पापुआ न्यू गिनी की विविधता और जलवायु कार्रवाई एक मिसाल है, महासचिव
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को, पापुआ न्यू गिनी की राजधानी पोर्ट मोरस्बी में सांसदों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह द्वीपीय राष्ट्र इस बात का प्रमाण है कि विविधताओं को अपनाना, किस तरह से एक बड़ी शक्ति बन सकता है.
एंतोनियो गुटेरेश, कार्यकाल के दौरान पापुआ न्यू गिनी की यात्रा करने वाले पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव हैं, जोकि इस समय अपनी स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगाँठ मना रहा है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पापुआ न्यू गिनी में 800 से अधिक भाषाएँ और अनगिनत परम्पराएँ मौजूद हैं, फिर भी यह देश 'एक बातचीत' (One Talk) की साझा प्रतिबद्धता के साथ शान्ति, गरिमा और प्रगति की राह पर बढ़ता रहा है.
उन्होंने कहा, “आप बहुपक्षवाद और अन्तरराष्ट्रीय समाधानों के मज़बूत पैरोकार हैं, और आज की दुनिया को इसकी सबसे अधिक ज़रूरत है.”
बढ़ती चुनौतियाँ
महासचिव गुटेरेश ने वैश्विक उथल-पुथल की ओर इशारा करते हुए कहा कि ग़रीबी कम करने के प्रयास ठहर गए हैं, “क्रूरतम युद्ध लाइवस्ट्रीम पर देखे जा रहे हैं” और जलवायु संकट तेज़ी से गहराता जा रहा है.
इसके साथ ही भू-राजनैतिक तनाव, अनियंत्रित तकनीकें, बढ़ती असमानताएँ और लोकतंत्र के लिए सिमटती जगह भी बड़ी चुनौतियों के रूप में सामने हैं.
इस सन्दर्भ में, उन्होंने कहा कि पापुआ न्यू गिनी से दुनिया को कई अहम सबक़ मिल सकते हैं, जिनमें पहला है: सम्वाद के ज़रिए सहमति बनाना.
पिछले 50 वर्षों में, इस देश ने अनेक परम्पराओं, द्वीपों और भाषाओं को जोड़कर एक राष्ट्र का निर्माण किया है.
30 अगस्त को बोगनविल शान्ति समझौते की 24वीं वर्षगाँठ थी, जिसके तहत सरकार और अलगाववादियों में एक दशक से जारी हिंसक टकराव का अन्त हुआ था और स्वायत्त बोगनविल क्षेत्र की स्थापना की गई थी.
महासचिव ने कहा कि गहरे घावों के बावजूद पापुआ न्यू गिनी और बोगनविल ने दो दशक से अधिक समय तक शान्ति बनाए रखी है.
“आपने दिखाया है कि सम्वाद, धैर्य और आपसी सम्मान से उपचार का रास्ता मिलता है.”
जलवायु कार्रवाई में नेतृत्व
महासचिव ने कहा कि पापुआ न्यू गिनी से जलवायु कार्रवाई के विषय में भी सबक़ लिए जा सकते हैं. अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने हाल ही में एक ऐतिहासिक सलाहकार राय जारी की, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि जलवायु संकट से निपटा जाना, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत एक दायित्व है.
प्रशान्त द्वीपीय देशों ने इस विषय में अहम भूमिका निभाई है. यूएन प्रमुख ने कहा कि ICJ की सलाहकार राय, पापुआ न्यू गिनी, मेलानेशिया, और वृहद प्रशान्त क्षेत्र के नेतृत्व का परिचायक है.
उन्होंने कहा कि ब्राज़ील के बेलम में आगामी जलवायु सम्मेलन, कॉप30 के दौरान आपकी आवाज़ महत्वपूर्ण होगी, एक ऐसे समय में जब वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के प्रयास ख़तरे में हैं.
महासचिव ने देशों से नई राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई योजनाएँ तैयार करने की अपील की हैं, जो तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लक्ष्य से मेल खाती हों, सभी प्रकार के उत्सर्जन पर अंकुश लगाने में सक्षम हों और जीवाश्म ईंधन के विकल्पों को बढ़ावा दें.
उन्होंने जलवायु वित्त पोषण पर कार्रवाई की अपील करते हुए कहा कि जलवायु के कारण होने वाली क्षति व हानि से निपटने के लिए स्थापित किए गए कोष योगदान बढ़ाना होगा, और समृद्ध देशों को अपना वादा निभाते हुए अनुकूलन प्रयासों के लिए दोगुनी धनराशि उपलब्ध करानी होगी.
महिलाओं की भागीदारी
महासचिव ने कहा, “शान्ति और प्रगति की कोई भी कहानी तब तक अधूरी है, जब तक उसमें आधी आबादी की पूरी भागीदारी न हो. यह एक और क्षेत्र है जहाँ आपके पास दुनिया के लिए उदाहरण कायम करने का अवसर है.”
उन्होंने पापुआ न्यू गिनी की संसद द्वारा हाल ही में लैंगिक हिंसा के विषय में, पूरे दिन की गई बहस का स्वागत किया और याद दिलाया कि महिलाओं की आवाज़ और प्रतिनिधित्व को मज़बूत बनाना केवल न्याय का प्रश्न नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति का भी स्रोत है.
उन्होंने कहा, “जब हम महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की रक्षा करते हैं, तो परिवार फलते-फूलते हैं, समुदाय मज़बूत होते हैं और संस्थाएँ अधिक जवाबदेह बनती हैं.”