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अफ़ग़ानिस्तान: तालेबान ने इंटरनैट सेवाओं पर कसा शिकंजा, सहायता प्रयास संकट में

पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में एक लड़की, 31 अगस्त को आए भूकम्प में ध्वस्त हुए अपने घर को देख रही है.
© UNICEF/Amin Meerzad
पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में एक लड़की, 31 अगस्त को आए भूकम्प में ध्वस्त हुए अपने घर को देख रही है.

अफ़ग़ानिस्तान: तालेबान ने इंटरनैट सेवाओं पर कसा शिकंजा, सहायता प्रयास संकट में

मानवीय सहायता

अफ़ग़ानिस्तान में, अगस्त (2025) में भीषण भूकम्प से तबाह हुई दूरदराज़ बस्तियों तक राहत पहुँचाने के प्रयासों को अब एक और संकट का सामना करना पड़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने मंगलवार को बताया कि सत्तारूढ़ तालेबान द्वारा पूरे देश में इंटरनैट सेवाएँ बन्द करने के निर्णय ने, जीवनरक्षक सहायता कार्यों को गम्भीर रूप से प्रभावित किया है.

अफ़ग़ानिस्तान में यूएन मानवीय समन्वयक इन्द्रिका रटवट्टे ने राजधानी काबुल से कमज़ोर सैटेलाइट वीडियो लिंक के ज़रिए कहा, “हमें कल शाम शाम 5 बजे यह सूचना दी गई कि देश की दूरसंचार और फ़ाइबर ऑप्टिक सेवाएँ अगले आदेश तक निलम्बित कर दी गई हैं.”

उन्होंने बताया, फ़िलहाल लगभग पूरा देश बाहरी दुनिया से कटा हुआ है. सबसे बड़ी कठिनाई ये है कि हमारे राहतकर्मी, जो पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में भूकम्प पीड़ितों को सहायता पहुँचा रहे हैं, उनसे भी अब हमारा सम्पर्क पूरी तरह टूट गया है.

मानवीय समन्वयक इन्द्रिका रटवट्टे ने कहा, “हमारा उनसे कोई सम्पर्क नहीं है. कुनार प्रान्त की घाटी में अस्थाई और भीड़भाड़ वाली बस्तियों में रहने वाले परिवारों की ज़रूरतें बेहद गम्भीर हैं. ये परिवार मूल रूप से पहाड़ी गाँवों से आए हैं, जिन्हें भूकम्प ने तबाह कर दिया था.

उन्होंने, एक समुदाय का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ उनकी मुलाक़ात एक ऐसी महिला से हुई, जिनके परिवार के 11 सदस्यों की मृत्यु हो गई है..“यह आघात वाक़ई बहुत गहरा है.”

 समाचारों के अनुसार, कुछ सप्ताह पहले, तालेबान द्वारा संचार केबल काटने की कार्रवाई के बाद, अब अफ़ग़ानिस्तान के 4.3 करोड़ से अधिक लोग इंटरनैट से पूरी तरह कट चुके हैं.

तालेबान ने यह क़दम अपनी सख़्त शरिया व्याख्या के तहत “अनैतिकता व बुराइयों” पर नियंत्रण बढ़ाने के लिए बताया है.

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्यों को एक और बड़ा झटका तब लगा जब इस महीने की शुरुआत में तालेबान ने महिला कर्मचारियों को संयुक्त राष्ट्र के दफ़्तरों में प्रवेश करने पर रोक लगा दी थी.

सब कुछ ठप…

यूएन मानवीय समन्वयक ने बताया कि इंटरनैट बन्द होने से, यूएन और उसके साझीदार संगठनों का काम ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य कार्यक्रम, बैंकिग सेवाएँ और वित्तीय सेवाएँ भी प्रभावित हुई हैं.

उन्होंने कहा कि, “सामुदायिक स्तर पर देखें तो सामान्य कारोबारी लेन-देन, बैंकिंग, नक़दी लेन-देन और विदेश से आने वाली रक़म, जो इन समुदायों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, सब कुछ ठप हो गया है.”

पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में आए 6.0 तीव्रता के भूकम्प को एक महीना बीत चुका है, लेकिन दूरदराज़ के इलाक़े अब भी संभल नहीं पाए हैं.

इस आपदा में लगभग 2 हज़ार लोगों की मौत हुई, 3600 लोग घायल हुए, जबकि साढे़ 8 हज़ार घर क्षतिग्रस्त हुए.

समन्वयक रटवट्टे ने आगाह किया कि, “अब सर्दी आने वाली नहीं है, बल्कि आ चुकी है.” 

उन्होंने विस्थापित लोगों के लिए आश्रयों को गर्म रखने की व्यवस्था करने और ठंड से बचाने वाले कपड़े उपलब्ध कराने की तात्कालिक ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के प्रान्तों में आए इस भूकम्प से स्थानीय समुदायों को गहरा नुक़सान हुआ है.
© IOM

रियायत पर बातचीत

काबुल में, तालेबान प्राधिकरणों के साथ यह बातचीत चल रही है कि राहतकर्मियों से जुड़ने के लिए “महत्वपूर्ण सम्पर्क” की रियायत दी जाए. लेकिन मौजूदा हालात ने अफ़ग़ानिस्तान की पहले से ही “गम्भीर” स्थिति को और भी गम्भीर बना दिया है.

यूएन मानवीय समन्वयक ने कहा, “यह पहले से मौजूद संकट के ऊपर एक और संकट है…और इसका सीधा असर लोगों की ज़िन्दगियों पर पड़ेगा.”

उन्होंने बताया कि इस निर्णय का असर महत्वपूर्ण चिकित्सकीय सेवाओं, आपूर्ति श्रृंखला और टीकाकरण कार्यक्रमों पर भी पड़ेगा.

उनके अनुसार, “देश में बुनियादी आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने वाली सहायता अब बुरी तरह प्रभावित होगी.”

साथ ही दुनिया से सम्पर्क भी बाधित हो गया है. “विमान उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, आज कोई अन्तरराष्ट्रीय उड़ानें अफ़ग़ानिस्तान में नहीं पहुँच रहीं हैं.”