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यूएन महासभा के 80वें सत्र की अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने, 23 सितम्बर को जनरल डिबेट का आरम्भ किया.

UNGA80: संस्थापक सिद्धान्तों का पालन करें और 'एकजुटता के साथ बेहतर बनें', महासभा अध्यक्ष

UN Photo/Loey Felipe
यूएन महासभा के 80वें सत्र की अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने, 23 सितम्बर को जनरल डिबेट का आरम्भ किया.

UNGA80: संस्थापक सिद्धान्तों का पालन करें और 'एकजुटता के साथ बेहतर बनें', महासभा अध्यक्ष

यूएन मामले

संयुक्त राष्ट्र अपनी 80वीं वर्षगाँठ मना रहा है, ऐसे में सदस्य देशों को, दुनिया के लोगों को यह दिखाना होगा कि यह संगठन क्यों महत्वपूर्ण है और आने वाले दशकों में इसके संस्थापक सिद्धान्तों का पालन करना होगा. महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने मंगलवार को, उच्चस्तरीय जनरल डिबेट का आरम्भ करते हुए यह आहवान किया है.

उन्होंने कहा कि यह वर्षगाँठ उत्सव का क्षण होना चाहिए था, लेकिन यह कोई सामान्य वर्ष नहीं है, ग़ाजा, यूक्रेन, हेती और अन्य स्थानों पर संघर्ष और संकट जारी हैं.

महासभा अध्यक्ष ने कहा, "इन वास्तविकताओं का सामना करते हुए, अब जश्न मनाने का नहीं, बल्कि स्वयं से पूछने का समय है: संयुक्त राष्ट्र कहाँ है? स्पष्ट रूप से, हमें बेहतर करके दिखाना होगा."

यूएन चार्टर का पालन करें

ऐनालेना बेयरबॉक ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख़ अपनाया कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को "निन्दा करने वालों को, इन विफलताओं को हथियार बनाने" या यह तर्क देने की अनुमति नहीं देनी चाहिए कि यह विश्व संगठन धन की बर्बादी है, पुराना और अप्रासंगिक है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धान्तों की अनदेखी की जाती है, तो यह दस्तावेज़ की नाकामी या एक विश्व संगठन के रूप में संयुक्त राष्ट्र की विफलता नहीं है.

उन्होंने कहा, "चार्टर, हमारा चार्टर, उतना ही मज़बूत है जितना कि सदस्य देश इसे बनाए रखने की इच्छा रखते हैं. और इसका उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह ठहराने की उनकी जितनी इच्छा है."

कभी हिम्मत नहीं हारें

ऐनालेना बेयरबॉक ने ध्यान दिलाया कि दुनिया पीड़ा में है, और विफलताएँ हुई हैं. साथ ही, नेताओं से यह कल्पना करने को भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र के बिना यह स्थिति कितनी बदतर होती.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसी एजेंसियों के जीवन रक्षक कार्यों की तरफ़ भी ध्यान आकर्षित किया.

उन्होंने कहा, "कभी-कभी हम और अधिक काम कर सकते थे. लेकिन हमें इससे निराश नहीं होने की ज़रूरत नहीं है. अगर हम सही काम करना बन्द कर देंगे, तो बुराई हावी हो जाएगी."

"यह 80वाँ सत्र बड़े जश्न मनाने के बारे में नहीं है. यह हार नहीं मानने का संकल्प लेने के बारे में है. साथ मिलकर बेहतर बनने का संकल्प. ठीक वैसे ही जैसे, हमारे पूर्वजों ने आठ दशक पहले किया था."

युद्ध से शान्ति की ओर

संयुक्त राष्ट्र का जन्म दो विश्व युद्धों, जनसंहार की भयावहता के बाद हुआ था, और जब लगभग एक तिहाई मानवता, यानि 75 करोड़ लोग, उस समय भी औपनिवेशिक शासन के अधीन थे. उन्होंने कहा कि यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर ने "लाखों लोगों को आशा दी".

महासभा अध्यक्ष ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र दशकों से, शान्ति, मानवता और न्याय की ओर रास्ता दिखाने वाला एक दिशासूचक रहा है."

"हम सदैव सफल नहीं हुए हैं. लेकिन इस संगठन की कहानी आसान जीत की कहानी नहीं है. यह गिरने और उठने की कहानी है. स्वयं को और एक-दूसरे को फिर से ऊपर उठाने व और अधिक प्रयास करने की कहानी है."

उन्होंने कहा, "सदस्य देश यह साबित करने के लिए एकत्रित हुए हैं कि यह संस्था मायने रखती है."

"और इस संस्था के माध्यम से, यहाँ प्रतिनिधित्व करने वाला प्रत्येक राष्ट्र - चाहे वह कितना भी बड़ा या छोटा क्यों न हो - 80 साल पहले, सैन फ्रांसिस्को में पहली बार दिखाई गई शक्ति और एकता को फिर से जगा सकता है."

एक चौराहे पर

ऐनालेना बेयरबॉक ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय एक बार फिर एक चौराहे पर खड़ा है. "यह हम पर, हर एक सदस्य देश पर निर्भर है कि हम अपने पूर्वजों के समान ही, नेतृत्व दिखाएँ."

"जब कार्रवाई की ज़रूरत हो, तब कार्रवाई करें. अपने चार्टर के सिद्धान्तों को क़ायम रखें. साथ मिलकर बेहतर बनें."

इसके अलावा, उन्हें "दुनिया भर के लोगों को यह दिखाना होगा कि संयुक्त राष्ट्र मौजूद है. आज. कल. और अगले आठ दशकों तक," क्योंकि यह "हर देश के लिए जीवन बीमा है."