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UNHCR: म्याँमार के संकट के लिए मदद और धन बढ़ाने की पुकार

म्याँमार में अनेक वर्षों से गम्भीर संकट जारी है और भूकम्प ने भी हालात को बदतर बनाया है.
© IOM/Benjamin Suomela म्याँमार में अनेक वर्षों से गम्भीर संकट जारी है और भूकम्प ने भी हालात को बदतर बनाया है.

UNHCR: म्याँमार के संकट के लिए मदद और धन बढ़ाने की पुकार

प्रवासी और शरणार्थी

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैंडी ने म्याँमार की तीन दिन की यात्रा करके, वहाँ निरन्तर जारी हिंसा और संघर्ष के गम्भीर नतीजों का जायज़ा लिया है, जिसके कारण लाखों लोग विस्थापित और बेघर हो गए हैं. उन्होंने साथ ही क्षेत्र में तमाम शरणार्थियों की मदद के लिए वित्तीय सहायता की अपील भी जारी की है.

फ़िलिपो ग्रैंडी ने गुरूवार को कहा कि म्याँमार में लाखों लोग अपार पीड़ा का सामना कर रहे हैं. “हवाई बमबारी, सम्पत्ति के विनाश और (युद्धक गतिविधियों के लिए लोगों की) जबरन भर्ती के कारण, वे हर दिन अपने जीवन के लिए भय में रहते हैं.”

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उन्होंने कहा कि समुदाय सुरक्षा की तलाश में बार-बार पलायन कर रहे हैं. पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को हिंसा से बचाया जाना चाहिए, और ऐसे समाधान खोजे जाने चाहिए, जिनसे वे सुरक्षा और सम्मान के साथ अपने घरों को वापिस लौट सकें.

यूएन शरणार्थी उच्चायुक्त ने मार्च 2025 में आए विनाशकारी भूकम्प से प्रभावित समुदायों के स्थानों का दौरा किया और देश के भीतर ही विस्थापित और देश विहीन लोगों से भी बात की.

फ़िलिपो ग्रैंडी ने, ने प्यी ताव इलाक़े में व्यापक मानवीय पहुँच का आग्रह किया और जबरन विस्थापित लोगों के लिए समाधानों पर चर्चा की.

घरों को वापिस लौटने की प्रबल इच्छा

उन्होंने कहा कि देश के भीतर और पूरे क्षेत्र में शरणार्थी के रूप में जबरन विस्थापित हुए लाखों लोग, बस अपने घरों को वापिस लौटने के अलावा और कुछ नहीं चाहते. वे शान्ति के साथ आने वाली सुरक्षा और संरक्षा की मांग करते हैं - और इसके हक़दार भी हैं.

फ़िलिपो ग्रैंडी ने कहा, “सभी पक्षों को - अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के समर्थन से – म्याँमार के लोगों की दुर्दशा का समाधान खोजने के लिए गम्भीरता से प्रयास करना चाहिए."

"यह विशेष रूप से रोहिंग्या लोगों के लिए आवश्यक है, जिन पर न केवल हमला किया गया है और उन्हें विस्थापित किया गया है, बल्कि उन्हें बहुत लम्बे समय से उनके मूल अधिकारों से भी वंचित रखा गया है."

यूएन शरणार्थी उच्चायुक्त, सितम्बर के अन्त में, न्यूयॉर्क में म्याँमार में रोहिंग्या और अन्य अल्पसंख्यकों की स्थिति पर एक उच्च-स्तरीय सम्मेलन में भाग लेंगे.

फ़िलिपो ग्रैंडी इस सम्मेलन में, रोहिंग्या शरणार्थियों की स्वैच्छिक, सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थाई वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाने की ख़ातिर, अधिक क्षेत्रीय व अन्तरराष्ट्रीय प्रयासों का आहवान करेंगे.

इस बीच, ग्रैंडी ने म्याँमार के लोगों और पूरे क्षेत्र के शरणार्थियों की मदद के लिए, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से और अधिक वित्तीय सहायता का आहवान भी किया है.

UNHCR एजेंसी म्याँमार में, व्यापक मानवीय सहायता प्रयासों के हिस्से के रूप में, अन्य यूएन एजेंसियों, ग़ैर-सरकारी संगठनों और समुदायों के साथ मिलकर काम करती है.

UNHCR ने कहा है कि इस वर्ष म्याँमार में सहायता कार्रवाई के लिए उसे 8 करोड़ 83 लाख डॉलर की धनराशि की आवश्यकता है, लेकिन अभी तक उसे कुल राशि का केवल 33 प्रतिशत ही प्राप्त हुआ है.

म्याँमार की मानवीय आवश्यकताओं और भूकम्प के बाद मदद की वृहद यूएन योजना (2025) में 1 अरब 40 करोड़ डॉलर की धनराशि जुटाने की अपील जारी की गई है, जिसकी अभी तक केवल 22 प्रतिशत राशि ही प्राप्त हुई है.