UNGA80: नवाचार, युवजन और तकनीक से नया आकार पाता 'वैश्विक दक्षिण'
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के रास्ते में, अन्तिम चरण की रूपरेखा तय करने के लिए, विश्व भर के नेता न्यूयॉर्क में एकत्र हुए. इसी दौरान न्यूयॉर्क में आयोजित India Day @ UNGA में यह प्रदर्शित किया गया कि भारत के अनुभव, नवाचार और साझेदारियाँ, न केवल वैश्विक दक्षिण, बल्कि पूरी दुनिया के लिए समाधान तैयार करने में प्रेरणा बन रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव और डिजिटल व उभरती तकनीकों के विशेष दूत अमनदीप सिंह गिल ने इस के प्रारम्भिक सत्र की दिशा तय करते हुए, युवाओं की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया भर में सबसे युवा आबादियों वाला एक देश है जहाँ, युवजन, व्यापक वैश्विक दक्षिण के प्रतिबिम्ब है, जहाँ युवजन तेज़ी से सामाजिक और आर्थिक प्रगति की रीढ़ बन रहे हैं.
उन्होंने हाल ही में भारत के नए उद्यमों के साथ अपनी मुलाक़ात का ज़िक्र करते हुए कहा कि ये नए उद्यम, सिलिकॉन वैली जैसे बड़े भाषा मॉडल बनाने के बजाय छोटे, ऊर्जा-कुशल और विकासशील देशों की ज़रूरतों के अनुसार समाधान तैयार कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “यही वह नवाचार है जो वास्तव में समुदायों को बदल सकता है. अब चुनौती यह है कि इन्हें धन, प्रशिक्षण और लचीले नियम मिलें, ताकि युवा नवप्रवर्तकों की सृजनात्मक शक्ति को पूरी तरह सामने लाया जा सके.”
अमनदीप सिंह गिल ने कहा, “हमें कम्प्यूटर तक पहुँच, खुले डेटा सेट और दक्षिण-दक्षिण सहयोग की ज़रूरत है, ताकि ऐसे साझा मॉडल तैयार किए जा सकें जो हमें 2030 के लक्ष्यों तक पहुँचने में मदद करें."
"हो सकता है कि यह वैश्विक शासन चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन चुनौती हमेशा अच्छी होती है - यह हमें और अधिक करने के लिए प्रेरित करती है.”
दक्षिण के देशों का समूह
वैश्विक दक्षिण विकासशील देशों का ऐसा समूह है जो वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को अहमियत दिलाने के लिए प्रयासरत हैं. वैश्विक समझने के लिए एक उदाहरण का सहारा लिया जा सकता है.
वर्ष 1960 में, विकासशील देशों ने, संयुक्त राष्ट्र के मंच पर, अपने सामूहिक हितों व आवाज़ को रखने के लिए G77 नामक समूह बनाया था.
अब इस समूह के सदस्य देशों की संख्या 134 हो गई है जिसमें एशिया, अफ़्रीका, मध्य व दक्षिणी अमेरिका और ओसीनिया के देश शामिल हैं जो स्वयं को वैश्विक दक्षिण के नाम से भी पुकारते हैं.
India Day @ the UNGA, भारत में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के सहयोग से, गुरूवार, 25 सितम्बर को, न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास में आयोजित किया गया.
न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनया श्रीकान्त प्रधान ने, प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह दिवस, 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए अन्तिम चरण की राह तैयार की दिशा में, विचारों, साझेदारियों और समाधानों को समर्पित है.
वैश्विक विभाजनों की नई परिभाषा
India Day @ UNGA 2025 का मुख्य आकर्षण शाम की उच्च-स्तरीय वार्ता रही, जिसका विषय था “विकास के केन्द्र में: सहायता, व्यापार और तकनीक.”
इस मंत्री स्तरीय सत्र में विचार हुआ कि साझेदारियाँ, तकनीकी प्रगति और नए व्यापार ढाँचे किस तरह वैश्विक दक्षिण के देशों में समावेशी विकास को नई दिशा दे रहे हैं.
इस अवसर पर भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस. जयशंकर ने कहा कि वैश्विक राजनीति को अब उत्तर-दक्षिण के साधारण विभाजन तक सीमित नहीं किया जा सकता.
उन्होंने कहा, “वैश्विक उत्तर और दक्षिण को अलग-अलग ख़ानों में रखना अब सतही सोच है. दुनिया तेज़ी से एक बहुध्रुवीय ढाँचे की ओर बढ़ रही है. आज अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जोखिम कैसे घटाए जाएँ, संतुलन कैसे साधा जाए और पूरी व्यवस्था को और अधिक लचीला एवं सहनसक्षम कैसे बनाया जाए.”
मैक्सिको के विदेश मंत्री जुआन रेमोन दे ला फुएंते ने बदलाव की इस भावना को आगे बढ़ाते हुए कहा कि महिला वैज्ञानिकों का नेतृत्व और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की रचनात्मक क्षमता नए प्रकार के अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को जन्म दे सकती है.
उन्होंने कहा, “आज का समय अन्तरराष्ट्रीय सहयोग में नई रचनात्मकता की माँग करता है, और इस रचनात्मकता के केन्द्र में एआई होगी, क्योंकि सहायता, व्यापार एवं तकनीक के बीच नए तरह की साझेदारियाँ उभर रही हैं.”
भारत की विकास यात्रा का मॉडल
भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर शॉम्बी शार्प ने इस दिवस के कार्यक्रम में शिरकत करते हुए, भारत के अग्रणी एसडीजी स्थानीयकरण प्रयासों - राज्य स्तरीय सूचकांकों से लेकर मिशन मोड कार्यक्रमों तक की सराहना की.
उन्होंने कहा, “वैश्विक दक्षिण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता अनुकरणीय है. उदाहरण के तौर पर, भारत अपना डिजिटल सार्वजनिक ढाँचा (DPI) मॉडल कई देशों के साथ बिना किसी लागत के साझा कर रहा है.”
भारत के इलैक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने सामाजिक क्षेत्र में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के उपयोग की सम्भावनाओं पर बल दिया.
वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक ने बताया कि भारत अब महिला सशक्तिकरण के एक नए चरण में पहुँच चुका है.