यूएन की 80वीं वर्षगाँठ: अतीत से सबक़ लेकर, एकजुटता के साथ आगे बढ़ने का आहवान
संगीत, स्मृति और शान्ति सन्देश. संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली में, संगठन की स्थापना की 80वीं वर्षगाँठ पर एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने मौजूदा संकटों की पृष्ठभूमि में संयुक्त राष्ट्र को मज़बूती देने और एकजुटता के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया. इसी सप्ताह, यूएन महासभा का वार्षिक उच्चस्तरीय सत्र भी है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए विश्व भर से नेता न्यूयॉर्क मुख्यालय में जुट रहे हैं.
इस ऐतिहासिक पड़ाव के लिए जनरल असेम्बली हॉल, नीली रौशनी में दमक रहा था. इस सन्देश के साथ कि एक साथ हैं, तो बेहतर हैं (Better Together).
यूएन महासभा के 80वें सत्र के लिए अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने अपने सम्बोधन में ध्यान दिलाया कि दो विश्व युद्धों, यहूदी जनसंहार (हॉलोकॉस्ट) से हुए विनाश की परछाई में संयुक्त राष्ट्र की नींव रखी गई थी.
उस दौर में, विश्व भर में 72 से अधिक क्षेत्रों में औपनिवेशिक शासन था.
दोराहे पर दुनिया
26 जून 1945 को यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर किए गए. महासभा प्रमुख के अनुसार, इसमें नेताओं ने अपने लोगों से, राष्ट्रों ने एक दूसरे से वादा किया था कि मानवता ने अपने सबसे काले अध्याय से सबक़ सीखा था.
इसके बावजूद, “ये घंटे एक बार फिर से स्याह महसूस हो रहे हैं.” ग़ाज़ा, यूक्रेन, सूडान और हेती में संकट धधक रहे हैं और ऑनलाइन माध्यमों पर नफ़रत फैल रही है.
“आज, हम जब संयुक्त राष्ट्र के 80 वर्ष पूरे रहे हैं, हम एक बार फिर से दोराहे पर खड़े हुए हैं.”
पूर्व जर्मन विदेश मंत्री ऐनालेना बेयरबॉक ने अपने कार्यकाल की थीम (बैटर टुगेदर) का उल्लेख करते हुए कहा कि, “हम सरल रास्ता नहीं ले सकते हैं और आसानी से हिम्मत नहीं हार सकते हैं. हमें सही रास्ता चुनना है; दुनिया को दिखाने के लिए कि हम एक साथ बेहतर हो सकते हैं.”
सभी राष्ट्रों के लिए स्थान
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अपने सम्बोधन में अतीत का उल्लेख करते हुए कहा कि बहुत से कर्मचारियों और प्रतिनिधियों में युद्ध के घाव देखे जा सकते थे.
उनके अनुसार, वे लोग आदर्शवादी नहीं थे, लेकिन उन्होंने मानवता के बदतरीन रूप को देखा था और वो जानते थे कि शान्ति, सबसे साहसिक, सबसे व्यावहारिक और सबसे आवश्यक प्रयासों में से है.
“संयुक्त राष्ट्र के निर्माण में, उन्होंने कुछ असाधारण को सृजित किया. एक ऐसा स्थान, जहाँ हर राष्ट्र, चाहे वो छोटा हो या बड़ा, एक साथ आकर उन समस्याओं को हल करते हैं, जिनसे कोई देश अपने बूते नहीं निपट सकता है.”
सिद्धान्तों पर प्रहार
महासचिव गुटेरेश ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सिद्धान्तों पर जैसी चोट की जा रही है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया.
“आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून को कुचला जा रहा है.” निर्धनता और भूख बढ़ रही है, जलवायु संकट विकराल रूप धारण कर रहा है, जबकि टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में प्रगति लड़खड़ा रही है.
“इसी समय, हम एक बहुध्रुवीय विश्व की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इन चुनौतियों का सामना करने के लिए, हमें न केवल संयुक्त राष्ट्र की रक्षा करनी होगी, लेकिन उसे मज़बूती भी देनी होगी.”
महासचिव गुटेरेश ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि इस क्षण, हमें स्पष्टता, साहस और पूरी लगन के साथ आगे बढ़ना होगा, ताकि शान्ति के वादे को साकार किया जा सके.
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