुक्त राष्ट्र की बहुभाषाई मौजूदगी बढ़ाने के लिए, 2018 में हिन्दी में भी सोशल मीडिया मंच शुरू किए गए, जिसके बाद जनवरी 2019 में, यूएन न्यूज़ हिन्दी की वेबसाइट भी शुरू हुई.
नैनेट ब्राउन ने कहा कि हिन्दी में सोशल मीडिया मंच और समाचार वेबसाइट, संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक कामकाज से सम्बन्धित महत्वपूर्ण जानकारी समय पर प्रसारित व प्रकाशित करते हैं.
उन्होंने बताया कि यूएन हिन्दी के मंचों के साथ जुड़े पाठकों व सामग्री प्रयोक्ताओं में, बड़ी संख्या 18 वर्ष से 34 वर्ष के बीच आयु के लोगों की है.
“चूँकि यूएन हिन्दी की सामग्री को, अधिकतर लोग मोबाइल माध्यमों पर देखते हैं, इसलिए उनकी रुचि को ध्यान में रखते हुए, हाल ही में व्हाट्स ऐप चैनल भी शुरू किया गया है.”
यूएन न्यूज़ हिन्दी के व्हाट्स ऐप चैनल को आप यहाँ सब्सक्राइब कर सकते हैं.
नैनेट ब्राउन ने कहा कि हिन्दी में डिजिटल सामग्री के लिए बढ़ती रुचि को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र के हिंदी सोशल मीडियो मंचों और समाचार वेबसाइट की पहुँच लगातार बढ़ रही है.
“निष्कर्षतः संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक संचार विभाग, प्रयोक्ताओं की इस रुचि की अहमियत को समझते हुए, संयुक्त राष्ट्र के मुख्य प्राथमितकाओं के बारे में सटीक जानकारी तेज़ी से मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है. इनमें जलवायु परिवर्तन, शान्तिरक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य, टिकाऊ विकास लक्ष्य और झूठे सूचना प्रसार का मुक़ाबला करने जैसे विषय और मुद्दे शामिल हैं.”
संचार व संवाद में बढ़ती हिन्दी
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत पी हरीश ने अपना सम्बोधन हिन्दी में शुरू किया और कार्यक्रम में मौजूद प्रतिभागियों से, अंग्रेज़ी अनुवाद सुनने का अनुरोध किया, जो संयुक्त राष्ट्र की मीटिंग्स और कॉन्फ़्रेंसे सेवा ने मुहैया कराया.
राजदूत पी हरीश ने दुनिया भर में संचार और संवाद में हिन्दी के बढ़ते प्रयोग की तरफ़ ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि हिन्दी सांस्कृतिक विरासत और एकता की अभिव्यक्ति का माध्यम है. हिन्दी, विभिन्न पृष्ठभूमियों व संस्कृतियों के बीच एक सेतु की भूमिका निभाती है.
उन्होंने कहा कि भारत में वैसे तो 22 मान्यता प्राप्त भाषाएँ और हज़ारों बोलियाँ मौजूद हैं, फिर भी भाषाई विविधता वाले देश भारत में हिन्दी का एक विशिष्ट स्थान है.
भारतीय राजदूत ने बताया कि अंग्रेज़ी और मैंडरिन (चीनी) भाषा के बाद, हिन्दी, विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली तीसरी भाषा है. “हिन्दी भारत के जीवन्त सांस्कृतिक परिदृश्य का पर्याय बन गई है और भारत के प्रवासी समुदाय और हिन्दी फ़िल्म जगत और साहित्य की प्रमुखता के बल पर, यह भौगोलिक सीमाओं को पार करते हुए, दुनिया भर में एक लोकप्रिय भाषा के रूप में उभरी है.”
राजदूत पी हरीश ने कहा कि भारत, संयुक्त राष्ट्र में बहुभाषावाद (Multilingualism) का समर्थन करने वाली अग्रणी आवाज़ों में से एक रहा है. इस सन्दर्भ में, संयुक्त राष्ट्र के मंच से हिन्दी में समाचारों के प्रसार के लिए भारत के सहयोग का भी ज़िक्र किया और यूएन मंचों पर हिन्दी की मौजूदगी व लोकप्रियता बढ़ाने के लिए, वैश्विक संचार विभाग (DGC) को धन्यवाद भी दिया.
एकता का सूत्र
भारत से आए एक प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष सांसद पीपी चौधरी ने भी हिन्दी की महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं है, ये भारत की भावना, पहचान और एकता की प्रतीक है. “यह वो सूत्र है जो उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक पूरे देश को जोड़ता है.”
उन्होंने यह कहते हुए प्रसन्नता भी व्यक्त की कि पूरे विश्व में हिन्दी का प्रयोग बढ़ रहा है और भारत सहित दुनिया भर में लगभग 60 करोड़ लोग, हिन्दी का प्रयोग करते हैं.