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फ़लस्तीन राष्ट्र के लिए गुटेरेश का समर्थन, अनेक देशों ने भी दी मान्यता

यरूशलेम का दृश्य जिसमें डोम ऑफ द रॉक और आसपास के शहर की छतें दिखाई दे रही हैं।
UN News/Maher Nasser पूर्वी येरूशेलम भी क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र का हिस्सा है जिसे अतीत में, भविष्य के फ़लस्तीनी राष्ट्र में शामिल किए जाने के प्रस्ताव हैं.

फ़लस्तीन राष्ट्र के लिए गुटेरेश का समर्थन, अनेक देशों ने भी दी मान्यता

शान्ति और सुरक्षा

मध्य पूर्व में इसराइल के पड़ोस में फ़लस्तीन राष्ट्र की स्थापना के मुद्दे को समर्थन बढ़ता नज़र आया है और सोमवार को यूएन महासभा में आयोजित उच्च स्तरीय सम्मेलन में फ़्रांस व सऊदी अरब ने एक स्वतंत्र फ़लस्तीन राष्ट्र की स्थापना को अपना समर्थन घोषित किया है. यूएन महासचिव ने भी फ़लस्तीन राष्ट्र की स्थापना को, मध्य पूर्व में शान्ति के लिए अपरिहार्य बताया है.

फ़लस्तीन राष्ट्र की स्थापना को, मध्य पूर्व में दशकों से चले आ रहे टकराव का समाधान निकालने के लिए अहम क़दम माना जा रहा है. यह मुद्दा लगभग दो वर्ष पहले भड़के मौजूदा ग़ाज़ा युद्ध से भी पुराना है.

फ़लस्तीन राष्ट्र की स्थापना को ब्रिटेन, कैनेडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने भी अपना समर्थन व्यक्त किया है.

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फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्राँ ने सोमवार को हुए सम्मेलन में कहा, "फ़लस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों को मान्यता देने से, इसराइली लोगों के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ता, जिनका फ़्रांस ने पहले दिन से समर्थन किया है और जिनके प्रति वह कम प्रतिबद्ध नहीं है.”

उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए है क्योंकि हम आश्वस्त हैं कि यह मान्यता ही इसराइल में शान्ति लाने का एकमात्र समाधान है.”

फ़लस्तीन देश को यह मान्यता, हमास और उन सभी लोगों की हार है जो यहूदी-विरोधी नफ़रत को हवा देते हैं, यहूदी-विरोधी जुनून को हवा देते हैं और इसराइल देश का विनाश चाहते हैं."

सऊदी अरब के विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान अल सऊद ने फ़लस्तीन देश को मान्यता देने वाले देशों का धन्यवाद किया है और अन्य देशों से भी ऐसा ही करने का आहवान किया है ताकि एक "नई वास्तविकता" स्थापित हो सके, जिससे क्षेत्र "शान्ति, स्थिरता और समृद्धि का आनन्द ले सके."

फ़लस्तीन ने 'क़ब्ज़े के अपराधों' और हमास के 7 अक्टूबर के हमले की निन्दा की

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने वीडियो लिंक के ज़रिए इस सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए, इसराइल से गाज़ा में "इस समय रक्तपात को समाप्त करने और व्यापक शान्ति स्थापित करने" के लिए बातचीत करने का आग्रह किया.

उन्होंने शिखर सम्मेलन में कहा कि "हम (इसराइल के) क़ब्ज़े के अपराधों की निन्दा करते हैं, और हम आम लोगों की हत्या और लोगों को बन्दी बनाए जाने की भी निन्दा करते हैं, जिसमें 7 अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा किए गए हमले भी शामिल हैं."

उन्होंने आगे कहा कि "हमास की सरकार में कोई भूमिका नहीं होगी, और उसे वल अन्य गुटों को अपने हथियार फ़लस्तीनी प्राधिकरण को सौंपने होंगे, क्योंकि हम एक एकीकृत राष्ट्र चाहते हैं. एक वैध, एक सशस्त्र है, और एक क़ानून."

