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फ़लस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने यूएन महासभा के 80वें सत्र के दौरान जनरल असेम्बली को सम्बोधित किया.

UNGA80: 'ग़ाज़ा, फ़लस्तीनी राष्ट्र का अटूट हिस्सा', इसराइल द्वारा छेड़े गए युद्ध, जनसंहार की निन्दा

UN Photo/Loey Felipe
फ़लस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने यूएन महासभा के 80वें सत्र के दौरान जनरल असेम्बली को सम्बोधित किया.

UNGA80: 'ग़ाज़ा, फ़लस्तीनी राष्ट्र का अटूट हिस्सा', इसराइल द्वारा छेड़े गए युद्ध, जनसंहार की निन्दा

यूएन मामले

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा है कि इसराइली सैन्य बलों ने ग़ाज़ा पट्टी में फ़लस्तीनी आबादी के विरुद्ध जनसंहार, विध्वंस, भुखमरी और विस्थापन का युद्ध छेड़ा हुआ है, जिसमें अब तक 2.20 लाख लोग हताहत हो चुके हैं. इनमें अधिकाँश निहत्थे बच्चे, महिलाएँ व बुज़ुर्ग हैं.

फ़लस्तीनी नेता ने गुरूवार को यूएन महासभा के 80वें सत्र के दौरान जनरल डिबेट को वीडियो लिंक के ज़रिए सम्बोधित किया. संयुक्त राज्य अमेरिका ने न्यूयॉर्क में उच्चस्तरीय सत्र में हिस्सा लेने के लिए उन्हें और उनके प्रतिनिधिमंडल को वीज़ा देने से मना कर दिया था.

महमूद अब्बास ने कहा कि जिन अपराधों को ग़ाज़ा में अंजाम दिया जा रहा है, उन्हें 20वीं व 21वीं शताब्दी में अन्तरराष्ट्रीय चेतना के पन्नों पर मानवीय त्रासदी के सबसे भयावह अध्यायों के रूप में लिखा जाएगा.

उन्होंने इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतनयाहू की ग्रेटर इसराइल योजना को पूर्ण रूप से ख़ारिज करते हुए उसकी निन्दा की, जिसके तहत सम्प्रभु अरब राष्ट्रों में सीमाओं का विस्तार किया जा रहा है.

साथ ही, उन्होंने क़तर पर हुए बर्बर हमले की भी निन्दा की. और इसराइली बस्तियों के ‘बाशिन्दों के आतंकवाद’ को भी, जोकि घर व खेत जला रहे हैं, पेड़ उखाड़ रहे हैं, गाँवों पर हमले कर रहे हैं और निहत्थे फ़लस्तीनी आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं.

“वे दिन की रौशनी में क़ाबिज़ इसराइली सेना के संरक्षण में लोगों की हत्या करते हैं.”

महमूद अब्बास ने कहा हमारे लोगों ने जो कुछ भी सहा है, उसके बावजूद, हमास द्वारा 7 अक्टूबर [2023] को इसराइल पर किए गए हमलों की वो निन्दा करते हैं.

उनके अनुसार, इसराइली नागरिकों को निशाना बनाना, उन्हें बन्धक बना लेना, न तो फ़लस्तीनी लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और न ही आज़ादी व स्वाधीनता के लिए उनके संघर्ष को दर्शाता है.

फ़लस्तीनी नेता ने ग़ाज़ा पट्टी को फ़लस्तीनी राष्ट्र का एक अखंडनीय हिस्सा बताया और कहा कि फ़लस्तीनी प्राधिकरण वहाँ शासन व्यवस्था और सुरक्षा का पूर्ण दायित्व लेने के लिए तैयार है.

“हमास की वहाँ शासन व्यवस्था में किसी तरह की कोई भूमिका नहीं होगी,” और उन्हें अपने हथियार फ़लस्तीन की राष्ट्रीय प्राधिकरण को हस्तांतरित करने होंगे. “हम एक सशस्त्र राजसत्ता नहीं चाहते हैं.”

उन्होंने एक आधुनिक व लोकतांत्रिक फ़लस्तीन की आकाँक्षा का उल्लेख किया, जोकि क़ानून के राज, सत्ता के शान्तिपूर्ण हस्तांतरण, मानवाधिकारों के प्रति सम्मान और युवा व महिलाओं के सशक्तिकरण पर आधारित होगा.

राष्ट्रपति अब्बास ने ध्यान दिलाया कि फ़लस्तीन के मुद्दे पर एक हज़ार से अधिक यूएन प्रस्ताव हैं, जिन्हें अभी तक लागू नहीं किया जा सका है, जबिक फ़लस्तीनी नेताओं ने 1993 में ओस्लो समझौते के बाद से शान्ति समझौतों को अपनाया है और इसराइल को मान्यता दी है.

उनके अनुसार, इसराइल ने व्यवस्थागत ढंग से इन समझौतों को कमज़ोर किया है जबकि फ़लस्तीनियों ने अपने संकल्पों का निर्वहन किया है.

उन्होंने इस सप्ताह, न्यूयॉर्क में हुए उच्चस्तरीय सम्मेलन का स्वागत किया, और उन देशों का भी जिन्होंने फ़लस्तीन को मान्यता दी है. उन्होंने अन्य देशों से भी ऐसा करने और यूएन की पूर्ण सदस्यता के लिए समर्थन का आग्रह किया.

महमूद अब्बास ने कहा कि वह अमेरिका, सउदी अरब, फ़्राँस, संयुक्त राष्ट्र और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर प्रयास करने के लिए तैयार हैं, ताकि इसी सप्ताह पारित हुए शान्ति समझौते को लागू किया जा सके.

“फ़लस्तीनी लोग अपने मातृभूमि या अपने अधिकारों को कभी नहीं छोड़ेंगे. पीड़ा चाहे कितनी ही लम्बी खिंच जाए, यह जीवन जीने और जीवित रहने के लिए हमारी इच्छाशक्ति को नहीं तोड़ पाएगी.”