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यूएन मंच पर वैश्विक आवाज़ें: UNGA80 की कुछ अहम गतिविधियों का झरोखा

 वैश्विक नेता महासभा में अपनी प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं.
UN Photo/Eskinder Debebe
वैश्विक नेता महासभा में अपनी प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं.

यूएन मंच पर वैश्विक आवाज़ें: UNGA80 की कुछ अहम गतिविधियों का झरोखा

यूएन मामले

विश्व भर के नेता, न्यूयॉर्क के मैनहैटन में ईस्ट रिवर के किनारे स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एकत्र होने जा रहे हैं, जो यूएन महासभा की वार्षिक उच्च स्तरीय बैठक में शिरकत करेंगे, जिसे हाल की स्मृति में सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक बैठकों में से एक माना जा रहा है. इस वर्ष यूएन महासभा का 80वाँ सत्र है.

संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों और दो पर्यवेक्षक प्रतिनिधिमंडलों के प्रतिनिधि, यूएन महासभा की General Debate में हिस्सा लेंगे, जिसका आयोजन प्रतिष्ठित महासभा परिसर में किया जाएगा. 

इसी दौरान, यूएन परिसर में कई उच्च स्तरीय बैठकों में चर्चाएँ चल रही होगीं, जो मानवता के सामने मौजूद सबसे ज्वलन्त चुनौतियों पर ध्यान केन्द्रित करेंगी.

युद्ध, जलवायु परिवर्तन, लैंगिक असमानता के वैश्विक संकटों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े नैतिक प्रश्न के बीच, यह उच्च स्तरीय सप्ताह केवल एक परम्परा भर नहीं है. 

यह बैठक, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के लिए विचार करने, फिर से प्रतिबद्धता व्यक्त करने और साझा भविष्य की फिर से कल्पना करने का महत्वपूर्ण अवसर है.

यह आयोजन संयुक्त राष्ट्र के मुख्य विचार-विमर्श निकाय यानि महासभा के 80वें सत्र की शुरुआत के प्रतीक हैं, जिसे आमतौर पर UNGA80 कहा जा रहा है. जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 80वीं वर्षगाँठ भी है.

आइए, जानते हैं कि UNGA80 के दौरान किन बातों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है.

General Debate: भाषण, भाषण और भाषण

ऐनालेना बेरयबॉक (बाईं ओर), संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र की अध्यक्ष, यूएन मुख्यालय में एक बैठक का उद्घाटन करते हुए.
UN Photo/Loey Felipe

23 सितम्बर से शुरू हो रही जनरल डिबेट, कई मायनों में महासभा सत्र का मुख्य आकर्षण मानी जाती है. वैश्विक नेतागण, महासभा हॉल के सुनहरे पृष्ठभूमि वाले पोडियम पर खड़े होकर अपनी प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं.

सभी 193 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के भाषणों को, छह दिनों में प्रभावी ढंग से आयोजित करने के लिए, प्रत्येक भाषण की सैद्धान्तिक और स्वैच्छिक समय सीमा 15 मिनट रखी गई है, लेकिन शायद ही कभी, इस पर पूरी तरह से अमल किया जाता है.

परम्परा के अनुसार, ब्राज़ील सबसे पहले बोलने वाला देश है, जिसके बाद अमेरिका बोलता है, जो कि मेज़बान देश है.

महासभा की नई अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक, 80 साल के इतिहास में इस पद पर बैठने वाली केवल पाँचवीं महिला हैं. वे इस बहस की अध्यक्षता करेंगी, जिसका विषय है: ‘एकजुटता बेहतर: शान्ति, विकास और मानवाधिकारों के लिए 80 साल और उससे आगे’.

मेरा देश कब बोलेगा?

जनरल डिबेट के बारे में और जानें

दो-राष्ट्र समाधान: ‘पहले से भी कहीं दूर’

युद्ध ने ग़ाज़ा को तबाह कर दिया है.
© UNICEF/Mohammed Nateel

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने जुलाई 2025 में कहा था कि दो-राष्ट्र समाधान, इसराइल-फ़लस्तीन के बीच युद्ध का हल निकालने और दोनों के लिए अलग राष्ट्र स्थापित करने का प्रस्तावित ढाँचा है, जो अब पूरा होने में पहले से भी अधिक मुश्किल लग रहा है.

यह समाधान वर्तमान ग़ाज़ा युद्ध से पहले दिया गया है, जो अक्टूबर 2023 में दक्षिणी इसराइल में हमास के घातक आतंकी हमलों के बाद शुरू हुआ.

ग़ाज़ा युद्ध में, मृतक संख्या लगभग 70 हज़ार के क़रीब पहुँच चुकी है, और हमास द्वारा बनाए गए इसराइली बन्धक अब भी कै़द में हैं. इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश दो-राष्ट्र समाधान पर बातचीत जारी रखेंगे, जिसकी बैठक सोमवार, 22 सितम्बर को यूएन मुख्यालय में आयोजित की जाएगी.

