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SCO शिखर सम्मेलन: महासचिव ने बहुपक्षवाद को मज़बूती दिए जाने का किया आग्रह

UN के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ईरान, भारत, चीन और United Nations सहित अंतरराष्ट्रीय झंडों की एक पंक्ति के सामने से गुजर रहे हैं।
UN China संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन में हिस्सा लिया.

SCO शिखर सम्मेलन: महासचिव ने बहुपक्षवाद को मज़बूती दिए जाने का किया आग्रह

आर्थिक विकास

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में, बहुपक्षवाद को मज़बूत बनाने की अहमियत पर बल दिया है. साथ ही, उन्होंने ग़ाज़ा, यूक्रेन व अन्य स्थानों पर शान्ति की अपील की है.

इस यूरेशियाई क्षेत्रीय संगठन में 10 सदस्य देश शामिल हैं, और जनसंख्या व भौगोलिक क्षेत्रफल के लिहाज़ से यह दुनिया का सबसे बड़ा संगठन है.

महासचिव ने सोमवार को इस समूह के नेताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि “हम एक बहुध्रुवीय दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं, जो वास्तविकता भी है और एक अवसर भी.”

उन्होंने कहा कि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएँ व्यापार, कूटनीति और विकास को नया रूप दे रही हैं, मगर अन्याय और विभाजन भी गहराते जा रहे हैं.

सैद्धान्तिक नेतृत्व की ज़रूरत

यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि बहुपक्षवाद को मज़बूत करने, क़ानून के राज को बनाए रखने और हर जगह लोगों तक परिणाम पहुँचाने के लिए सैद्धान्तिक नेतृत्व अहम है.

उन्होंने कहा, “शंघाई सहयोग संगठन के पास एक अधिक शान्तिपूर्ण, समावेशी और टिकाऊ भविष्य को आकार देने की विशेष सम्भावना है.”

महासचिव ने चार प्राथमिक क्षेत्रों पर ध्यान देने की अपील करते हुए सबसे पहले वैश्विक शान्ति व सुरक्षा का उल्लेख किया.

स्थाई युद्धविराम की ज़रूरत 

उन्होंने ग़ाज़ा की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ मौत और विनाश का स्तर भयावह है, और अकाल ने अपनी गहरी जकड़ बना ली है.

महासचिव ने कहा, “हमें तत्काल और स्थाई युद्धविराम की ज़रूरत है; सभी बन्धकों की तुरन्त और बिना शर्त रिहाई; और मानवीय सहायता के लिए सुरक्षित, बेरोकटोक और निरन्तर पहुँच सुनिश्चित की जानी होगी.”

“और हमें दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में ठोस और अपरिवर्तनीय क़दम बढ़ाने होंगे – यही एकमात्र रास्ता है जिससे फ़लस्तीनियों और इसराइलियों दोनों के लिए न्यायपूर्ण और स्थाई शान्ति सम्भव है.”

उन्होंने यूक्रेन युद्ध पर कहा कि “अब समय आ चुका है कि युद्धविराम के ज़रिए न्यायपूर्ण, व्यापक और टिकाऊ शान्ति की दिशा में आगे बढ़ा जाए, जो यूएन चार्टर, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और यूएन प्रस्तावों के अनुरूप हो.”

महासचिव ने सूडान, म्याँमार, सहेल क्षेत्र, अफ़ग़ानिस्तान और अन्य क्षेत्रों में भी आम नागरिकों की सुरक्षा, सम्वाद बढ़ाने और शान्ति सुनिश्चित करने का आह्वान किया.

उन्होंने नेताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि “आपका नेतृत्व, कूटनीति व तनाव कम करने के प्रयासों में अहम है, जैसे कि आतंकवाद और अन्तरराष्ट्रीय ख़तरों के विरुद्ध आपकी कोशिशें भी.”

UN के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने United Nations और चीनी झंडों के सामने हाथ मिलाया।
UN China

सुधार और जलवायु कार्रवाई

महासचिव ने वैश्विक वित्तीय ढाँचे में सुधार लागू किए जाने की अपील की ताकि विकासशील देशों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिल सके. उन्होंने कहा, “हम अब 1945 में नहीं हैं…और हमारी संस्थाओं को आज की वास्तविकताओं का प्रतिबिम्ब होना चाहिए.”

इसके अलावा, उन्होंने जलवायु संकट से निपटने पर भी बल दिया. उन्होंने कहा, “हम एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गए हैं और उत्सर्जन में सार्थक कटौती ज़रूरी है. जी-20 देशों के समूह को नेतृत्व करना होगा, जोकि वैश्विक उत्सर्जन के 80 प्रतिशत के लिए ज़िम्मेदार हैं.”

उन्होंने सभी सरकारों से इस वर्ष नवम्बर में ब्राज़ील में, यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन, कॉप30 से पहले नई जलवायु कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत करने का आग्रह किया.

“हमें 2030 तक 1.3 ट्रिलियन डॉलर सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट रास्ता तय करना होगा. विकसित देशों को अपनी प्रतिबद्धताएँ निभानी होंगी और अनुकूलन (adaptation) पर भी ठोस प्रगति करनी होगी.”

यूएन महासचिव ने अनुकूलन प्रयासों के लिए धनराशि (adaptation finance) को दोगुना करने, समय पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ मज़बूत करने, लचीले बुनियादी ढाँचा का निर्माण और जीवाश्म ईंधनों से बाहर निकलते हुए नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ने पर बल दिया.

प्रौद्योगिकी में सहयोग

वहीं, चौथा क्षेत्र डिजिटल सहयोग का है, जहाँ नई तकनीकें व प्रौद्योगिकी अपने साथ अवसर व ख़तरे दोनों लेकर आ रही हैं.

उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अभी दो नए तंत्र स्थापित किए हैं: स्वतंत्र वैज्ञानिक पैनल और कृत्रिम बुद्धिमता (AI) के वैश्विक शासन पर सम्वाद, ताकि सभी देशों की आवाज़ सुनी जा सके और मौजूदा व्यवस्था बिखरने (fragmentation) से बचा जा सके.

महासचिव गुटेरेश ने कहा, “ये तंत्र वैश्विक एआई सहयोग में एक बड़ी प्रगति का संकेत हैं, जो संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट सामूहिक शक्ति का लाभ उठाते हैं.”

आम नागरिकों को प्राथमिकता

उन्होंने कहा कि जब संयुक्त राष्ट्र अपनी 80वीं वर्षगाँठ मना रहा है, देशों को 21वीं सदी में अन्तरराष्ट्रीय सहयोग मज़बूत करना होगा और हमेशा लोगों को प्राथमिकता देनी होगी.

इस सिलसिले में उन्होंने चीन की “ग्लोबल गवर्नेंस” पहल का स्वागत किया, जिसकी घोषणा उसी दिन की गई. उन्होंने कहा कि यह पहल “बहुपक्षवाद में निहित है और अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था को सुरक्षित रखने की अहमियत को रेखांकित करती है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र केन्द्र में है और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून इसकी नींव है.”