संक्षिप्त: यूक्रेन में रूसी हमलों पर क्षोभ, पाकिस्तान में बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रूसी सैन्य बलों द्वारा यूक्रेन पर 7 सितम्बर को किए गए हवाई हमलों की कठोर निन्दा की है, जिनमें बच्चों समेत अनेक लोग हताहत हुए हैं. उधर, मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) ने भयावह बाढ़ से जूझ रहे पाकिस्तान में राहत प्रयासों के लिए 50 लाख डॉलर की धनराशि आवंटित की है.
समाचार माध्यमों के अनुसार, यूक्रेन की हवाई प्रतिरक्षा व्यवस्था को दबाव से ध्वस्त करने के लिए 800 से अधिक ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. बड़ी संख्या में ड्रोन व मिसाइलों को टकराने से पहले ही ध्वस्त कर दिया गया, मगर 50 ड्रोन और 9 मिसाइलें अपने निशानों पर जाकर टकराईं.
कीव, ओडेसा, चेरनिहीव, ख़ारकीव, क्रेमेनचुक, ख़ेरसॉन समेत अन्य क्षेत्रों में हुए इस हमले में कम से कम 80 लोग हताहत हुए हैं.
इस हमले में राजधानी कीव के केन्द्र में एक सरकारी इमारत को भी निशाना बनाया गया और रिहायशी इमारतों व बुनियादी प्रतिष्ठानों को नुक़सान पहुँचा है.
यूएन महासचिव ने अपने वक्तव्य में कहा कि सरकारी संस्थाओं को निशाना बनाना, हिंसक टकराव में आई तेज़ी को दर्शाता है.
“आम नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों के विरुद्ध हमले, अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का उल्लंघन हैं. वे अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरन्त रोका जाना होगा.”
यूएन महासचिव ने दोहराया है कि यूक्रेन में एक न्यायसंगत, टिकाऊ शान्ति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए पहला क़दम, यहाँ तुरन्त, बिना किसी शर्त के युद्धविराम को लागू किया जाना है.
सहायता दल ज़रूरी सेवाओं को बहाल करने में जुटे हैं. साथ ही, अग्रिम मोर्चों पर तैनात समुदायों को समर्थन प्रदान किया गया है.
पाकिस्तान: बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए 50 लाख डॉलर
आपात राहत मामलों के लिए यूएन समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने भीषण बाढ़ से प्रभावित पाकिस्तान में राहत प्रयासों के लिए 50 लाख डॉलर की धनराशि आवंटित की है.
मॉनसून के मौसम में मूसलाधार बारिश, बाढ़ से पंजाब, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रान्तों समेत देश के अनेक हिस्से प्रभावित हुए हैं.
यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) के अनुसार, अनेक गाँव अब भी जलमग्न है और कुछ इलाक़ों में बाढ़ के जल की गहराई 10 मीटर तक होने की आशंका है. इस वजह से ज़रूरतमन्दों के लिए मानवीय सहायता का आकलन करने और वहाँ तक राहत पहुँचाने के कार्य में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
बाढ़ प्रभावितों के लिए स्वास्थ्य, आश्रय, भोजन, जल, साफ़-सफ़ाई और स्वच्छता समेत अन्य राहत सेवाओं की आवश्यकता है. यूएन के साझेदार संगठनों ने बाढ़ पीड़ित इलाक़ों में जल-जनित बीमारियों की आशंका जताई है.
आपात राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने रविवार को केन्द्रीय आपात प्रतिक्रिया कोष से मानवीय सहायता प्रयासों के लिए 50 लाख डॉलर की धनराशि जारी की है.
इससे पहले, OCHA के एशिया प्रशान्त क्षेत्रीय कोष से छह लाख डॉलर आवंटित किए गए थे. इस धनराशि के ज़रिए पीड़ितों के लिए नक़दी हस्तांतरण, आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य, जल व साफ़-सफ़ाई की व्यवस्था की जाएगी.
OCHA ने कहा है कि इस धनराशि से जीवनरक्षक सहायता में मदद मिलेगी, लेकिन मौजूदा संसाधन ख़त्म हो रहे हैं और इसलिए तत्काल अतिरिक्त रक़म मुहैया कराई जानी होगी.
यूएन एजेंसियाँ अपने साझेदार संगठनों के साथ पाकिस्तान सरकार के नेतृत्व में राहत प्रयासों को आगे बढ़ा रही हैं और पंजाब प्रान्त में कर्मचारियों की तैनाती की गई है.
यमन: इसराइल और हूथी लड़ाकों के बीच टकराव पर चिन्ता
यमन के लिए यूएन के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने इसराइल और हूथी लड़ाकों (अंसार अल्लाह गुट) के बीच जारी टकराव पर चिन्ता जताई है.
उन्होंने ध्यान दिलाया कि हूथी लड़ाकों द्वारा इसराइल को निशाना बनाकर हमले किए जा रहे हैं. 7 अक्टूबर को ही रामोन हवाई अड्डे पर एक ड्रोन हमला किया गया था.
इसके मद्देनज़र, विशेष दूत ने तनाव में कमी लाने और यमन में शान्ति प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए एकता पर बल दिया है.
उन्होंने इन हमलों को रोके जाने की अपील की और आगाह किया कि सैन्य टकराव भड़कने से क्षेत्रीय तनाव और बिगड़ेगा, जिससे यमन व वृहद क्षेत्र और अस्थिर हो सकता है.
हैंस ग्रुंडबर्ग ने यूएन कर्मचारियों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने, यूएन परिसर में जबरन घुसने और सम्पत्ति को ज़ब्त करने पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है.
पिछले सप्ताह, एक बार फिर से ऐसी घटनाओं की लहर उठी और फ़िलहाल 40 से अधिक संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी, अंसार अल्लाह की हिरासत में हैं.
विशेष दूत ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्य देशों के प्रतिनिधियों व अन्य राजनयिकों से मुलाक़ात के बाद यह बात कही है.
हैंस ग्रुंडबर्ग ने क्षोभ जताया कि 2021 से बड़ी संख्या में अन्य यूएन कर्मचारियों, राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर-सरकारी संगठनों के कर्मचारियों, नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों व राजनयिक मिशन के कर्मचारियों को बन्धक बना कर रखा गया है.