UNGA80: मिस्र द्वारा ग़ाज़ा में युद्ध को समाप्त करने की पुकार,जातीय सफ़ाए की निन्दा
मिस्र ने, यूएन महासभा के 80वें सत्र की उच्च स्तरीय जनरल डिबेट में कहा है कि “मिस्र फ़लस्तीनी आन्दोलन को ख़त्म करने का द्वार नहीं है और न ही होगा. हम कभी भी एक नए नक़बा (फ़लस्तीनी लोगों के विस्थापन) में भागीदार नहीं होंगे.”
मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अहमद मोहम्मद अब्देलाती चेतावनी दी कि “मध्य पूर्व विस्फोट के कगार पर है,” जिसमें फ़लस्तीनी लोग “इसराइल की सबसे जघन्य कार्रवाइयों […] से पीड़ित हैं, जबकि उन्होंने कोई पाप नहीं किया है.”
उन्होंने “ग़ाज़ा के ख़िलाफ़ इस अन्यायपूर्ण युद्ध को समाप्त करने” के प्रयासों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प को धन्यवाद दिया और कहा कि मिस्र, क़तर और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ, युद्धविराम के लिए प्रयास कर रहा है, और इस बात पर ज़ोर दिया कि “मानवीय सहायता की आपूर्ति प्राथमिकता होनी चाहिए.”
उन्होंने फ़लस्तीनी लोगों के जबरन विस्थापन को “जातीय सफ़ाए का अपराध” बताते हुए, उसका विरोध किया.
उन्होंने फ़लस्तीन को एक राष्ट्र के दर्जे पर “साहसिक निर्णयों” का स्वागत किया और सऊदी-फ़्रांसीसी दो-राष्ट्र सम्मेलन का समर्थन करते हुए चेतावनी दी: “जब अन्य सुरक्षित नहीं हैं तो इसराइल सुरक्षित नहीं रह सकता."
"एक स्वतंत्र फ़लस्तीन राष्ट्र की स्थापना के बिना, इस क्षेत्र में स्थिरता नहीं आ सकती.”
क्षेत्रीय मुद्दों पर, उन्होंने कहा कि मिस्र, सूडान में शान्ति और लीबिया में चुनावों का समर्थन करता है और "इसराइल द्वारा लेबनान व सीरिया की सम्प्रभुता के उल्लंघन" की निन्दा करता है.
उन्होंने कहा कि मिस्र को "स्वेज़ नहर से 9 अरब डॉलर से ज़्यादा राजस्व" का नुक़सान हुआ है और वह सोमालिया में अफ़्रीकी संघ के मिशन में योगदान देगा.
उन्होंने नील नदी में मिस्र के "अस्तित्ववादी" हित और उसकी मानवीय भूमिका की पुष्टि की, जहाँ "हमारी क्षमता से परे" बोझ के बावजूद "एक करोड़ से ज़्यादा शरणार्थियों" को पनाह दी जा रही है.