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महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह से पहले विश्व नेताओं से आग्रह, 'समाधानों के लिए सहयोग करें'

संयुक्‍त राष्ट्र के सचिव, Antigio गटर्स, न्यू यॉर्क में संयुक्‍त राष्ट्र के एक प्रेस सम्मेलन में बोल रहे हैं.
UN Photo/Eskinder Debebe यूएन महासचिव ने महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह से पहले न्यूयॉर्क में पत्रकारों को सम्बोधित किया.

महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह से पहले विश्व नेताओं से आग्रह, 'समाधानों के लिए सहयोग करें'

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने यूएन महासभा के 80वें सत्र में उच्चस्तरीय सप्ताह से पहले, विश्व नेताओं को आगाह किया है कि बहुत कुछ दाँव पर लगा हुआ है और यह समय एक दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय, गम्भीरता के साथ समस्याओं को हल करने और इसे समाधानों से परिपूर्ण सप्ताह बनाने का है.

यूएन प्रमुख ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए, बढ़ती वैश्विक दरारों, गहराते हिंसक टकरावों और धधकते संकटों पर चिन्ता जताई. 

उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय सहयोग का मूल सिद्धान्त ही पिछले कई दशकों में अपने सबसे नाज़ुक स्थान पर पहुँच गया है.

महासचिव गुटेरेश के अनुसार, महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह को कूटनीति के विश्व कप के रूप में देखा जाता है, जब दुनिया भर से नेता, राष्ट्राध्यक्ष, राष्ट्र प्रमुख, जनरल ऐसेम्बली के मंच से अपनी बात कहने के लिए एकत्र होते हैं.

“लेकिन यह एक दूसरे को नीचा दिखाने का मौक़ा नहीं हो सकता है, इसे समस्याओं को हल करने का अवसर बनाना होगा. बहुत कुछ दाँव पर लगा हुआ है.” 

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अनिश्चितता के भँवर में

यूएन प्रमुख ने सचेत किया कि दुनिया फ़िलहाल उथल-पुथल भरे दौर से गुज़र रही है, जहाँ आगे का रास्ता तय नहीं है. भूराजनैतिक दरारें गहरा रही हैं, टकरावों में उबाल आ रहा है, जलवायु परिवर्तन और नई टैक्नॉलॉजी से भी चिन्ताएँ उपजी हैं, जबकि असमानताएँ बढ़ रही हैं.

“अन्तरराष्ट्रीय सहयोग पर जिस तरह का दबाव है, वैसा हमारे जीवनकाल में पहले कभी नहीं देखा गया.” इनसे निपटने के लिए तुरन्त, ठोस समाधानों की आवश्यकता है.

अगले सप्ताह 150 से अधिक देशों से नेतागण न्यूयॉर्क में जुटेंगे, और उनके साथ बड़ी संख्या में अधिकारी व राजनयिक भी होंगे.

यूएन प्रमुख ने बताया कि उनका 150 से अधिक द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेने का कार्यक्रम है, जहाँ वह नेताओं से आग्रह करेंगे कि एक दूसरे के साथ सीधे बात की जाए, दरारों को पाटा जाए, जोखिमों में कमी लाई जाए और समाधानों को ढूंढा जाए.

अहम मुद्दे

उन्होंने शान्ति, जलवायु, दायित्वपूर्ण नवाचार, लैंगिक समानता, विकास के लिए वित्तीय संसाधनों और संयुक्त राष्ट्र सुधारों मुद्दों पर विशेष रूप से बल दिया, जिन पर अगले सप्ताह ध्यान केन्द्रित रहेगा.

महासचिव ने ग़ाज़ा, यूक्रेन, सूडान और अन्य क्षेत्रों में युद्धों का अन्त करने के लिए तुरन्त क़दम उठाने का आग्रह किया है, और दोहराया कि दो-राष्ट्र समाधान के ज़रिए ही मध्य पूर्व में स्थाई व न्यायसंगत शान्ति को सुनिश्चित किया जा सकता है.

जलवायु संकट से निपटने के लिए सदस्य देशों को मज़बूत राष्ट्रीय योजनाएँ पेश करनी होंगी, ताकि पेरिस जलवायु समझौते के अनुरूप, वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखा जा सके. हालांकि यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण और पहुँच से दूर होता जा रहा है.

साथ ही, उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) पर वैश्विक संवाद शुरू किए जाने की घोषणा की ताकि मानवता को केन्द्र में रखते हुए, टैक्नॉलॉजी के लाभ को हर किसी तक पहुँचाया जा सके.

केवल वादे मात्र नहीं

22 सितम्बर को शुरू हो रहे उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान, टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के इरादे से विश्व नेतों और अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के बीच एक शिखर बैठक होगी.

लैंगिक समानता पर बीजिंग सम्मेलन की ऐतिहासिक 30वीं वर्षगाँठ के सिलसिले में भी कार्यक्रम आयोजित होगा. 

महासचिव ने कहा कि यह सूची लम्बी है, चूँकि आवश्यकताएँ भी विशाल हैं. मौजूदा दौर में वैश्विक संकट केवल रुख़ दर्शाने और वादे करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जोकि ठोस प्रगति के लिए समर्पित हो.

“संयुक्त राष्ट्र स्थल है. अगला सप्ताह समय है. नेताओं को गम्भीर होकर अपने वादों को पूरा करना होगा.”