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ग़ाज़ा: इसराइली सैन्य कार्रवाई में तेज़ी के बीच, कुपोषण से मौतों का सिलसिला जारी

ग़ाज़ा में मार्च 2025 के बाद से कुपोषण मामलों में वृद्धि हुई है. (फ़ाइल)
© UNICEF/Mohammed Nateel
ग़ाज़ा में मार्च 2025 के बाद से कुपोषण मामलों में वृद्धि हुई है. (फ़ाइल)

ग़ाज़ा: इसराइली सैन्य कार्रवाई में तेज़ी के बीच, कुपोषण से मौतों का सिलसिला जारी

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने आगाह किया है कि ग़ाज़ा में भूख संकट में फँसे फ़लस्तीनियों के लिए हालात निरन्तर बिगड़ रहे हैं, मगर सहायता आपूर्ति पर इसराइली पाबन्दी जारी है और हमलों में तेज़ी आ रही है.

यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों को बताया कि ग़ाज़ा सिटी के इर्दगिर्द सैन्य गतिविधि जारी हैं और यही दक्षिणी हिस्से भी हो रहा है, जिसका आम नागरिकों पर भीषण असर हुआ है. मृत, घायल व विस्थापितों का आँकड़ा बढ़ रहा है.

“हमारे सहकर्मियों के अनुसार, लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, मुख्यत: तटीय इलाक़े की ओर.”

एक अनुमान के अनुसार, मध्य-अगस्त से अब तक 76 हज़ार से अधिक लोग नए सिरे से विस्थापित हुए हैं, जिनमें 23 हज़ार से अधिक मामले उत्तरी ग़ाज़ा से हैं.

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तटीय इलाक़े में टैंट की भरमार है, जिसकी वजह से ग़ाज़ा सिटी से आने वाले लोग अब मध्य ग़ाज़ा का रुख़ कर रहे हैं.

इस बीच, कुपोषण की वजह से हर दिन मौतों की रिपोर्ट भी मिल रही हैं. स्थानीय प्रशासन के अनुसार, क़रीब दो वर्षों से जारी इस युद्ध में कुपोषण के कारण 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें अनेक बच्चे हैं.

बिगड़ते हालात

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, स्थिति निरन्तर ख़राब हो रही है और जिन परिवारों के पास भोजन की व्यवस्था करने में समर्थ सदस्य नहीं हैं, उनके सबसे अधिक जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है.

यूएन एजेंसी ने पिछले सप्ताह, पाँच महीने के अन्तरालत के बाद डिजिटल वाउचर के ज़रिए अपनी खाद्य वितरण व्यवस्था फिर से शुरू की है. इसके ज़रिए 22 हज़ार लोगों तक मदद पहुँचाई गई है.

यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा कि युद्धविराम के ज़रिए ही बड़े पैमाने पर सहायता अभियान शुरू किया जा सकता है, ताकि अकाल का दायरा बढ़ने से रोका जा सके.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि पिछले युद्धविराम के दौरान, जनवरी से मार्च के बीच, हमने ग़ाज़ा पट्टी में लगभग हर एक व्यक्ति तक जीवनरक्षक मदद पहुँचाई थी और यह फिर किया जा सकता है.

WFP का कहना है कि ग़ाज़ा में सहायता टीमों की आवाजाही पर भारी सख़्ती है, और हर तीन में से केवल एक सहायता मिशन में बाधा का सामना करना पड़ रहा है या फिर उसे इसराइल से अनुमति ही नहीं मिल पा रही है.

इसकी वजह से अनेक मिशन को पूरा नहीं किया जा सका है और इसराइल द्वारा सख़्त जाँच प्रक्रिया के कारण सहायता आपूर्ति पहुँचाने में देरी का भी सामना करना पड़ रहा है.

शीर्ष फ़लस्तीनी अधिकारियों के वीज़ा पर रोक

इस बीच, समाचार माध्यमों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका ने उच्चस्तरीय महासभा सत्र से पहले, पिछले सप्ताह फ़लस्तीनी नेताओं को वीज़ा न जारी करने की घोषणा की थी. यह वार्षिक सत्र सितम्बर महीने में न्यूयॉर्क में यूएन मुख्यालय में आयोजित होगा.

इस सत्र के दौरान, 22 सितम्बर को एक सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्षों व सरकार प्रमुखों द्वारा एक राजनैतिक घोषणापत्र का समर्थन किए जाने की सम्भावना है. मध्य पूर्व में दो-राष्ट्र समाधान पर केन्द्रित इस घोषणापत्र को जुलाई में एक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान पारित किया गया था. 

यूएन प्रवक्ता ने एक पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि इस सम्मेलन में वरिष्ठ फ़लस्तीनी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा लेना आवश्यक है.