'अगले 80 वर्षों तक मज़बूत भूमिका निभाने के लिए, यूएन को बदलते समय के साथ बदलना होगा'
संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने कहा है कि अपनी स्थापना की 80वीं वर्षगाँठ पर संगठन को भावी पीढ़ियों व बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप ख़ुद को ढालना होगा और उपयुक्त बदलावों को अपनाना होगा.
उन्होंने 22 सितम्बर को महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह की शुरुआत से पहले बुधवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए यह बात कही.
महासभा अध्यक्ष बेयरबॉक ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर (संगठन के संस्थापक दस्तावेज़) के महत्व, सुधार लागू करने की अहमियत व व्यापक समावेशन की आवश्यकता पर बल दिया.
उन्होंने कहा, “हमारा कार्य यह सुनिश्चित करना है कि अगले 80 वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र मज़बूती से खड़ा रहे.”
प्रासंगिकता के लिए सुधार
ऐनालेना बेयरबॉक की अध्यक्षता के दौरान यूएन महासभा के 80वें सत्र की थीम है: ‘एकजुटता बेहतर: शान्ति, विकास और मानवाधिकारों के लिए 80 साल और उससे आगे’.
उन्होंने कहा कि यह इस सत्य को दर्शाती है कि कोई भी देश – चाहे उसका आकार, शक्ति या सम्पन्नता कुछ भी हो – अकेले उन सीमा-विहीन चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता जिनसे दुनिया जूझ रही है.
उन्होंने याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना मानव इतिहास के शायद सबसे अंधकारमय दौर में हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र चार्टर अस्तित्व में आया, जो हमें दिशा देता है और यह दर्शाता है कि हम मिलकर क्या हासिल करना चाहते हैं.
लेकिन बदलती दुनिया के 80 साल बाद अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र, बदलते समय में ऐसे बदलावों को अपनाए जिनसे अगले आठ दशकों तक यह संगठन आठ अरब लोगों को ये दिखा सके कि इसकी प्रासंगिकता अब भी क्यों बनी हुई है.
महासभा अध्यक्ष के अनुसार, यह भी महत्वपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र “यूक्रेन, ग़ाज़ा, सूडान और हेती से उठ रही शान्ति की पुकार का जवाब दे” और साथ ही जलवायु परिवर्तन, असमानता और तकनीकी प्रगति जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस कार्रवाई करे.
उन्होंने बताया कि इस वर्ष यूएन80 सुधार एजेंडा को आगे बढ़ाने, अगले महासचिव की नियुक्ति की दिशा तय करने और पिछले वर्ष सदस्य देशों द्वारा पारित भविष्य के सहमति पत्र के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान केन्द्रित होना चाहिए.
ऐतिहासिक अवसर...
जनरल डिबेट, 23 सितम्बर से शुरू हो रही है, जोकि प्रतिष्ठित महासभागार में होने वाली वार्षिक बैठक है, जहाँ से विश्व नेता अपनी बात दुनिया के सम्मुख प्रस्तुत करते हैं. इसमें लगभग 150 राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख हिस्सा लेंगे.
महासभा अध्यक्ष ने कहा कि वह इस ऐतिहासिक क्षण में हर अवसर का उपयोग करेंगी ताकि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और इसके मूल सिद्धान्तों के महत्व को रेखांकित किया जा सके.
उन्होंने फ़लस्तीन और इसराइल के दो-राष्ट्र समाधान पर उच्च-स्तरीय अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन की फिर से शुरुआत का भी ज़िक्र किया.
ऐनालेना बेयरबॉक ने कहा कि इसराइल-फ़लस्तीन विवाद को युद्ध और क़ब्ज़े से नहीं हल किया जा सकता और स्थाई शान्ति, सुरक्षा और सम्मान के लिए दो-राष्ट्र समाधान ही एकमात्र रास्ता है.
महासभा अध्यक्ष ने बताया कि इस सप्ताह के दौरान महिला अधिकारों, विश्व स्तर पर युवाओं के लिए कार्रवाई कार्यक्रम, गै़र-संक्रामक और मानसिक बीमारियों, म्याँमार में रोहिंग्या संकट, और परमाणु हथियारों के उन्मूलन समेत अन्य अहम मुद्दों पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हो रही हैं.
कार्रवाई का समय
उन्होंने कहा कि दुनिया में चुनौतियाँ बहुत हैं, लेकिन अब संवाद को सामूहिक कार्रवाई में बदलने का समय है.
“हम उस मोड़ पर हैं, जो संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षवाद के लिए निर्णायक समय है, और इसी समय हमें और मेहनत करनी होगी. 1945 में हमारे पूर्वजों ने अपने मतभेदों को भुलाकर सहयोग किया; आज हमें वही दृढ़ता चाहिए.”
महासभा अध्यक्ष ने “वचन को कार्रवाई, प्रतिबद्धता को प्रगति, और आशा को वास्तविकता में बदलने की इच्छा और साहस” की आवश्यकता बताई.