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यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, महासभा के 80वें सत्र को सम्बोधित कर रहे हैं.

UNGA80: उथलपुथल भरे दौर में, विश्व नेताओं से आपसी सहयोग व शान्ति के मार्ग पर बढ़ने का आग्रह

UN Photo/Loey Felipe
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, महासभा के 80वें सत्र को सम्बोधित कर रहे हैं.

UNGA80: उथलपुथल भरे दौर में, विश्व नेताओं से आपसी सहयोग व शान्ति के मार्ग पर बढ़ने का आग्रह

यूएन मामले

चाहे कितनी ही विशाल चुनौती हो या फिर कठिन घड़ी हो, हमें हिम्मत नहीं हारनी होगी और एकजुट होकर हर संकट पर विजय पानी होगी. शान्ति, न्याय व गरिमा के लिए. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने यूएन महासभा के ऐतिहासिक 80वें सत्र के दौरान में जनरल डिबेट के उदघाटन पर अपने सम्बोधन में विश्व नेताओं के यह पुरज़ोर अपील जारी की है. उन्होंने पाँच अहम प्राथमिकताओं का खाका प्रस्तुत करते हुए आग्रह किया है कि देशों की सरकारों को यह तय करना होगा कि वे भविष्य में किस प्रकार की दुनिया को आकार देना चाहते हैं.

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने मंगलवार को महासभा के उच्चस्तरीय सत्र को सम्बोधित करते हुए आगाह किया कि दुनिया आपस में गुंथे संकटों से जूझ रही है. युद्धों से लेकर मानवीय आपात स्थिति और जलवायु संकट तक.

यूएन प्रमुख ने विश्व के अनेक हिस्सों में हिंसक टकरावों, भूख और जलवायु आपदाओं के प्रति गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए सचेत किया कि हम लापरवाही से उपजे व्यवधान और अनवरत मानव पीड़ा के दौर में प्रवेश कर रहे हैं.

“शान्ति व प्रगति के स्तम्भ दंडमुक्ति की भावना, असमानता और बेपरवाही के बोझ तले दरक रहे हैं.”

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उन्होंने सैन्य आक्रमणों, हथियार के तौर पर इस्तेमाल में लाई जाने वाली भूख, सच्चाई दबाने के लिए भ्रामक जानकारी की भरमार, बमबारी का शिकार हुए शहरों से उठते धुँए, छिन्न भिन्न हो रहे सामाजिक ताने-बाने और समुद्री जल स्तर बढ़ने से जोखिम झेल रहे तटीय इलाक़ों की स्थिति पर क्षोभ जताया.

उन्होंने कहा कि इनमें से हर घटना एक चेतावनी है और एक सवाल भी है कि हम एक साथ मिलकर किस तरह की दुनिया को आकार देना चाहते हैं.

यूएन का महत्व

इस पृष्ठभूमि में, यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र की भूमिका बेहद अहम है.

“संयुक्त राष्ट्र केवल एक मुलाक़ात स्थल नहीं है, यह एक नैतिक दिशासूचक है, शान्ति के लिए एक शक्ति है...अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का संरक्षण और संकट में घिरे लोगों के लिए एक जीवनरेखा.”

महासचिव के अनुसार, आज की बहुध्रुवीय दुनिया में गतिशीलता का साथ मिल सकता है, लेकिन पारस्परिक सहयोग के बिना अस्थिरता का जोखिम है.

“कारगर बहुपक्षीय संस्थाओं के बिना बहुध्रुवीयता से उथलपुथल हालात को बढ़ावा मिलेगा. जैसाकि योरोप ने कटु सबक़ लिया था, जिसके नतीजे में प्रथम विश्व युद्ध हुआ.”

उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय सहयोग नासमझी नहीं है, बल्कि एक आवश्यकता है.

“कोई एक देश वैश्विक महामारी को अकेले नहीं रोक सकता है. कोई एक सेना बढ़ते तापमान को नहीं रोक सकती है. न किसी ऐल्गोरिथम से टूट चुके भरोसे को बहाल किया जा सकता है.”

संकट की इस घड़ी में, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पहले कभी इतनी महत्वपूर्ण नहीं रही है.

पाँच अहम प्राथमिकताएँ

यूएन महासचिव ने देशों की सरकारों से पाँच अहम क्षेत्रों पर ध्यान देने का आग्रह किया है.

युद्ध के बजाय शान्ति: सूडान से यूक्रेन और ग़ाज़ा तक हिंसक टकराव, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून की उपेक्षा की क़ीमत को दर्शाते हैं. “यूएन चार्टर वैकल्पिक नहीं है. यह हमारी नींव है.” इसलिए यह आवश्यक है कि युद्धविराम, जवाबदेही व कूटनीति को प्राथमिकता दी जाए.

गरिमा व अधिकार: मानवाधिकार, शान्ति की आधारशिला हैं. नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा सुनिश्चित करते हुए विकास के लिए वित्त पोषण को भी प्रोत्साहन देना होगा, ताकि स्वास्थ्य, शिक्षा व अवसरों में निवेश किया जा सके.

जलवायु न्याय: जीवाश्म ईंधन पर दाँव का हारना तय है. उसके बजाय, नवीकरणीय ऊर्जा, मज़बूत राष्ट्रीय जलवायु संकल्पों में निवेश करना होगा और सम्वेदनशील हालात से जूझ रहे देशों को वित्तीय संसाधन मुहैया कराने होंगे.

टैक्नॉलॉजी के बजाय मानवता: कृत्रिम बुद्धिमता व टैक्नॉलॉजी के अन्य साधनों को दायित्व के साथ इस्तेमाल में लाना होगा. जीवन-मृत्यु के सवाल का जवाब, टैक्नॉलॉजी से नहीं लिया जाना चाहिए. ऐसे वैश्विक मानक स्थापित करने होंगे जिससे प्रौद्योगिकी का उपयोग मानवता की सेवा के लिए किया जाए.

मज़बूत संयुक्त राष्ट्र: अनेक मोर्चों पर धधकते संकटों के बीच, संयुक्त राष्ट्र को परिस्थितियों के अनुरूप ढालना होगा और सदस्य देशों को संगठन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन सुनिश्चित करने होंगे. फ़िलहाल, विश्व में शान्ति के लिए किए जाने वाले एक डॉलर निवेश की तुलना में, युद्ध व हथियारों में 750 डॉलर ख़र्च होते हैं.