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अफ़ग़ानिस्तान: महिला यूएन कर्मचारियों पर नई पाबन्दियाँ, सहायता प्रयासों पर जोखिम

बेज रंग की बनियान पहने United Nations की ओसीएचए की एक कार्यकर्ता ग्रामीण गांव में तीन अफगान महिलाओं और एक बच्चे के साथ बुनी हुई चटाई पर बैठी स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा कर रही है।
© UNOCHA/Charlotte Cans यूएन मानवीय सहायता एजेंसी - OCHA की एक महिला स्टाफ़, नंगाहार प्रदेश में एक विस्थापित महिला के साथ बातचीत करते हुए.

अफ़ग़ानिस्तान: महिला यूएन कर्मचारियों पर नई पाबन्दियाँ, सहायता प्रयासों पर जोखिम

महिलाएँ

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने चेतावनी दी है कि पूर्वी हिस्से में आए भूकम्प की वजह से, देश पहले से ही गम्भीर संकट का सामना कर रहा है और अब सत्तारूढ़ तालेबान द्वारा यूएन की महिला कर्मचारियों पर लगाए गए प्रतिबन्धों से हालात और बिगड़ सकते हैं. 

इस नए घटनाक्रम के मद्देनज़र, संयुक्त राष्ट्र ने गुरूवार को तालेबान प्रशासन से, उन प्रतिबन्धों को हटाने की अपील की है, जिनके तहत महिला कर्मचारियों को यूएन परिसर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है. 

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अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने आगाह किया कि इन पाबन्दियों की वजह से, हाल के घातक भूकम्प से प्रभावित लाखों लोगों तक जीवनरक्षक मानवीय सहायता और अन्य आवश्यक सेवाएँ पहुँचाने में गम्भीर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है.

तालेबान के सुरक्षा बलों ने रविवार को, राजधानी काबुल में संयुक्त राष्ट्र के परिसर में अफ़ग़ान महिला कर्मचारियों और ठेकेदारों को प्रवेश से रोक दिया.

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र कार्यालयों पर थोपे गए ये प्रतिबन्ध केवल राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि तालेबान नेतृत्व के लिखित या मौखिक आदेशों के बाद इन्हें देश भर में स्थित कार्यालयों तक लागू कर दिया गया है.

काबुल, हेरात और मज़ार-ए-शरीफ़ स्थित यूएन परिसरों के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा बल तैनात हैं, ताकि इन आदेशों को लागू किया जा सके.

यूएन के एक वक्तव्य के अनुसार, “यह स्थिति ख़ास तौर पर चिन्ताजनक है, क्योंकि अफ़ग़ान महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों पर पहले से ही कड़े प्रतिबन्ध लागू हैं.”

ग़ौरतलब है कि अगस्त 2021 में, तालेबान ने अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता को फिर से हथियाने के बाद, बीते चार वर्षों में, महिलाओं के अधिकारों को प्रभावित करने वाले कई फ़रमान जारी किए हैं. 

इनमें लड़कियों को माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा हासिल करने से रोकना, आवाजाही पर सख़्ती लगाना, रोज़गार अवसरों को सीमित करना, सार्वजनिक स्थलों पर उपस्थिति समेत अन्य पाबन्दियाँ शामिल हैं.

यात्रा से मनाही…

संयुक्त राष्ट्र को ऐसी ख़बरें भी मिली हैं कि तालेबान के सुरक्षा बल, महिला राष्ट्रीय कर्मचारियों को इलाक़ों की यात्रा से रोकने की कोशिश कर रहे हैं, जहाँ वे भूकम्प प्रभावित महिलाओं और लड़कियों तक सहायता पहुँचाने के लिए जा रहे थे.

इसके अलावा, यूएन की स्थानीय महिला कर्मचारियों को उन केन्द्रों तक पहुँचने से भी रोका जा रहा है, जिनके ज़रिए ईरान और पाकिस्तान से वापसी कर रहे अफ़ग़ान शरणार्थी देश लौट रहे हैं. 

तत्काल हटे प्रतिबन्ध

संयुक्त राष्ट्र की तालेबान अधिकारियों से बातचीत जारी है, साथ ही, प्रतिबन्धों को तत्काल हटाने की अपील भी की गई है, ताकि अफ़ग़ान जनता के लिए ज़रूरी सहायता कार्य बिना रुकावट जारी रह सकें.

यूएन ने कहा कि मौजूदा क़दम “पहले से तय व्यवस्थाओं” की अनदेखी हैं. “इन व्यवस्थाओं के तहत संयुक्त राष्ट्र ने पूरे देश में सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और सिद्धान्तों पर आधारित तौर-तरीक़ों से सहायता पहुँचाई है, जहाँ महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा सहायता सुनिश्चित की जाती रही है.”

यूएन कर्मचारियों की आवाजाही पर रोक और सहायता अभियानों में बाधा डालना, संगठन के कर्मचारियों को प्राप्त विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों से जुड़े अन्तरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है.