UNGA80: बच्चों की शिक्षा में निवेश, वैश्विक प्रगति में किया गया निवेश है - श्रीलंका
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने यूएन महासभा में जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए कहा कि निर्धनता और उससे उपजने वाली समस्याओं से हमारे भविष्य पर परछाई गहरा रही है, जिसके मद्देनज़र इससे निपटने के उपायों पर ध्यान केन्द्रित किए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने देश की प्रगति में शिक्षा की भूमिका को अहम बताया जिससे हर एक व्यक्ति के भविष्य को तय किया जा सकता है.
उन्होंने बुधवार को महासभा हॉल में जुटे प्रतिनिधियों को कहा कि एक ऐसी दुनिया जिसमें टैक्नॉलॉजी की भूमिका बढ़ रही है, वहाँ इस समस्या के अवांछित नतीजे हो सकते हैं.
“बच्चे बिना शिक्षा की सुलभता के किस तरह से रह सकते हैं?” उनके अनुसार, हर महान राष्ट्र की नींव में शिक्षा की सबसे अहम भूमिका है, जोकि एक व्यक्ति के भविष्य को तय करता है.
“हमारा मज़बूत विश्वास है कि शिक्षा में निवेश, वैश्विक प्रगति में निवेश है.”
श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने मादक पदार्थों की समस्या को एक जटिल मुद्दा क़रार दिया, जिससे दुनिया भर में लाखों-करोड़ो लोग प्रभावित होते हैं. ड्रग कार्टेल के बढ़ते दबदबे से वैश्विक स्वास्थ्य, राजनीति और आम नागरिकों के कल्याण को ख़तरा है.
अनुरा कुमारा दिसानायके ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि ड्रग्स और अपराध के विरुद्ध वैश्विक एजेंडा को एक साथ मिलकर अमल में लाया जाना होगा.
ऐसे नियमों को लागू करना होगा, जिससे ड्रग तस्कर अन्य देशों में शरण न ले पाएँ, और पुनर्वास के लिए केन्द्रों को भी स्थापित किया जाना अहम है.
राष्ट्रपति दिसानायके ने भ्रष्टाचार को विकास में एक बड़ी बाधा बताया और कहा कि इससे निपटना एक विशाल चुनौती है. उन्होंने आवश्यक क़दम उठाने की पैरवी करते हुए कहा कि एक साहसिक, सही क़दम उठाने से हज़ारों क़दम उठ सकते हैं.
उन्होंने फ़लस्तीन में हालात के मुद्दे पर कहा कि श्रीलंका ने तीन दशकों तक युद्ध की व्यथा को झेला है और देश समझता है कि युद्ध व्यर्थ है. उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि मूकदर्शक बने रहने के बजाय, निर्णायक ढंग से लाखों लोगों की पीड़ा का अन्त किया जाना ज़रूरी है.
राष्ट्रपति दिसानायके के अनुसार, डिजिटल युग में हर किसी तक टैक्नॉलॉजी के लाभ व अवसर पहुँचाना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इसमें सफलता मिलने से विकास व शासन व्यवस्था को मज़बूती मिलेगी.
यदि हम विफल हुए तो एक बार असमानता, असुरक्षा और अन्याय बढ़ेगा और इसलिए यह ज़रूरी है कि टैक्नॉलॉजी क्षेत्र में व्याप्त असमानताओं को दूर किया जाए.