SDG-4: सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य, कितना कठिन है रास्ता?
शिक्षा एक ऐसी अहम चाबी है जो भावी पीढ़ियों के लिए सफलता के नए दरवाज़े खोल सकती है और निर्धनता के चक्र को भी तोड़ सकती है. संयुक्त राष्ट्र के महत्वाकाँक्षी 2030 एजेंडा के तहत, चौथा सतत विकास लक्ष्य (SDG-4) हर किसी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर ही केन्द्रित है. SDG-4 का सपना है - एक ऐसी दुनिया, जहाँ हर बच्चा और युवा स्कूल तक पहुँच सकें, जहाँ किसी को आर्थिक तंगी या लैंगिक भेदभाव के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहना पड़े, और हर किसी को, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तक समान पहुँच हो.
लक्ष्य यह है कि वर्ष 2030 तक, सभी लड़कों और लड़कियों को न केवल प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा निशुल्क उपलब्ध हो, बल्कि उन्हें किफ़ायती व्यावसायिक प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा तक समान पहुँच मिले.
साथ ही, लिंग और धन सम्बन्धी असमानताओं को समाप्त किया जाए, और कोई भी बच्चा शिक्षा के अवसरों से वंचित नहीं रहे.
कितनी प्रगति?
दुनिया में शिक्षा की दशा व दिशा को सुधारने में, पहले ही प्रगति धीमी रफ़्तार से हो रही थी, जिसे कोविड‑19 महामारी ने और धीमा कर दिया.
वैश्विक स्तर पर स्कूली शिक्षा पूरी करने की दर में, वर्ष 2015 के बाद से केवल मामूली वृद्धि हुई है, और सीखने की दक्षता अब भी कम स्तर पर बनी हुई है.
संयुक्त राष्ट्र के एक अनुमान के अनुसार, साल 2023 तक, लगभग 27 करोड़ 20 लाख बच्चे और युवा स्कूल से वंचित थे. यह संख्या 2015 की तुलना में तीन प्रतिशत अधिक है. मुख्य रूप से निम्न-आय वाले देशों में यह संख्या ज़्यादा है.
2015 से 2024 के दौरान, वैश्विक स्तर पर प्राथमिक स्कूल पूरा करने की दर 85 प्रतिशत से बढ़कर 88 प्रतिशत तक पहुँच गई, वहीं निचली माध्यमिक शिक्षा पूरा करने की दर 74 प्रतिशत से 78 प्रतिशत और उच्चतर माध्यमिक समापन दर 53 फ़ीसदी से 60 फ़ीसदी तक पहुँची. फिर भी, सब-सहारा अफ़्रीका में हर तीन में से दो बच्चे ही समय पर प्राथमिक स्कूली शिक्षा पूरी कर पाते हैं.
हालाँकि इस प्रगति के बावजूद, 2024 में दुनिया भर में 75 करोड़ से अधिक वयस्क निरक्षर बने रहे, जिनमें महिलाओं की कुल संख्या का 63 प्रतिशत थी.
वहीं, इंटरनैट के उपयोग की दर में उछाल आया है, इसके बावजूद, एक बड़ी आबादी के पास ज़रूरी कौशल का अभाव है, और इंटरनैट की सुलभता व उसे कारगर ढंग से इस्तेमाल कर पाने की क्षमता के बीच अन्तर है.
शिक्षा का महत्व...
शिक्षा वह माध्यम है जो कई अन्य सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करती है. जब लोग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करते हैं, तो वे निर्धनता के चक्र को तोड़ सकते हैं, असमानताओं को कम कर सकते हैं और लैंगिक समानता को भी साकार किया जा सकता है.
शिक्षा लोगों को स्वस्थ, टिकाऊ और एक समझदार जीवन जीने के लिए सक्षम बनाती है. यह सहिष्णुता और शान्तिपूर्ण समाज के निर्माण में भी सहायक है.
क्या हैं चुनौतियाँ?
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2030 के लिए निर्धारित शिक्षा लक्ष्यों की दिशा में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अब भी चुनौतीपूर्ण मुद्दे बरक़रार हैं.
वर्ष 2019 में, केवल 58 प्रतिशत बच्चों ने न्यूनतम पठन दक्षता (reading proficiency) हासिल की और केवल 44 प्रतिशत बच्चे ही गणित में न्यूनतम दक्षता हासिल कर पाए.
2018 से 2022 के दौरान, निचले माध्यमिक विद्यालय के छात्रों के दक्षता स्तर में गिरावट दर्ज की गई.
इसके अलावा, मूलभूत स्कूल सेवाओं की कमी, विशेष रूप से विकलांग बच्चों और लड़कियों के लिए, गुणवत्ता वाली शिक्षा तक पहुँच को बाधित करती है.
विश्व स्तर पर केवल 50 फ़ीसदी प्राथमिक विद्यालयों में ही विकलांग छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हैं. आर्थिक बाधाओं और स्कूल छोड़ने की ऊँची दर, अब भी ग़रीब और असमान क्षेत्रों में गम्भीर चुनौती बनी हुई हैं.
सबसे कम विकसित देशों में, स्कूलों में बुनियादी संसाधनों की सुविधा का नहीं होना भी एक चुनौती हैं.
प्राथमिक स्तर पर स्थिति सबसे गम्भीर है, जहाँ एक-तिहाई से अधिक स्कूलों में, बुनियादी स्वच्छता की सुविधा नहीं, आधे से अधिक में बिजली उपलब्ध नहीं और दो-तिहाई से अधिक में डिजिटल उपकरणों की कमी है.
इससे लड़कियाँ और महिलाएँ विशेष रूप से प्रभावित हैं. लगभग 40 प्रतिशत देशों में प्राथमिक शिक्षा में लैंगिक समता नहीं है. शिक्षा में यह पिछड़ापन युवतियों के कौशल विकास और रोज़गार के अवसरों को भी प्रभावित करता है.
क्या है समाधान?
SDG-4 को हासिल करने के लिए शिक्षा में निवेश को, एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना अनिवार्य है.
साथ ही, शिक्षा को निशुल्क व अनिवार्य बनाना, शिक्षकों की संख्या बढ़ाना, बुनियादी स्कूल ढ़ाँचे में सुधार लाना और डिजिटल परिवर्तन को अपनाना आवश्यक हैं. डिजिटल अन्तर को नहीं पाटे जाने की स्थिति में असमानताएँ और बढ़ेंगी.
इसके अलावा, सरकारों से शिक्षा को नीति और व्यवहार दोनों में प्राथमिकता देने की मांग की जा सकती है, और सभी बच्चों, विशेष रूप से कमज़ोर और वंचित समूहों के लिए निशुल्क व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.