यह सम्मेलन जुलाई 2025 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित बैठकों की श्रृंखला की अगली कड़ी है, जिसमें न तो इसराइल और न ही अमेरिका ने भाग लिया था.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष ने 23 मई 2025 को कहा: "महासभा द्वारा दो-राष्ट्र समाधान की पहली मांग को सात दशक हो चुके हैं."

सभी यूएन समाचार कवरेज यहाँ देखें.

बीजिंग घोषणा के 30 साल: महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाना

1995 की बीजिंग घोषणा और कार्ययोजना को महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को आगे बढ़ाने और लैंगिक समानता हासिल करने के लिए अब तक का सबसे प्रगतिशील ढाँचा माना जाता है.

हालाँकि, इस ऐतिहासिक घोषणा के तीन दशक बाद कुछ प्रगति हुई है, मगर संयुक्त राष्ट्र महिला एजेंसी (यूएन वीमैन) ने चेतावनी दी है कि महिलाओं के अधिकारों के ख़िलाफ़ प्रतिरोध में वृद्धि देखी जा रही है.

विश्व भर के नेता 22 सितम्बर को, बीजिंग+30 कार्यवाई एजेंडा पर चर्चा करेंगे, जिसका लक्ष्य सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए ये हासिल करना है: डिजिटल क्रान्ति, निर्धनता से मुक्ति, शून्य हिंसा, पूर्ण और समान निर्णय लेने की शक्ति, शान्ति और सुरक्षा मामलों में समान भागेदारी और जलवायु न्याय.

SDG Gender Snapshot रिपोर्ट में लैंगिक समानता के बारे में और पढ़ें.

जलवायु: गर्म तापमान का सामना

विश्व, औद्योगिक युग से पहले के स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वृद्धि को रोकने के लिए संघर्ष कर रहा है.
© BRANTV

विश्व, औद्योगिक युग से पहले के स्तर से 1.5 डिग्री सैल्सियस से अधिक तापमान वृद्धि को रोकने के लिए संघर्ष कर रहा है. इस मुद्दे पर चर्चा के लिए 24 सितम्बर, बुधवार को एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर में जलवायु संकट की चिन्ताजनक गति और पैमाने का मूल्यांकन किया जाएगा.

वैश्विक नेता अपनी नई राष्ट्रीय जलवायु कार्ययोजनाएँ (Nationally Determined Contributions या NDCs) पेश करेंगे, जो देशों द्वारा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उठाए जाने वाले क़दमों का जानकारी देती हैं.

इस शिखर सम्मेलन में सरकार, व्यवसाय और नागरिक समाज के नेता भी शामिल होंगे, जिसमें रोकथाम, अनुकूलन, वित्त और जानकारी की विश्वसनीयता के क्षेत्रों में कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए विचार साझा किए जाएंगे

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा: "यह हमारे अवसर का क्षण है.”.

यह शिखर सम्मेलन, महत्वपूर्ण संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन यानि COP30 से पहले आयोजित किया जा रहा है, जो नवम्बर में ब्राज़ील में आयोजित होगा.

संयुक्त राष्ट्र और जलवायु परिवर्तन के बारे में यहाँ और पढ़ें.

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): नियम और सीमाएँ तय करना

जापान के क्योटो शहर में एक शॉपिंग मॉल में तैनात एक रोबोट.
© Unsplash/Lukas

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने दुनिया को तेज़ी से बदल दिया है, स्व-चालित वाहन, चिकित्सीय इमेज का विश्लेषण, व्यवसायों के लिए सामान का प्रबन्धन, वित्तीय कारोबार ऐल्गोरिदम, वर्चुअल सहायता और बिना कोई देरी किए भाषा अनुवाद जैसी चीज़ों में AI का असर साफ़ दिखाई दे रहा है.

हालाँकि, AI के लाभ असमान रूप से बँटे हुए हैं, और कई देशों के पास ऐसे उपकरण नहीं हैं, जो उनके समाज को बदल सकते और आम लोगों के जीवन को बेहतर बना सकते.

AI के तेज़ विस्तार के साथ जोखिम और चुनौतियाँ भी बढ़ गई हैं, जैसे सूचना सत्यता पर ख़तरा, मानवाधिकारों पर असर, और निगरानी जैसी समस्याएँ.

अभी तक AI के वैश्विक स्तर पर शासक निकाय की कोई मान्यता नहीं है. एक सर्वसमावेशी और ज़िम्मेदार AI शासन ढाँचा तैयार करने के लिए, 25 सितम्बर को न्यूयॉर्क में वैश्विक नेता इस विषय पर बैठक करेंगे.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा है: "उचित नियमों के बिना, AI असमानताओं और डिजिटल विभाजन को और बढ़ा सकती है और सबसे कमज़ोर वर्गों को असमान रूप से प्रभावित कर सकती है. हमें इस ऐतिहासिक अवसर का लाभ उठाना चाहिए… ताकि यह मानवता के लिए लाभकारी हो."

यूएन और AI के बारे में यहाँ और पढ़ें

“उच्च-स्तरीय” सप्ताह के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं:

ये सभी बैठकें दुनिया भर के नेताओं, विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को, साझा वैश्विक चुनौतियों पर विचार और कार्रवाई करने का अवसर देती हैं.