महमूद अब्बास, वीडियो सन्देश के ज़रिए, जनरल डिबेट को करेंगे सम्बोधित
फ़लस्तीनी प्राधिकरण के अध्यक्ष महमूद अब्बास पहले से रिकॉर्ड किए गए अपने एक वीडियो के माध्यम से, इस वर्ष यूएन महासभा में उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान जनरल डिबेट को सम्बोधित करेंगे. फ़लस्तीनी प्रतिनिधिमंडल को अमेरिकी वीज़ा न मिल पाने की वजह से, संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को इस सिलसिले में एक प्रस्ताव लाया गया, जोकि भारी समर्थन से पारित हुआ है. इस प्रस्ताव में फ़लस्तीनी नेता को रिकॉर्ड किए गए सन्देश की अनुमति दी गई है.
विश्व भर से नेता अगले सप्ताह, वार्षिक उच्चस्तरीय सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय का रुख़ कर रहे हैं, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका ने फ़लस्तीनी प्रतिनिधिमंडल को वीज़ा देने से मना कर दिया है.
193 सदस्य देशों वाली महासभा में, 145 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि पाँच ने इसके विरोध में वोट डाला: इसराइल, नाउरु, पलाउ, पैराग्वे, संयुक्त राज्य अमेरिका.
छह देशों -- अल्बानिया, फ़िजी, नॉर्थ मैसेडोनिया, पनामा, पापुआ न्यू गिनी -- ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.
महासभा में पारित प्रस्ताव में पहले से रिकॉर्ड किए गए वक्तव्यों को प्रसारित करने के लिए प्रक्रिया तय की गई है. साथ ही, महमूद अब्बास को महासभागार में वीडियो के ज़रिए अपना सन्देश देने के लिए अधिकृत किया गया है, जिनका परिचय न्यूयॉर्क में उपस्थित एक फ़लस्तीनी प्रतिनिधि द्वारा दिया जाएगा.
इसके तहत, मध्य पूर्व में दो-राष्ट्र समाधान के मुद्दे पर आयोजित होने वाले उच्चस्तरीय सम्मेलन में भी पहले से रिकॉर्ड किए गए या फिर लाइव लिन्क के ज़रिए वक्तव्य पेश करने का अवसर होगा.
बताया गया है कि यह प्रावधान, महासभा के मौजूदा 80वें सत्र के लिए ही किया गया है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से, 29 अगस्त को फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन, फ़लस्तीनी के सदस्यों को वीज़ा न देने, उसे वापिस लेने की घोषणा की थी.
अमेरिका मंत्रालय ने कहा था कि शान्ति के लिए सम्भावनाओं को कमज़ोर करने और अतीत में किए गए संकल्पों को निभा पाने में विफल रहने की वजह से ये क़दम उठाया गया.
इस बीच, अगले सप्ताह आयोजित कार्यक्रमों के सिलसिले में, यूएन महासभा ने सऊदी अरब के युवराज और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिल सलमान को एक वीडियो या पहले से रिकॉर्ड किए गए सन्देश के ज़रिए, 22 सितम्बर को एक उच्चस्तरीय सम्मेलन को सम्बोधित करने की अनुमति दी है.
इसके लिए, सऊदी अरब के एक प्रस्ताव को बिना मतदान के ही पारित किया गया.