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सूडान: दारफ़ूर में भीषण भूस्खलन में सैकड़ों लोगों की मौत की आशंका

दो महिलाएं और दो छोटे बच्चे सूडान के दक्षिण दारफुर के पूर्वी जेबेल मारा में एक शुष्क, बंजर भूभाग पर चल रहे हैं, जिसके पृष्ठभूमि में पहाड़ दिखाई दे रहे हैं।
UNAMID/Albert Gonzalez Farran जेबेल मर्रा के जवा गाँव में बच्चे.

सूडान: दारफ़ूर में भीषण भूस्खलन में सैकड़ों लोगों की मौत की आशंका

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार संगठनों ने सूडान के दारफ़ूर क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की आशंका के बीच, हरसम्भव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है, जहाँ मृतक संख्या एक हज़ार तक पहुँच सकती है. 

यह आपदा तरसिन गाँव में आई, जोकि मध्य और दक्षिण दारफ़ूर राज्यों की सीमा पर जेबेल मर्रा पर्वत श्रृंखला में स्थित है. बताया गया है कि पिछले कई दिनों तक लगातार हुई भारी बारिश, इस त्रासदी की वजह बनी. 

सूडान में संयुक्त राष्ट्र के अन्तरिम मानवतावादी और रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर, लूका रेंडा ने अपने एक वक्तव्य में इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवारों और सूडान की जनता के प्रति अपनी सम्वेदनाएँ व्यक्त की हैं.

उन्होंने आश्वासन दिया कि, “मानवतावादी समुदाय सूडान की जनता के साथ एकजुट है और यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा कि ज़रूरतमन्दों तक सहायता बिना किसी देरी के पहुँचे.”

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार संगठन आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए सक्रिय हैं.

युद्ध के बीच आपदा

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने इस आपदा को सूडान के हालिया इतिहास की सबसे घातक आपदाओं में से एक बताया और जनहानि पर गहरा शोक व्यक्त किया.

यह त्रासदी एक ऐसे समय में घटी है, जब सूडान पहले से ही एक भीषण युद्ध का दंश झेल रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और एक गम्भीर मानवीय संकट उपजा है. 

अप्रैल 2023 से परस्पर विरोधी सैन्य बलों, सूडानी सशस्त्र बल (SAF) और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच जारी हिंसक टकराव ने अब तक लाखों लोगों को विस्थापित किया है.

नॉर्थ दारफ़ूर की राजधानी अल फ़शर और उसके आसपास के क्षेत्रों में हिंसा की वजह से भागने के लिए मजबूर परिवारों के लिए, मर्रा पर्वतीय क्षेत्र एक शरणस्थली बन चुका है.

IOM के अनुसार, युद्ध और पाबन्दियों के कारण यह इलाक़ा अब भी मानवीय सहायता संगठनों के लिए मोटे तौर पर पहुँच से बाहर है, जिससे प्रभावित आबादी की मुश्किलें और बढ़ रही हैं.

एजेंसी ने सभी युद्धरत पक्षों से अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत, राहतकर्मियों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने का आग्रह किया है.