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सूडान: अल फ़शर में फँसे आम नागरिकों की रक्षा के लिए, तुरन्त क़दम उठाने का आग्रह

सूडान के अल फ़शर से जान बचाकर भागने वाले परिवारों ने एक विस्थापन शिविर में शरण ली है.
© UNICEF/Mohammed Jamal सूडान के अल फ़शर से जान बचाकर भागने वाले परिवारों ने एक विस्थापन शिविर में शरण ली है.

सूडान: अल फ़शर में फँसे आम नागरिकों की रक्षा के लिए, तुरन्त क़दम उठाने का आग्रह

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने चेतावनी जारी की है कि सूडान के अल फ़शर शहर में आम नागरिकों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर अत्याचारों को अंजाम दिया जा सकता है, जिसे रोकने के लिए जल्द उपाय करने होंगे. देश में परस्पर विरोधी सैन्य बलों में जारी हिंसक टकराव के बीच, अर्द्धसैनिक बल (RSF) ने नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अल फ़शर की पिछले 500 दिनों से अधिक समय से घेराबन्दी की हुई है.

यूएन मानवाधिकार कार्यालय प्रमुख ने गुरुवार को कहा कि अल फ़शर भयावह स्थिति के कगार पर है और शहर व आम नागरिकों की रक्षा के लिए तुरन्त क़दम उठाए जाने होंगे.

बताया गया है कि अर्द्धसैनिक बल, RSF ने लम्बी दूरी तक मार करने वाले ड्रोन की तैनाती की है, जिससे अगले कुछ दिनों में हालात बिगड़ने की आशंका है.

सूडान में सशस्त्र सेना और RSF के बीच अप्रैल 2023 में, देश की सत्ता पर नियंत्रण के मुद्दे पर मतभेदों की वजह से लड़ाई भड़क उठी थी, जिसमें अब तक जान-माल की भीषण हानि हुई है.

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अल फ़शर, विशेष रूप से इसकी चपेट में है जहाँ लड़ाई में फँसे हुए आम लोगों को पर्याप्त स्तर पर मानवीय सहायता प्रदान कर पाना भी सम्भव नहीं है.

19 से 29 सितम्बर के दौरान, गोलाबारी, ड्रोन हमलों और ज़मीनी लड़ाई में कम से कम 91 आम नागरिक मारे गए. हमलों में बुनियादी प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया है, जिसकी वजह आम नागरिकों को जबरन विस्थापित होने के लिए मजबूर करना हो सकती है.

दारफ़ूर में सरकारी बलों के नियंत्रण वाला यह एकमात्र अन्तिम शहर है, जिस पर क़ब्ज़े के लिए RSF द्वारा कोशिशें की जा रही हैं. विस्थापितों को शरण देने वाले नज़दीकी स्थलों को बार-बार निशाना बनाया गया है.

19 सितम्बर को एक मस्ज़िद पर किए गए ड्रोन हमले में 67 आम नागरिक मारे गए थे, जबकि पिछले सप्ताह दराजा औला नामक इलाक़े में दो हमले हुए हैं. 30 सितम्बर को अबू शौक इलाक़े में एक सामुदायिक रसोई में गोलाबारी हुई है, जिसमें 23 आम लोग मारे गए.

मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा कि अल फ़शर में रह रहे आम नागरिकों की हर हाल में सुरक्षा सुनिश्चित की जानी होगी.

सुरक्षित मार्ग देने की अपील

उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को अल फ़शर से सुरक्षित बाहर निकलने के लिए रास्ता दिया जाना होगा, साथ ही उन सभी मार्गों व सीमा चौकियों पर भी, जहाँ अलग-अलग हथियारबन्द गुटों का नियंत्रण है.

फ़िलहाल कई इलाक़ों से उत्पीड़न, मौत की सज़ा दिए जाने, अगवा करने और लूटपाट की घटनाओं की जानकारी मिल रही है.

मानवाधिकार मामलों के प्रमुख ने कहा कि इस वर्ष, अप्रैल महीने में RSF लड़ाकों ने ज़मज़म शिविर में जातीयता से प्रेरित दुर्व्यवहार को अंजाम दिया था. इस दौरान ज़घावा महिलाओं व लड़कियों के विरुद्ध यौन हिंसा की गई थी.

OHCHR उच्चायुक्त ने कहा कि ज़रूरतमन्द आबादी तक मानवीय राहत पहुँचाने के लिए तुरन्त रास्ता मुहैया कराया जाना होगा, ताकि भोजन, जल व स्वास्थ्य सामग्री सुनिश्चित की जा सके.

उन्होंने कहा कि सामान ख़त्म होता जा रहा है और क़ीमतें आसमान छूँ रही हैं. हाल के दिनों में सामुदायिक रसोई पर हुआ हमले से खाद्य सुरक्षा की स्थिति और बिगड़ने की आशंका है.

उच्चायुक्त टर्क ने अल फ़शर की घेराबन्दी ख़त्म करने की अपील करते हुए कहा कि अत्याचारों को टाला जा सकता है, यदि सभी पक्ष अन्तरराष्ट्रीय क़ानून को सर्वोपरि रखने के लिए क़दम उठाएं, नागरिक जीवन व सम्पत्ति का सम्मान करें और अत्याचार अपराधों को होने से रोकें.