'किसी भ्रम में नहीं रहें'

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस सम्मेलन का आयोजन करने के लिए फ़्रांस और सऊदी अरब को धन्यवाद देते हुए कहा कि "हमें कोई भ्रम नहीं होना चाहिए. इसराइल-फ़लस्तीनी टकराव कई पीढ़ियों से अनसुलझा रहा है." 

यूएन प्रमुख ने कहा, "संवाद बेदम नज़र आ रहा है. प्रस्तावों का उल्लंघन किया गया है. अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन किया गया है. दशकों की कूटनीति विफल रही है. स्थिति असहनीय है, और यह हर घंटे बिगड़ती जा रही है."

उन्होंने कहा कि “हम आज इस दुःस्वप्न से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता खोजने में मदद करने के लिए यहाँ हैं.”

एंतोनियो गुटेरेश ने अपना यह रुख़ फिर दोहराया कि 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल में किए गए हमास के हमलों को किसी भी आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता, और ना ही फ़लस्तीनी लोगों को सामूहिक रूप से दंडित किए जाने को न्यायसंगत ठहराया जा सकता है.

युद्धविराम की पुकार

यूएन प्रमुख ने ग़ाज़ा में युद्धविराम लागू किए जाने और तमाम बन्धकों की रिहाई, और साथ ही ग़ाज़ा में मानवीय सहायता की सुरक्षित, बिना शर्त और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने की अपनी पुकार फिर दोहराई, और कहा कि ये सभी तत्काल होने चाहिए.

उन्होंने कहा कि पश्चिमी तट में इसराइली गतिविधियों को किसी भी आधार पर अनदेखा नहीं किया जा सकता, जिनसे दो-राष्ट्र समाधान के वजूद के लिए ख़तरा उत्पन्न हो रहा है. 

एंतोनियो गुटेरेश ने पश्चिमी तट इलाक़े में यहूदी बस्तियों के बेतहाशा विस्तार पर रोक लगाने, "वहाँ भूमि को हड़पने के ख़तरे" और यहूदी बाशिन्दों द्वारा की जा रही हिंसा में बढ़ोत्तरी को रोके जाने का आहवान किया.

फ़लस्तीन देश की स्थापना एक अधिकार है

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा, "इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, हमें स्वयं को दो राष्ट्र की स्थापना के समाधान के लिए फिर से प्रतिबद्ध करना होगा."

उन्होंने तालियों की गूंज के बीच कहा, "हमें बेबाक होना होगा: फ़लस्तीनी लोगों के लिए उनके देश की स्थापना, उनका अधिकार है, कोई पुरस्कार नहीं."

"और फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना को नकारना, हर जगह अतिवादियों के लिए एक तोहफ़ा होगा. दो राष्ट्रों की स्थापना के बिना, मध्य पूर्व में कोई शान्ति नहीं होगी, और दुनिया भर में अतिवाद फैलेगा."

'यह कोई 'नासमझ इच्छा' नहीं है

यूएन महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने ज़ोर देकर कहा कि दो-राष्ट्र समाधान ही, यह सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीक़ा है कि फ़लस्तीनियों और इ़सराइलियों, दोनों की भावी पीढ़ियाँ शान्ति, सुरक्षा और सम्मान के साथ रह सकें.

उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि कुछ लोग इसे एक नासमझ इच्छा मानते हैं" क्योंकि इस मामले पर पहला प्रस्ताव, "लगभग इस संगठन जितना ही पुराना है".

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जो लोग दशकों की विफलता की ओर इशारा करते हैं, उनके लिए सही लक्ष्य नहीं रखने का मतलब है कि "बुराई हावी हो जाएगी" और "इस संस्था का अन्त" हो जाएगा.

उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय न केवल दो-राष्ट्र समाधान के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि "इसके कार्यान्वयन के लिए ठोस, समयबद्ध और अपरिवर्तनीय क़दमों की पहचान" कर रहा है, और निर्णायक क़दम उठाने व अन्तरराष्ट्रीय गारंटी प्रदान करने के लिए तैयार है.