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समान वेतन ही मौलिक अधिकार और सतत विकास की नींव, UN Women

भारत के असम में एक चाय बागान में पारंपरिक पोशाक पहने महिलाएं मदर्स क्लब की बैठक के लिए एकत्रित हुई हैं।
UN Women/Ruhani Kaur हेमा, माताओं के एक क्लब की सदस्य हैं, जो चाय बागान में महिला श्रमिकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को सम्बोधित करता है.

समान वेतन ही मौलिक अधिकार और सतत विकास की नींव, UN Women

महिलाएँ

महिलाओं की प्रगति व बेहतरी के लिए काम करने वाली संस्था - UN Women ने 'अन्तरराष्ट्रीय समान वेतन दिवस' के अवसर पर, दुनिया भर की महिला श्रमिकों के साथ एकजुटता जताते हुए, पुरुषों व महिलाओं के बीच मौजूद वेतन खाई को पाटने और समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करने की अपील की है. यह दिवस हर वर्ष 18 सितम्बर को मनाया जाता है.

UN Women ने याद दिलाया है कि बीजिंग घोषणा-पत्र और कार्ययोजना (1995) तथा 2030 सतत विकास एजेंडा में सरकारों ने इस प्रतिबद्धता को दोहराया था.

इसके बावजूद आज भी महिलाएँ समान कार्यों के लिए, पुरुषों से औसतन 20 प्रतिशत कम आय पाती हैं. 

यह अन्तर नस्लीय और जातीय अल्पसंख्यकों, प्रवासी महिलाओं और विकलांग महिलाओं के लिए और भी अधिक है.

यह असमानता महिलाओं के अधिकारों और आय सुरक्षा को कमज़ोर करती है तथा समावेशी आर्थिक विकास में बाधा डालती है.

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के कन्वेंशन-100 में निहित “समान कार्य के लिए समान वेतन” न केवल एक मौलिक अधिकार है बल्कि सतत विकास और लैंगिक समानता की आधारशिला भी है.

ठोस क़दम की आवश्यकता

इस यूएन संस्था ने वर्ष 2030 एजेंडा हासिल करने के लिए अब तुरन्त ठोस क़दम उठाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है,

साथ ही, सरकारों, नियोक्ताओं, श्रमिक संगठनों व अनुसन्धान संस्थानों से सामूहिक प्रयास तेज़ करने का आग्रह किया है.

इसमें सरकारों से पारदर्शी और न्यायसंगत नीतियाँ बनाने, नियोक्ताओं से वेतन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और कार्यस्थलों को लैंगिक रूप से उत्तरदाई बनाने, तथा श्रमिक संगठनों से सामूहिक बातचीत के जरिए समान वेतन की माँग को आगे बढ़ाने की अपील की गई.