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शिक्षा पर हमले रोकना ज़रूरी, बाल अधिकार उल्लंघन के मामले बढ़े

एक महिला और चार बच्चे घर के अंदर चटाई पर बैठे हैं, खुली किताबों को देखते हुए कैमरे की ओर मुस्कुरा रहे हैं। पृष्ठभूमि में एक गुलाबी रंग का बैग दिखाई दे रहा है।
UNDP India यूएनडीपी परियोजना, उत्थान के तहत, तारा जाधव के बच्चों को करियर मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया, जिससे उन्हें शिक्षा के विस्तार के अवसर मिले.

शिक्षा पर हमले रोकना ज़रूरी, बाल अधिकार उल्लंघन के मामले बढ़े

संस्कृति और शिक्षा

युद्धग्रस्त इलाक़ों में, बच्चों के ख़िलाफ़ होने वाले छह सबसे गम्भीर अपराधों में, स्कूलों पर हमलों को सबसे ख़तरनाक माना गया है, लेकिन, इसके बावजूद दुनिया भर में शिक्षा पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं. शिक्षा पर हमले रोकने के अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर, दुनिया भर के देशों से, स्कूलों पर हमले तुरन्त रोके जाने की अपील की गई है.

शिक्षा प्रसार के लिए कार्य करने वाले एक संगठन Education Can not Wait (ECW) नामक संगठन ने यह भी आग्रह किया है कि अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून व स्कूलों की सुरक्षा सम्बन्धी घोषणा यानि Safe Schools Declaration का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2022 से 2023 के बीच लगभग 6 हज़ार ऐसे हमले दर्ज किए, जिनका निशाना छात्र, शिक्षक और शैक्षणिक संस्थान बने.

इन हमलों में 10 हज़ार से अधिक छात्र या तो मारे गए, अग़वा कर लिए गए, गिरफ़्तार हुए या फिर गम्भीर रूप से घायल हुए.

इसी दौरान, सैन्य उपयोग के लिए स्कूलों पर क़ब्ज़ा किए जाने की घटनाओं में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. 

गहराता संकट

बाल अधिकारों के उल्लंघन का यह संकट, हर साल और गहराता जा रहा है. 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि बच्चों के अधिकारों के हनन के, 41 हज़ार 370 मामले दर्ज हुए हैं. 

सबसे ज़्यादा उल्लंघन इसराइल और क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र (8,554), काँगो (4,043), सोमालिया (2,568), नाइजीरिया (2,436) और हेती (2,269) में हुए हैं.

जबकि, इन मामलों में सबसे तेज़ वृद्धि लेबनान (545 प्रतिशत), मोज़ाम्बीक़ (525 प्रतिशत), हेती (490 प्रतिशत), इथियोपिया (235 प्रतिशत) और यूक्रेन (105 प्रतिशत) में देखी गई.  

इसी अवधि में स्कूलों पर हमले 44 प्रतिशत बढ़े और यौन हिंसा की घटनाएँ 34 प्रतिशत तक बढ़ गईं.

पाकिस्तान के एक गाँव में बच्चे एक तस्वीर के लिए पोज़ दे रहे हैं। मुस्कुराते हुए बच्चों का एक समूह, जिनमें कुछ पारंपरिक वस्त्र पहने हुए हैं, पाकिस्तान के उसी गाँव में एक साथ बैठे हैं।
© UNICEF/Shehzad Noorani

उम्मीद बरक़रार...

मगर इस अन्धेरे के बीच उम्मीद की किरण भी नज़र आती है. 

ECW और उसके सहयोगी संगठन दुनिया भर में, शिक्षा के मोर्चे पर जीवनरक्षक सहयोग दे रहे हैं. इनमें मानसिक स्वास्थ्य और मनो-सामाजिक सहायता, सुरक्षित शिक्षण वातावरण, शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण, नए कक्षा स्थलों का निर्माण, बच्चों के लिए भोजन जैसी पहलें शामिल हैं.

यूक्रेन में युद्ध के कारण 1600 से अधिक स्कूल अब तक क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके हैं. इसके बावजूद, स्कूल कर्मचारी और समुदाय डटे हुए हैं. उनका साहस इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा की लौ बुझाई नहीं जा सकती.

यही कारण है कि दुनिया से अपील की जा रही है कि स्कूलों पर हिंसक हमले तुरन्त रोके जाएँ और शिक्षा के लिए अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता को और बढ़ाया जाए, क्योंकि आज बच्चों की शिक्षा में किया गया निवेश ही, आने वाले कल की शान्ति में निवेश है.