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UNGA80: पाकिस्तान की दक्षिण एशिया में तनाव की चेतावनी, ग़ाज़ा में युद्धविराम की पुकार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने, शुक्रवार 26 सितम्बर को, जनरल डिबेट को सम्बोधित किया. (2025)
UN Photo/Loey Felipe
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने, शुक्रवार 26 सितम्बर को, जनरल डिबेट को सम्बोधित किया. (2025)

UNGA80: पाकिस्तान की दक्षिण एशिया में तनाव की चेतावनी, ग़ाज़ा में युद्धविराम की पुकार

यूएन मामले

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि दुनिया टकराव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है और एक "कठिन समय" का सामना कर रही है. उन्होंने दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में शान्ति के लिए तत्काल कार्रवाई किए जाने का आग्रह भी किया.

शहबाज़ शरीफ़ ने, शुक्रवार को यूएन महासभा के 80वें सत्र की उच्चस्तरीय जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए, बढ़ते टकरावों व युद्धों, अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनों के उल्लंघन और जलवायु संकट का हवाला देते हुए कहा, "आज हमारी दुनिया पहले से कहीं अधिक जटिल है."

उन्होंने इन मुद्दों को, मानवता के अस्तित्व के लिए ही ख़तरा बताया.

उन्होंने तर्क दिया कि बहुपक्षवाद "अब कोई विकल्प नहीं रहा - यह समय की मांग है."

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि इस साल की शुरुआत में उनके देश को, भारत के, "बिना उकसावे के आक्रमण" का सामना करना पड़ा था.

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के सशस्त्र बलों ने "अदभुत पेशेवर निपुणता, बहादुरी और कुशाग्रता" के साथ हमले का जवाब दिया, और कई भारतीय विमानों को मार गिराया.

उन्होंने युद्धविराम सुनिश्चित करने में मदद के लिए, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की प्रशंसा की.

भारत के साथ बातचीत

प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने, साथ ही बातचीत की पेशकश भी की.

उन्होंने आगाह करते हुए हुए कहा, "पाकिस्तान सभी लम्बित मुद्दों पर भारत के साथ एक समग्र, व्यापक और परिणामों पर केन्द्रित वार्ता के लिए तैयार है."

उन्होंने चेतावनी दी कि कश्मीर और जल संसाधनों पर विवाद अब भी अस्थिर बना हुआ है.

उन्होंने आगे कहा कि सिन्धु जल सन्धि को भारत की तरफ़ से कथित रूप से स्थगित करना, "युद्ध की कार्रवाई का एक रूप है."

शहबाज़ शरीफ़ ने, कश्मीरियों के प्रति समर्थन का वादा करते हुए कहा कि पाकिस्तान उनके अधिकारों की "पूरी तरह से रक्षा" करेगा और उन्हों संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत संग्रह की मांग दोहराई.

उन्होंने कहा, "जल्द ही एक दिन, इंशाअल्लाह, कश्मीर में भारत का अत्याचार पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा. संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में एक निष्पक्ष जनमत संग्रह के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्णय का मौलिक अधिकार प्राप्त होगा."

ग़ाज़ा में युद्धविराम की पुकार

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने, मध्य पूर्व के मुद्दे पर, ग़ाज़ा में इसराइल के "जनसंहारकारी हमले" की निन्दा की और फ़लस्तीनी बच्चों की दुर्दशा को "हमारे समय की सबसे हृदयविदारक त्रासदियों में से एक" बताया.

उन्होंने तत्काल युद्धविराम का आहवान किया और 1967 से पहले की सीमाओं के भीतर, एक स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र के लिए, पाकिस्तान के समर्थन की पुष्टि की, जिसकी राजधानी येरूशलम हो.

उन्होंने घोषणा की, "फ़लस्तीन अब इसराइल की बेड़ियों में नहीं रह सकता. इसे आज़ाद होना ही होगा."

पाकिस्तानी नेता ने व्यापक वैश्विक मुद्दों पर भी बात की, जिसमें रूस द्वारा यूक्रेन पर जारी आक्रमण भी शामिल है, जहाँ उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप शान्तिपूर्ण समाधान के लिए समर्थन व्यक्त किया.

उन्होंने, आतंकवाद के मुद्दे पर, पाकिस्तान के बलिदानों का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश ने दो दशकों में, चरमपंथी हिंसा में 90 हज़ार लोगों के जीवन और 150 अरब डॉलर गँवाए हैं.

शहबाज़ शरीफ़ ने जलवायु परिवर्तन को, मानवता के अस्तित्व के लिए एक चुनौती बताया और हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ की ओर इशारा किया, जिससे लाखों लोग विस्थापित हुए और अरबों डॉलर का नुक़सान हुआ. "वैश्विक उत्सर्जन के एक प्रतिशत से भी कम" के लिए ज़िम्मेदार होने के बावजूद.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक असमान बोझ उठा रहा है, और इस स्थिति के बारे मे कहा कि यह "न्यायसंगत नहीं है, समानता नहीं है और न ही न्याय" है.

शहबाज़ शरीफ़ ने, अपने सन्बोधन के अन्त में संकल्प व्यक्त किया कि पाकिस्तान, बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से "शान्ति, न्याय और विकास" के लिए खड़ा रहेगा.

उन्होंने कहा, "इस 80वीं वर्षगाँठ को केवल इतिहास की बात नहीं बनने दें. आइए हम इतिहास बनाएँ और अगले 80 वर्षों के लिए, एक भविष्य की रूपरेखा तैयार करें, जिसमें संयुक्त राष्ट्र वैश्विक भलाई की स्थाई आशा के रूप में हो."