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सुरक्षा परिषद: क़ाबिज़ पश्चिमी तट में, इसराइली बस्तियाँ बसाए जाने की गतिविधि में तेज़ी

मध्य पूर्व में स्थिति पर सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों की बैठक. (फ़ाइल)
UN Photo/Manuel Elias
मध्य पूर्व में स्थिति पर सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों की बैठक. (फ़ाइल)

सुरक्षा परिषद: क़ाबिज़ पश्चिमी तट में, इसराइली बस्तियाँ बसाए जाने की गतिविधि में तेज़ी

शान्ति और सुरक्षा

पूर्वी येरूशलम समेत क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में इसराइल को अपनी बस्तियाँ बसाने की सभी गतिविधियाँ तुरन्त रोकनी होंगी और इस विषय में तयशुदा क़ानूनी दायित्वों का पूर्ण रूप से पालन करना होगा. मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए यूएन के विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने सोमवार को सुरक्षा परिषद की एक बैठक के दौरान यह बात कही.

सुरक्षा परिषद की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मध्य पूर्व में संकट और ग़ाज़ा युद्ध में फँसे आम फ़लस्तीनियों की व्यथा पर गहराती चिन्ताओं के बीच, इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू की सोमवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प से मुलाक़ात हो रही है.

15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद की बैठक में, मध्य पूर्व में ‘प्रस्ताव 2334’ को लागू किए जाने के विषय में महासचिव की त्रैमासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई.

2016 में पारित हुए इस प्रस्ताव के अनुसार, इसराइली बस्तियाँ, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का खुला उल्लंघन है और पूर्वी येरूशलम समेत क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में ऐसी गतिविधियों को तुरन्त रोका जाना होगा.

प्रस्ताव में कहा गया है कि इसराइली बस्तियों के विस्तार से दो-राष्ट्र समाधान की सम्भावनाओं को भी ठेस पहुँचती है.

विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने सुरक्षा परिषद को बताया कि पिछले तीन महीनों में क़ाबिज़ पश्चिमी तट में बस्तियाँ बसाने की गतिविधियों में तेज़ी आई है. 18 जून से 19 सितम्बर के दौरान, इसराइली प्रशासन ने पूर्वी येरूशलम समेत क़ाबिज़ पश्चिमी तट में लगभग 20,810 आवास इकाइयों को स्वीकृति दी है.

इससे पहले 2 जुलाई को, 15 इसराइली मंत्रियों और देश की संसद (क्नैसेट) के स्पीकर ने एक याचिका पर हस्तारक्षर किए थे जिसमें इसराइल द्वारा क़ाबिज़ पश्चिमी तट पर अपना आधिपत्य जमाने का आग्रह किया गया.

23 जुलाई को, इसराइली संसद ने एक प्रस्ताव को पारित किया, जिसमें पश्चिमी तट में स्थित सभी बस्तियों में इसराइली सम्प्रभुता को लागू किए जाने की बात कही गई. यह प्रस्ताव क़ानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं था.

फ़लस्तीनी परिवार, पश्चिमी तट के हेब्रॉन में बस्तियों के बेहद नज़दीक रह रहे हैं.
© UNRWA/Kazem abu Khalaf
फ़लस्तीनी परिवार, पश्चिमी तट के हेब्रॉन में बस्तियों के बेहद नज़दीक रह रहे हैं.

ध्वस्तीकरण कार्रवाई में तेज़ी

यूएन अधिकारी ने बताया कि फ़लस्तीन के स्वामित्व वाले ढाँचों को ध्वस्त, ज़ब्त किया जा रहा है, और फ़लस्तीनी आबादी बेदख़ल हो रही है.

“इसराइल द्वारा जारी निर्माण परमिट न होने का हवाला देकर, जिन्हें फ़लस्तीनियों के लिए हासिल कर पाना लगभग असम्भव है, इसराइली प्रशासन ने 454 ढाँचों को ध्वस्त, ज़ब्त किया है या लोगों को ध्वस्त करने पर मजबूर किया है.”

विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने महासचिव की रिपोर्ट का ब्यौरा देते हुए कहा कि इसराइली बस्तियाँ, क़ानूनी रूप से क़तई जायज़ नहीं हैं और वे अन्तरराष्ट्रीय क़ानून व यूएन प्रस्तावों का खुला उल्लंघन हैं.

उन्होंने इसराइल की उस योजना को आगे बढ़ाने पर गहरी चिन्ता जताई, जिससे उत्तरी और दक्षिणी पश्चिमी तट के बीच सम्पर्क मोटे तौर पर टूट जाएगा.

इससे एक स्वतंत्र, सम्प्रभु फ़लस्तीनी राष्ट्र की सम्भावना कमज़ोर होगी, आम फ़लस्तीनियों के जबरन विस्थापित होने का जोखिम बढ़ेगा और तनाव को ईंधन मिलेगा.

क़ाबिज़ पश्चिमी तट में, इसराइली सुरक्षा बलों की कार्रवाई, हवाई हमलों, इसराइली निवासियों के हमलों, प्रदर्शनों व अन्य घटनाओं में 46 फ़लस्तीनी मारे गए हैं, जबकि 890 घायल हुए हैं.

हथियारबन्द फ़लस्तीनियों ने सात इसराइली नागरिकों की जान ली है, 62 लोग और 14 सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं.

इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े - पश्चिमी तट के एक ध्वस्त गाँव में खेलते कुछ बच्चे.
© UNOCHA
इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े - पश्चिमी तट के एक ध्वस्त गाँव में खेलते कुछ बच्चे.

ग़ाज़ा में मौत व विस्थापन

प्रस्ताव 2334 में, आम नागरिकों के विरुद्ध सभी हिंसक कृत्यों, उकसावेपूर्ण कार्रवाई व विध्वंस को भी तुरन्त रोके जाने की मांग की गई है.

विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने ग़ाज़ा पट्टी में हालात से अवगत कराते हुए कहा कि इसराइली सैन्य अभियान में तेज़ी आई है, बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं, विशाल स्तर पर विध्वंस हो रहा है.

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, 18 जून से 19 सितम्बर की अवधि में 7,579 फ़लस्तीनी मारे गए हैं, 37 हज़ार से अधिक घायल हुए हैं. वहीं, 37 इसराइली सैनिकों के मारे जाने की ख़बर है, 48 बन्धक अब भी फ़लस्तीनी हथियारबन्द गुटों के क़ब्ज़े में हैं, जिनमें से 25 की मौत होने की आशंका है.

इस दौरान, संयुक्त राष्ट्र के कम से कम 30 कर्मचारी मारे गए हैं. हमास और अन्य चरमपंथियों द्वारा इसराइल की तरफ़ रॉकेट दागे जाने की घटनाएँ भी हुई हैं.