सूडान: दारफ़ूर में भयावह हालात के प्रति चेतावनी, ज़रूरतमन्दों तक सहायता पहुँचाने की अपील
सूडान के नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त में स्थित तवीला नगर, मानव जीवन के लिए भयावह परिस्थिति का केन्द्र बना हुआ है, जहाँ हिंसा से जान बचाने के लिए छह लाख से अधिक विस्थापितों ने शरण ली हुई है. मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को दारफ़ूर में बड़ी तबाही की आशंका ज़ाहिर करते हुए इसे रोकने की अपील जारी की है.
सूडान में परस्पर विरोधी सैन्य बलों, देश की सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच, अप्रैल 2023 में देश की सत्ता पर नियंत्रण के लिए लड़ाई भड़क उठी थी. आम नागरिक निरन्तर हिंसा, यौन दुर्व्यवहार और भुखमरी से जूझ रहे हैं.
वहीं, लड़ाई के अग्रिम मोर्चे वाले इलाक़ों में फँसे लाखों लोगों के लिए मानवीय सहायता क़ाफ़िलों को पहुँचने से रोका जा रहा है.
मानवतावादी समन्वयक डेनिज़ ब्राउन ने शुक्रवार को नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अल फ़शर से क़रीब 50 किलोमीटर दूर स्थित तवीला से जानकारी देते हुए कहा कि यहाँ तक पहुँचने में बड़े अवरोधों का सामना करना पड़ा.
“हमें इसके लिए पाँच दिन लगे, तीन देशों से होकर गुज़रना पड़ा, तीन अलग-अलग विमानों पर और तीन दिनों की वाहन से यात्रा के बाद. हमें इस तरह से घुम करके जाना पड़ा, चूँकि सूडान के भीतर अनेक अग्रिम मोर्चे हैं.”
उन्होंने तवीला को मानवीय विनाश का एक बड़ा केन्द्र बताया, जहाँ अब छह लाख विस्थापित हैं. वे यहाँ अल फ़शर में जारी लड़ाई से जान बचाने के लिए पहुँचे हैं.
सूडान में 1.2 करोड़ से अधिक लोग विस्थापन का शिकार हुए हैं, जोकि दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन संकट है.
सहायता आपूर्ति में अवरोध
डेनिज़ ब्राउन ने यह अपील ऐसे समय में जारी की है जब अल फ़शर पर RSF मिलिशिया अपने हमलों में तेज़ी ला रहा है.
नार्थ दारफ़ूर का यह अन्तिम बड़ा शहर है, जोकि फ़िलहाल सरकारी सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है. इसकी 500 दिनों से अधिक समय से घेराबन्दी की गई है.
मानवीय सहायता संगठनों के अनुसार, 2.60 लाख आम नागरिक, बिना किसी सुरक्षित मार्ग के फँसे हुए हैं और RSF लड़ाकों ने मानवीय सहायता की आपूर्ति को अवरुद्ध किया हुआ है.
अहम सड़कों पर बारूदी सुरंगें, बिना फटे हुए विस्फोटक बिखरे हुए हैं.
मानवीय सहायताकर्मियों को भी हिंसा में निशाना बनाया गया है. अप्रैल 2023 में युद्ध भड़कने के बाद से अब तक 120 की मौत हो चुकी है.
मानवतावादी समन्वयक डेनिज़ ब्राउन ने कहा, “हिंसा को रोकिए, युद्ध को रोकिए, हमें यहाँ से होकर जाने दीजिए.” उनके अनुसार, सहायताकर्मी, लोगों तक मदद पहुँचाने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे सुरक्षा गारंटी के अभाव में नहीं जा सकते हैं.
भूख, बीमारी, बलात्कार
भीड़भाड़ भरे विस्थापन केन्द्रों पर कुपोषण, हैज़ा और डेंगू बुखार फैल रहा है. बाज़ार में सहायता सामग्री की सीमित उपलब्धता है. स्वच्छ जल भी सीमित स्तर पर सुलभ है. साफ़-सफ़ाई ख़स्ताहाल है.
यूएन की वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हिंसक टकराव आधारित यौन हिंसा मामलों के बारे में जानकारी मिली है. इनमें बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन दासता, यौन हिंसा समेत यातना दिए जाने के अन्य मामले हैं.
सूडान में उपजी विशाल आवश्यकताओं के बावजूद, यहाँ पर्याप्त स्तर पर वित्तीय संसाधनों का अभाव है. 2025 ख़त्म होने में तीन महीने बचे हैं. सहायता अभियान के लिए 4.2 अरब डॉलर की अपील जारी की गई थी, लेकिन केवल 25 फ़ीसदी धनराशि जुटाना ही सम्भव हो पाया है.