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कैनेडा की विदेश मंत्री अनिता आनन्द ने यूएन महासभा के 80वें सत्र के दौरान वार्षिक जनरल डिबेट को सम्बोधित किया.

UNGA80: एकपक्षवाद और संरक्षणवाद से कमज़ोर हो जाएंगी अन्तरराष्ट्रीय संस्थाएँ - कैनेडा

UN Photo/Loey Felipe
कैनेडा की विदेश मंत्री अनिता आनन्द ने यूएन महासभा के 80वें सत्र के दौरान वार्षिक जनरल डिबेट को सम्बोधित किया.

UNGA80: एकपक्षवाद और संरक्षणवाद से कमज़ोर हो जाएंगी अन्तरराष्ट्रीय संस्थाएँ - कैनेडा

यूएन मामले

कैनेडा की विदेश मामलों की मंत्री अनिता आनन्द ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के ऐतिहासिक 80वें सत्र में अपने सम्बोधन में कहा कि एकपक्षवाद और संरक्षणवाद से वैश्विक संस्थाएँ व क़ानून का राज कमज़ोर होगा, जोकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था की आधारशिला रही है.

कैनेडाई नेता ने कहा कि पीछे हटना कोई विकल्प नहीं है.

उनका देश, संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार लागू करने और उन्हें मज़बूती देने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा.

उन्होंने कहा कि कैनेडा, व्यवसाय और सामूहिक सुरक्षा में एक स्थायित्वपूर्ण और विश्वसनीय साझेदार है.

इसके तहत, उन्होंने आर्कटिक क्षेत्र में, कैनेडा द्वारा अपनी सम्प्रभुता की रक्षा करने, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मिलकर नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफ़ेंस कमांड (NORAD) का आधुनिकीकरण करने, और अन्य सदस्य देशों के साथ उत्तर अटलांटिक सन्धि संगठन (NATO) को मज़बूती देने की बात कही.

विदेश मंत्री अनिता आनन्द ने यूक्रेन के मुद्दे पर कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन को अपनी इच्छा अनुसार सीमाओं को खींचने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. न तो यूक्रेन झुक रहा है और न ही कैनेडा समेत उसके देश.

उन्होंने भरोसा दिलाया कि यूक्रेन को समर्थन प्रदान करना, सम्प्रभुता, गरिमा व शान्ति को समर्थन देना है.

अनिता आनन्द ने ग़ाज़ा का उल्लेख करते हुए हमास से हथियार डालने और सभी शेष बन्धकों को रिहा करने की अपील की. 

उन्होंने कहा कि इसराइल को आम नागरिकों की सुरक्षा करनी होगी, बेरोकटोक मानवीय सहायता के लिए सड़क मार्गों को खोला जाना होगा और स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी.

कैनेडा की विदेश मंत्री ने हेती में आपराधिक गुटों की हिंसा से निपटने के लिए सुरक्षा प्रयासों द्वारा एक नए मिशन को स्थापित करने की कोशिशों को समर्थन देने की बात कही.

इसके ज़रिए देश में शासन व्यवस्था को फिर से स्थापित किया जाएगा और स्थायित्वपूर्ण लोकतंत्र का मार्ग प्रशस्त होगा.