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ग़ाज़ा: बमबारी, ड्रोन हमलों के भय से काँपते घायल बच्चे, 'हम बचने के लिए जाएँ कहाँ'

गाजा पट्टी में एक तंबू बस्ती में एक फिलिस्तीनी मां और उसके चार छोटे बच्चे एक साथ बैठे हैं।
© UNICEF/Mohammed Nateel ग़ाज़ा के उत्तरी हिस्से में एक विस्थापित महिला अपने बच्चों के साथ है. उसका कहना है कि यहाँ जीवन मुश्किल और त्रासदीपूर्ण है.

ग़ाज़ा: बमबारी, ड्रोन हमलों के भय से काँपते घायल बच्चे, 'हम बचने के लिए जाएँ कहाँ'

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र सहायता टीम ने शुक्रवार को ग़ाज़ा में कामचलाऊ अस्पतालों में व्यथित कर देने वाली परिस्थितियों पर गहरा क्षोभ प्रकट किया है, जहाँ समय से पहले जन्म लेने वाले नवजात शिशु ऑक्सीजन के लिए कराह रहे हैं और स्वास्थ्यकर्मी उन बच्चों को बचाने में जुटे हैं जोकि अपने टैंट में हवाई हमलों की चपेट में आ गए थे. कुछ पीड़ित वे भी हैं, जिनके खाद्य सामग्री लाते समय ड्रोन हमले की चपेट में आने की आशंका है.

इसराइली सेना, ग़ाज़ा के उत्तरी हिस्से में स्थित ग़ाज़ा सिटी को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेने के लिए सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है.

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने युद्ध से बदहाल ग़ाज़ा में एक अस्पताल में हालात को बयाँ किया, जहाँ छोटे बच्चों के घाव, बेबसी व मौत ही नज़र आई.

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डेयर अल-बलाह के अल अक़्सा अस्पताल में एक पीड़ित, छह वर्ष की अया है, जो एक हवाई हमले में घायल हुई थी.

“हम जब सर्जन से बात कर रहे थे, तभी बिस्तर पर उसकी मौत हमारे सामने हो गई. यह एक अस्पताल में 30 मिनट के भीतर हुआ.”

इसी अस्पताल में, जेम्स ऐल्डर ने देखा कि तीन अन्य बच्चे ‘क्वाडकॉप्टर’ से हुए हमले की चपेट में आए थे, जोकि एक हमलावर ड्रोन होता है.

इसराइल और अमेरिका द्वारा संचालित ‘ग़ाज़ा मानवतावादी फ़ाउंडेशन’ (GHF) नामक राहत वितरण केन्द्र पर पर सहायता लेने की कोशिश के दौरान भी फ़लस्तीनी घायल हो रहे हैं.

“यह एक युद्ध क्षेत्र भी है, बच्चे फ़र्श पर हैं. एक लड़का है जिसका खून बह रहा है, जो GHF पर गोलीबारी में घायल हो गया था.” अनेक अन्य गोलियों, छर्रों और जलने के कारण अस्पताल पहुँचे हैं.

यूनीसेफ़ प्रवक्ता के अनुसार, पिछले दो वर्ष से जारी युद्ध में अब तक एक हज़ार से अधिक नवजात शिशुओं की मौत हुई है. 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हमास के आतंकी हमलों के बाद, इसराइली सेना ने बड़े पैमाने पर ग़ाज़ा में सैन्य अभियान शुरू किया था.

“हमें अभी यह नहीं पता है कि रोकथाम योग्य बीमारियों से कितनी संख्या में बच्चों की जान गई है.”

दो वर्ष से जारी युद्ध के कारण ग़ाज़ा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भीषण दबाव है, 34 में से केवल 14 अस्पतालों में ही स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं और वहाँ मरीज़ों का तांता लगा हुआ है.

बुरी तरह भयभीत, गहरा सदमा

“मैंने मुड़ कर देखा और वहाँ एक छोटी बच्ची, शम थी, जिसे कुछ ही देर पहले मलबे से निकाला गया था. इसलिए वह धूल, धुँए से सनी हुई थी और चेहरे से दिख रहा था कि वह बुरी तरह भयभीत है.”

उस बच्ची को उनके रिश्तेदारों ने पकड़ा हुआ था. उसे कोई अन्दरुनी चोट नहीं लगी है और हड्डी भी सही सलामत है, मगर अभी यह नहीं बताया गया है कि उसकी माँ व बहन हमले में मारी जा चुकी हैं.

यूनीसेफ़ प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा कि ग़ाज़ा में ऐसे हज़ारों लोग हैं, जो बाहर जा पाने में असमर्थ हैं. हवाई हमलों के बीच, इसराइली सेना द्वारा जगह छोड़कर जाने के आदेश दिए जा रहे हैं. बच्चे डर से काँप रहे हैं और हेलीकॉप्टर व ड्रोन से आने वाले विस्फोटकों की दिशा जानने की कोशिश कर रहे हैं.

गाजा के एक अस्पताल में बिस्तर पर बैठा फिलिस्तीनी बच्चा मोहम्मद, जिसका बायां पैर विच्छेदित होने के बाद पट्टी से बंधा हुआ है।
UN News एक फ़लस्तीनी बच्चा मोहम्मद हसन, जिसका एक पैर, इसराइली मिसाइल में घायल होने के बाद, काटना पड़ा है.

एक और सहायताकर्मी की मौत

डॉक्टर विदाउट बॉर्डर्स नामक संगठन ने गुरुवार को अपने 14वें मेडिकल कर्मचारी, ओमार हायक, के ग़ाज़ा के डेयर अल-बलाह में मारे जाने की पुष्टि की थी, जिसमें चार अन्य कर्मचारी भी मारे गए हैं.

13 सितम्बर तक, उन्होंने ग़ाज़ा सिटी में एक क्लीनिक में काम किया, जिसके बाद निरन्तर हमलों और जबरन विस्थापन के कारण उन्हें यह इलाक़ा छोड़कर जाना पड़ा था.

क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि डॉक्टर रिक पीपरकोर्न ने बताया कि लोग डरे हुए हैं, और इसे समझा जा सकता है.

“अगर आप मुझसे पूछें कि क्या हम अपना काम कर सकते हैं? मैं कहूँगा, नहीं. हम उत्तरी इलाक़े में काम नहीं कर सकते हैं.”

ग़ाज़ा में हिंसा इस स्तर पर हो रही है कि वहाँ कोई जगह सुरक्षित नहीं है.